बेटा और बेटी में फर्क ना करें | Mastram Emotional Hindi Story | Sad Hindi Story | Hindi Story

Mastram Emotional Hindi Story : मेरा नाम प्रतिभा है मैं एक ऐसे गांव की रहने वाली हूं जहां पर लड़कियों को कैद करके रखा जाता है इस गांव में लड़कियों को खुलकर जीने की परमिशन नहीं होती मगर मैं ऐसे ख्याल की नहीं थी हालांकि मैं भी इसी गांव में पली बड़ी थी और मेरी शादी भी इसी गांव में हुई थी मगर मैं सोचती थी कि बेटियां कैद करने के लिए नहीं होती बल्कि उनको तो खुली हवा में सांस लेने के लिए छोड़ देना चाहिए

 उनकी भी अपनी जिंदगी है और वह भी एक इंसान है क्या औरत को सिर्फ गृहणी बनाने के लिए ही बनाया गया है क्या उसे सिर्फ घर के ही कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है क्या पूरे घर की जिम्मेदारी और घर के लोगों की जिम्मेदारी औरत का ही कर्तव्य है इन सारे सवालों के जवाब शायद कोई नहीं जानता मैंने सोच लिया था कि मैं कभी अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं होने दूंगी मैं अपनी बेटी को फुल फ्रीडम देना चाहती थी

 उसे मजबूत बनाना चाहती थी ताकि व आने वाले समय से लड़ सके जोड़ते और लड़कियां घरेलू होती हैं वो सिर्फ घर के कामों के लिए ही परफेक्ट मानी जाती हैं पर जो औरत घर या बाहर दोनों के कामों में परफेक्ट हो वही एक समझदार और सुलझी हुई औरत होती है जो बुरे हालात में अपनी जिंदगी के हर मुश्किल समय में मजबूती से लड़ सकती है मैंने भी अपने ससुराल वालों से यहां तक कि अपने रिश्तेदारों से भी लड़ झगड़ करर अपनी बेटी को स्कूल पढ़ने के लिए भेज दिया था वो लोग उसकी शिक्षा के सख्त खिलाफ थे

 क्योंकि हमारे गांव में बेटियों को घर से बाहर निकलने की परमिशन नहीं होती थी और 13 साल की उम्र में में ही उनकी शादी कर दी जाती थी मेरी बेटी के दोस्त का भाई शहर से हायर स्टडी करके आया था और वह बहुत अच्छी अंग्रेजी बोलता था मेरी बेटी भी अंग्रेजी सीखना चाहती थी मेरी बेटी के दोस्त ने उससे कहा था कि तुम मेरे घर आ जाया करो मेरे भैया तुम्हें भी अंग्रेजी सिखा देंगे मेरी बेटी उससे अंग्रेजी की ट्यूशन लेने के लिए जाने लगी थी वह उसे फ्री में अंग्रेजी की ट्यूशन दे रहा था 

हमारे गांव में काफी सारे ऐसे लड़के थे जो शहर से पढ़कर आए थे और शहर में जाने के बाद ही कामयाब हुए थे मेरी बेटी के दोस्त का भाई पढ़ाई में बहुत अच्छा था और शहर से पढ़ाई करने के बाद वह अपने परिवार के लिए काफी कुछ कर रहा था मैं भी सोचती थी कि मेरी बेटी भी अगर पढ़ लिख जाएगी तो आगे चलकर वह मेरा सहारा बनेगी क्योंकि मेरा बेटा इस लायक नहीं था 

मगर जब से मेरी बेटी वहां ट्यूशन जाने लगी थी उसकी हरकतें बड़ी अजीब हो गई थी मैं सारा दिन अपने पति और अपने ससुराल वालों से बातें सुनती रहती थी फिर भी उसे रोज ट्यूशन और स्कूल भी बेजती थी उसके लिए मेहनत करती थी ताकि उसके खर्चे निकाल सकूं पर आज जो चीज उसने मेरे सामने रखी उसे देखकर तो मैं हैरान रह गई थी वो ट्यूशन से आई थी तो उस चीज को अपने हाथों में पकड़े हुए बैठी थी

 वह मेरे सामने ऐसे बैठ गई कि जैसे बहुत बड़ा वर्ल्ड कप लेकर आई है और मैं उसकी तारीफ करूंगी मैंने उससे पूछा कि यह सब कुछ क्या है क्या यह सब तुमने किया है तुम आखिर यह क्या कर रही हो उसने कहा मां मैं कुछ नहीं करती बस यह कहकर वह खामोश हो गई थी मुझे गड़बड़ का एहसास हो रहा था इस बारे में मैं किसी को बता भी नहीं सकती थी एक दिन मैं अपनी बेटी के दोस्त की यहां चली गई

 और चोरी चुपके उसके घर में जाकर देखा तो यह देखकर दंग रह गई कि मेरी बेटी तो अपने दोस्त के घर में थी ही नहीं वह कहकर तो मुझसे अपनी दोस्त के घर का ही आती थी अपनी बेटी को उसके दोस्त के घर पर ना देखकर मेरे तो होश ही उड़ गए थे कि आखिर वह कहां चली गई थी फिर जब अगले दिन मैंने अपनी बेटी का पीछा किया तो मुझे पता चल गया था अपनी बेटी को देखकर मेरे पास उसके पास तक जाने की हिम्मत नहीं थी 

लेकिन वह नजारा मुझे मार डालने के लिए काफी था क्योंकि मेरी बेटी मेरी बेटी की उम्र 16 साल थी उसका नाम मैंने अपने नाम की तरह ही रखा था प्रतीक्षा प्रतीक्षा बहुत ही भोली-भाली थी और बहुत खूबसूरत थी वह अपनी मां पर गई थी क्योंकि मैं भी बहुत खूबसूरत थी इतनी खूबसूरत थी कि मेरे पति ने जब मुझे पहली बार देखा था तो सबके सामने कह दिया था कि उसे मुझसे ही शादी करनी है मेरे घर वाले गरीब थे 

और वह दहेज नहीं दे सकते थे मेरे पति का कहना था कि उसे कुछ नहीं चाहिए सिर्फ वह मुझसे शादी करना चाहता है वह मुझे अपनी एक रिश्तेदार की शादी में मिला था मेरी सास हम दोनों के रिश्ते पर तैयार नहीं थी क्योंकि उनका कहना था कि उन्हें दहेज चाहिए उनकी बाकी की बहुएं काफी सारा दहेज लेकर आई थी लेकिन मेरे पति ने तो मेरी खूबसूरती की वजह से मुझे पसंद कर लिया था और उसने सब लोगों के सामने यह बात कह दी थी कि उसे दहेज नहीं चाहिए

 सब लोगों के सामने जब यह बात आई तो उसके निर्णय का मान किया गया था गांव के कुछ लोगों को उसकी यह बात पसंद भी आई थी कि वह एक गरीब बाप की बेटी से बिना दहेज के शादी करना चाहता है इसी तरह मेरी शादी अपने पति के साथ हो गई थी और मैं अपनी ससुराल आ गई पर इस बात के लिए कभी मेरी सास ने मुझे माफ नहीं किया था कि मैं कुछ लेकर नहीं आई हूं मेरे माता-पिता मुझे सब कुछ देना चाहते थे 

लेकिन एक गरीब इंसान सिर्फ सपने ही देख सकता है गरीब इंसान चाहता तो बहुत कुछ है लेकिन अपनी कमाई को दे कर वह अपनी ख्वाहिशों को पूरी करने से रुक जाता है मेरी मां ने शादी के समय मुझे अपना थोड़ा सा जेवर दे दिया था और मैं वही लेकर अपनी ससुराल चली गई थी मेरी सास ने मेरा सारा जेवर छीन लिया था और फिर भी उनका यही कहना था कि इससे क्या होता है तुम्हारी मां को दहेज देना चाहिए था 

अगर मेरे बेटे ने मना कर दिया था तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हारी मां खामोशी से तुम्हें विदा कर दे और इस थोड़े से जेवर से क्या होता है आजकल तो लोग बहुत सारा दहेज दे रहे हैं और व सब कुछ होता किसके लिए है लेकिन तुम देख लेना तुम अपने घर से दहेज नहीं लेकर आई हो कभी मेरा सामान इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है शुरू शुरू के दिनों में ही मेरी सास ने मुझे बहुत टॉर्चर किया था 

मेरे माता-पिता ने मेरी बहनों को भी ज्यादा कुछ नहीं दिया था क्योंकि हम सात बहने थे और मैं सबसे छोटी थी हमारा कोई भाई नहीं था मेरे पिता काफी बूढ़े हो चुके थे उनसे अब मेहनत मजदूरी का काम नहीं होता था मेरी मां भी बीमार रहती थी मेरी शादी हो होने के बाद वो दोनों घर में अकेले रह गए थे मुझे हमेशा फिक्र लगी रहती थी कि ना जाने वह दोनों किस तरह से अपना गुजारा कर रहे होंगे 

लेकिन भगवान किसी गरीब की प्रार्थना को रद्द नहीं करता मैं इतना जरूर जानती थी कि ऊपर वाले के यहां देर है पर अंधेर नहीं है और सब कुछ ठीक हो जाएगा मेरी मां ने मुझे इस आशीर्वाद के साथ विदा किया था कि जो हम तुम्हारे लिए नहीं कर सके वह तुम्हारा पति जरूर करेगा जो सुख हम तुम्हें अपने घर में नहीं दे सके वह सुख तुम्हें अपने ससुराल में भी मिलेगा पर ऐसा कुछ भी नहीं था शादी के एक साल में ही मैंने अपने बेटे को जन्म दिया था

 मैं उससे बहुत प्यार करती थी लेकिन मुझसे ज्यादा प्यार उसे मेरी सास करती थी मेरी सास का कहना था कि बेटियां तो पराए घर की होती हैं बेटे अपने होते हैं फिर मैंने बेटी को जन्म दिया तो मेरी सास ने उसे मुंह उठाकर तक नहीं देखा हमारे गांव में लड़कियों को कोई अहमियत नहीं दी जाती थी उनको घर से नहीं निकलने दिया जाता था और घर से निकलने वाली लड़कियां बिगड़ी हुई कहलाई जाती थी 

और अगर कोई लड़की घर से निकलती तो सिर्फ अपनी मां या पिता के साथ ही निकल सकती थी और ना ही बेटियों को बाहर के मर्दों के सामने आने दिया जाता था तो उनके लिए पढ़ाई लिखाई करना तो बहुत दूर की बात थी बेटे के बाद भगवान ने मुझे एक बेटी दी थी जब वह 9 साल की हुई तो मैंने अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ जाकर अपनी बेटी का एडमिशन सरकारी स्कूल में करवा दिया था 

हमारे गांव में सिर्फ एक ही सरकारी स्कूल था और उसमें भी पढ़ाई ज्यादा ठीक से नहीं होती थी मेरे लिए इतना ही बहुत था कि मेरी बेटी शिक्षा प्राप्त करें क्योंकि वह कहीं और किसी स्कूल में भी नहीं पढ़ सकती थी बड़ी मुश्किल से तो मैंने अपने गांव के सरकारी स्कूल में उसका एडमिशन कराया था अपने ससुराल वालों से लड़ झगड़ कर और फिर जब वह 12 साल की हुई और उसने एथ क्लास पास कर लिए थे तो मेरी सास ने इस बात पर हंगामा कर दिया कि अब वह काफी पढ़ चुकी है 

अब उसे स्कूल ना भेजा जाए मगर मेरी बेटी पढ़ाई में बहुत अच्छी थी मैं उसकी पढ़ाई को नहीं रोकना चाहती थी मेरी सास का कहना था कि अब इसे घर पर बिठाऊ और उे घर गिरस्ती सिखाओ अब तुम्हारी बेटी की शादी कर दी जाएगी मगर मैं इस बात के सख्त खिलाफ थी मैं अपनी बेटी का बाल विवाह नहीं करवाना चाहती थी अभी वह बच्ची थी भले से ही हमारे गांव का यह रिवाज था मगर मैं अपनी बेटी को यहां की रस्मो रिवाज में शामिल नहीं करना चाहती थी

 मैं चाहती थी कि मेरी बेटी कम से कम इंटर तो पास कर ही ले आजकल तीन या चार क्लासेस को क्या समझा जाता है मैंने अपने सारे घर वालों से अपनी बेटी को आगे पढ़ाने के लिए झगड़ा मोल ले लिया था और अभी तक हार नहीं मानी थी मेरी बेटी की पढ़ाई जारी थी कहने को तो मेरी बेटी सरकारी स्कूल में पढ़ रही थी लेकिन स्कूल के जो टीचर्स थे उन्होंने ₹2000000 की फीस रखी हुई थी 

हम गरीब लोगों के लिए तो ₹2000000 भी बहुत थे और उस स्कूल में सबसे ज्यादा लड़के पढ़ा करते थे लड़कियां तो लगभग 20 या 30 ही थी उसमें से आधी से ज्यादा तो पड़ोस के ही गांव की लड़कियां थी क्योंकि हमारे गांव के लोग अपनी बे बेटियों को ज्यादा नहीं पढ़ाते थे मेरी बेटी का एडमिशन भी बड़ी मुश्किल से हुआ था मैंने उन लोगों से कहा था कि मेरे पास फीस के पैसे नहीं है क्या आप लोग थोड़ी मेहरबानी नहीं कर सकते

 स्कूल की प्रिंसिपल एक औरत थी उन्होंने कहा कि मैं खुद बड़ी मजबूर हूं इस गांव में स्कूल खोलने का कोई फायदा नहीं है यहां पर ज्यादा बच्चे पढ़ने के लिए आते ही नहीं हैं हम लोगों को भी काफी कुछ करना होता है बच्चों की फैसिलिटी के लिए यहां पर काफी सारे इंतजाम हैं और किताबें भी मंगवाई गई हैं इस सब के लिए हमें फीस की जरूरत होती है मैंने उसकी मजबूरी को समझा और कहा कि ठीक है मैं कहीं से कुछ ना कुछ कर लूंगी और मैंने जैसे-तैसे अपनी बेटी का एडमिशन करवा दिया था

 शुरू शुरू में तो मैं अपनी बेटी की फीस दे दिया करती थी लेकिन अब जब से मेरी बेटी फोर्थ क्लास में आई थी उसकी फीस बढ़ गई थी उसकी फीस 00 हो गई थी अब मैं घर में काम करती और शाम के टाइम में मशीन लेकर बैठ जाया करती थी मैंने लोगों के कपड़े सिलना शुरू कर दिया था मुझसे बहुत अच्छी सिलाई आती थी लेकिन मुझे टाइम नहीं मिलता था इसलिए मैंने कभी इस काम को नहीं किया 

पर अब जब से मेरी बेटी की फीस महंगी हुई थी तो मुझे उसकी पढ़ाई बड़ी महंगी पड़ने लगी थी इसीलिए मैंने इस काम को करना शुरू कर दिया था क्योंकि उसकी फीस के लिए मेरा पति मुझे पैसे नहीं देता था मैं दो-तीन घंटे में काफी सारी सिलाई कर लिया करती थी जिससे मेरी बेटी की फीस के पैसे भी निकल आते थे और मैं उसकी जरूरतों को भी पूरी कर दिया करती थी उसकी हर चीज का खर्चा मुझे ही तो करना होता था

 क्योंकि मेरे पति को मेरी बेटी पसंद नहीं थी उसे तो सिर्फ अपना बेटा ही पसंद था इसलिए उन्होंने कभी उसकी जिम्मेदारी नहीं निभाई थी मेरे पति का कहना था कि अगर बेटी को पढ़ाना है और इसके शौक पूरे करने हैं तो मेरे पास इसके लिए पैसे नहीं है तुम इसके हर काम की जिम्मेदार खुद हो इसलिए इसकी सारी जिम्मेदारी तुमको ही उठानी है बेटियां बोझ होती हैं मैं तो चाहता हूं कि जल्द से जल्द इसकी शादी कर दूं लेकिन तुम मुझे इसकी शादी नहीं करने दे रही हो 

इसीलिए मैं इस पर एक रुप नहीं लगाऊंगा मेरी ससुराल में सभी को मेरी बेटी बहुत बुरी लगती थी क्योंकि मेरी दोनों जठा नियों के भी दो-दो बेटे थे मैं सबसे लड़ झगड़ करर यह काम कर रही थी कपड़े सीसी करर मेरे हाथ सूज जाते थे मैं बहुत तकलीफ में थी और फिर मैं बहुत कमजोर भी थी इसलिए ज्यादा काम करती तो बहुत थक जाती थी रात को मेरे शरीर में बहुत दर्द होता था जिसकी वजह से मुझे सारी रात नींद नहीं आती थी 

और मैं दर्द से तड़पती थी घर के काम के साथ-साथ मुझे अपनी ससुराल के भी सारे काम करने पड़ते थे मेरी सास मुझे इस बात की सजा दे रही थी कि मैंने बेटी पैदा की थी और मैं दहेज में कुछ नहीं लेकर आई थी इसलिए पूरे घर के काम मुझे ही करने पड़ते थे मेरी दोनों जेठा नियां तो आराम से रहती थी और मेरी सास भी मेरी सास की भी कोई बेटी नहीं थी इसलिए वह अपने आप को बहुत खुशकिस्मत समझती थी 

लेकिन दरअसल वह दुनिया की सबसे बदकिस्मत औरत थी मैं अपनी बेटी पाकर अपने आप को बहुत खुशनसीब समझती थी क्योंकि एक बेटी ही होती है है जो मां का सहारा बनती है मुझे अपनी बेटी के लिए भी सारे काम करने होते थे उसको सुबह जगाना उसके कपड़े धोना और उसके लिए नाश्ता बनाना उसके लिए लंच पैक करना और भी बहुत सारे काम अपनी ऐसी जिंदगी से मैं हार मान चुकी थी 

मगर अपनी बेटी के बारे में सोचकर मेरे अंदर एक उम्मीद जाग उठती थी और घर के सारे लोग कहते थे कि बेटी पैदा करने की यही सजा होती है अगर अपनी बेटी को काम सिखाओ गी तो तुम्हारी मदद होगी तुम तो उसे पढ़ने भेज रही हो तो यही सब कुछ होगा मुझे अपनी बेटी की फीस देनी थी मगर अभी पैसे पूरे नहीं हुए थे पहले से एक हफ्ता ऊपर आ चुका था मैं बहुत परेशान थी

 टीचर बार-बार मेरी बेटी से फीस के लिए कह रही थी अगला महीना भी शुरू हो गया था और इस तरह से मेरी बेटी के 2 महीने की फीस चढ़ गई थी और उसके एग्जाम्स करीब आ रहे थे टीचर ने कहा था कि अगर एग्जाम से पहले-पहले फीस क्लियर नहीं की तो तुम्हें स्कूल से निकाल दिया जाएगा मेरे पास पैसे नहीं थे मेरी बेटी की फीस काफी हो गई थी ऊपर से और भी खर्चे होते थे

 मुझे अब बहुत सारे पैसों की जरूरत थी इतने सारे पैसे कहां से आते मैंने अपने पति से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा मैंने तो तुम्हें पहले ही कहा हुआ है तुम्हारी बेटी के लिए मैं एक रुपया भी नहीं दूंगा तुम कहो तो मैं अभी उसकी शादी कर देता हूं वह अपनी ससुराल में रहेगी तो उसके सारे खर्चे उसका पति करेगा मैंने कहा उसके लिए नहीं मेरे खर्चे के लिए तो पैसे दे दो उसने कहा मेरे पास अभी पैसे नहीं हैं

 मैंने सोचा था कि अगर थोड़े बहुत पैसे मेरा पति दे देगा तो मैं अपनी बेटी की फीस दे दूंगी मगर मैं बहुत परेशान थी मेरी बेटी की गांव में ही एक सहेली थी वो मेरी सास की दूर की रिश्तेदार थी इसीलिए वह हमारे घर काफी आती जाती थी उसका नाम रश्म था जब से रश्मी का भाई शहर से पढ़ाई करके आया था गांव में उसके भाई का नाम हो गया था रश्म मेरी बेटी की बचपन की सहेली थी 

और वोह दोनों एक साथ स्कूल में जाती थी रश्म की मां को अपनी बेटी को को स्कूल भेजने से कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि उसके ससुराल में कोई उसे रोक टोक करने वाला नहीं था और ना ही उसका पति था उसका बेटा शहर से पढ़कर आया था और अच्छी नौकरी पर लग गया था वह हर रोज शहर जाता था और शाम के समय वापस आ जाया करता था

 रश्मे की सहेली ने उसे बताया था कि उसका भाई बहुत अच्छी इंग्लिश बोलता है उसने मेरी बेटी से कहा कि मेरे भैया मुझे भी इंग्लिश सिखा रहे हैं मैं उनसे रोज ट्यूशन लेती हूं मेरी बेटी उसकी बात सुनकर बहुत ब्रेस हुई थी और वह चाहती थी कि वह भी उसके भाई से ट्यूशन ले और इंग्लिश में माहिर हो जाए मगर मैं अपनी बेटी को पढ़ा रही थी यही मेरे लिए बहुत था मैं भी चाहती थी कि मेरी बेटी भी इंग्लिश पढ़े

 लेकिन अगर मेरी ससुराल में यह बात पता चल जाती कि मेरी बेटी रश्मी के भाई से ट्यूशन पढ़ने जा रही है तो मेरे घर वालों को और ज्यादा गुस्सा आ जाना था मेरी बेटी मुझे बार-बार जिद करती कि मां मैं रश्मी के भैया से इंग्लिश सीखना चाहती हूं प्लीज आप मुझे वहां इंग्लिश सीखने के लिए भेज दो दो रश्म ने कहा है कि उसका भाई जैसे रश्मी को इंग्लिश सिखा रहा है ऐसे ही मुझे भी सिखा देगा 

अपनी बेटी के ज्यादा जिद्द करने पर मैंने इस बारे में सोचा था और मेरी बेटी की सहेली भी उसे बार-बार फोर्स कर रही थी मैंने अपनी बेटी को अपनी जिम्मेदारी पर उसके दोस्त के घर इंग्लिश सीखने के लिए भेज दिया था और घर पर यह झूठ बोल दिया था कि मेरी बेटी के स्कूल की टाइमिंग बढ़ गई है इधर अभी तक मेरे पास उसकी फीस के लिए पैसे नहीं थे मैं बहुत ज्यादा परेशान थी

 मैंने अपने से दोबारा पैसे मांगने की कोशिश की तो उन्होंने मुझसे झगड़ना शुरू कर दिया क्योंकि वह इससे पहले भी मुझे पैसे देने से मना कर चुके थे इस बात पर हम दोनों के बीच इतना झगड़ा हुआ कि मेरे पति ने मुझे मारना पीटना शुरू कर दिया था अचानक इस मौके पर मेरी बेटी घर आ गई जब मुझे मेरा पति पीटता था तो घर में कोई भी नहीं बचाता था मेरी बेटी आगे 

आई और उसने मुझे अपने पिता से बचा लिया और फिर वह खामोशी से अपने कमरे में जाकर बंद हो गई थी क्योंकि वह भी परेशान थी थोड़ी देर के बाद जब उसने कमरे का दरवाजा खोल दिया तो मैं कमरे में चली गई थी क्योंकि हम दोनों मां बेटी का एक ही कमरा था मेरे पति और मेरा बेटा एक साथ दूसरे कमरे में सोया करते थे आज मेरी बेटी अपने दोस्त के यहां अंग्रेजी सीखने के लिए गई थी

 इसलिए उसे घर आने में देर हो गई थी जबकि मैं घर पर झूठ बोल चुकी थी कि मेरी बेटी के स्कूल की टाइमिंग बढ़ गई है अब उसकी छुट्टी देर से हुआ करेगी इसलिए घर के किसी भी मेंबर का ध्यान मेरी बेटी पर नहीं गया था सबको य ही पता था कि वह अब देर से घर आया करेगी मेरे पति ने मुझे इतना मारा था कि मेरे पूरे शरीर में दर्द हो रहा था और मेरे कपड़े भी एक दो जगह से फट गए थे मैंने सोचा नहाकर कपड़े चेंज कर लेती हूं 

मैं जैसे ही अलमारी में अपने कपड़े निकालने के लिए गई तो यह देखकर हैरान रह गई कि अलमारी में पैसे रखे हुए थे यह काफी सारे पैसे थे मैंने सोचा यह पैसे कहां से आए क्या मेरे पति ने रख दिए हैं मगर आज ही तो उसने मुझे इतनी बुरी तरह से मारा था अगर उसे पैसे देने होते तो वह मुझे इस तरह से मारता नहीं और पैसे मेरे हाथ में दे देता और घर में भी कोई ऐसा नहीं था जो मुझे पैसे दे देता मेरी जेठानी का बड़ा बेटा था

 जो मुझसे काफी अच्छे तरीके से बात करता था कहीं उसने तो यह पैसे नहीं रख दिए लेकिन वह तो सुबह को घर से निकलता था तो रात को ही घर में घुसता था जबकि सुबह ही तो मैंने अपनी बेटी के कपड़े अलमारी में रखे थे तब तो मुझे यह पैसे नजर नहीं आए थे फिर यह पैसे किसने रखे थे अगले दिन फिर से ऐसा ही हुआ अलमारी में फिर से थोड़े से पैसे रखे हुए थे मैंने तो अभी कल वाले पैसे भी इस्तेमाल नहीं किए थे मैं हैरान थी मगर मुझे पैसों की सख्त जरूरत थी काफी टाइम से मैंने अपनी बेटी के कपड़े नहीं बनाए थे 

और उसके स्कूल की फीस भी मुझे जमा करनी थी मैंने वह पैसे अपनी बेटी को दे दिए और कहा कि इसमें से अपनी फीस जमा कर लो और किताबें भी खरीद लेना कुछ ऐसी किताबें थी जो मेरी बेटी को दुकान से खरीदनी थी पैसों की कमी की वजह से उसने अभी तक बुक्स नहीं खरीद दी थी और फिर कहा था कि अच्छा खा भी लेना मेरी बेटी पैसों को देखकर बहुत खुश थी और सबसे ज्यादा खुशी उसी इस बात की थी कि मैंने उसकी जिद को भी पूरा कर दिया था कि वह अपनी दोस्त के घर जाकर इंग्लिश सीख रही थी

 मेरी बेटी पैसे लेकर जाने लगी तभी अचानक से वापस पलट आई और मेरे गले लगकर कहने लगी मां मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं मैंने कहा मेरी प्यारी बेटी मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं तुम मेरे लिए सब कुछ हो मेरा एक बेटा भी है लेकिन मैं तुमसे ज्यादा प्यार करती हूं जानती हो क्यों क्योंकि तुम में मुझे अपना आप नजर आता है मेरे माता-पिता गरीब थे इसलिए मुझे पढ़ा लिखा नहीं सके मुझे भी पढ़ने का बहुत शौक था

 मगर मैं कभी भी तुम्हारे शौक को अधूरा नहीं रहने दूंगी मुझसे जितना हो पाएगा मैं तुम्हारे लिए करूंगी जो कुछ मुझे नहीं मिला मैं तुम्हें जरूर लेकर दूंगी और तो और तुम्हारे हर सपने को पूरा करूंगी मेरी बेटी कहने लगी मां मैं भी आपकी मदद करूंगी बस बहुत देख लिया आपको मेहनत करते हुए मैं चाहती हूं कि मैं आपकी सारी परेशानियों को दूर कर दूं मैं आपकी मदद कर सकती हूं 

अपनी बेटी की बात सुनकर मैं हैरान हुई कि वह ऐसा क्यों कह रही है भला वह मेरी मदद कैसे कर सकती थी फिलहाल मुझे ऐसा लगा कि शायद वह इमोशंस में बहकर ऐसी बातें कर रही है क्योंकि मेरी बेटी जानती थी कि मैंने उसके लिए कितने सैक्रिफाइस किए हैं और उसकी खुशी की खातिर मैंने सब कुछ किया है उसके पिता से मारत खाई है और उसके घर वालों से वह हर बुरी बात सुनी है

 और बर्दा दश की है जो शायद कोई नहीं कर सकता फिर वह अपनी पढ़ाई करने के लिए बैठ गई थी मैंने सुकून की सांस ली थी कि चलो जो जरूरत थी वह तो पूरी हो गई पर यह पैसे कहां से आ रहे थे इस घर में ऐसा कोई भी नहीं था जो मेरी मदद कर सकता और ज्यादा हैरानी मुझे तब हुई थी जब तीसरे दिन भी मेरी अलमारी में पैसे रखे हुए थे 

अब मैंने कमरे में नजर रखना शुरू कर दी कि आखिर मेरे कमरे में कौन जाता है जो पैसे रखता है मैंने सारे काम अपने कमरे के पास बैठकर ही किए बर्तन भी बाहर बैठकर धोए और कपड़े भी मेरे कमरे में सिर्फ मेरी बेटी ही जाया करती थी क्योंकि यह हम दोनों का ही कमरा था और कमरे के अंदर सिर्फ वही जाती थी स्कूल से आने के बाद पूरा दिन कमरा खाली पड़ा रहा और वहां कोई नहीं गया

 जब मेरी बेटी स्कूल से आई और पढ़ाई करने में बिजी हो गई तो मैंने जैसे ही अलमारी खोलकर देखा तो मैं हैरान रह गई थी आज भी पैसे रखे हुए थे इसका मतलब यह था कि पैसे मेरी बेटी ही रख रही थी पर मेरी बेटी इतने सारे पैसे कहां से लेकर आ रही थी मेरे दिमाग में आया कि कहीं मेरी बेटी चोरी तो नहीं कर रही थी क्योंकि इतने ज्यादा पैसे तो वह चोरी करके ही कमा सकती थी मैं बहुत परेशान हो गई

 मैंने उसकी इतनी अच्छी परवरिश करने की कोशिश की थी कहीं वह किसी गलत रास्ते पर तो नहीं निकल गई थी मैंने एक दिन प्यार से उसे अपने पास बुलाया और पूछा बेटी क्या तुमने अलमारी के अंदर पैसे रखे थे तो उसकी शक्ल पर ही लिखा था कि जैसे यह सब कुछ उसने ही किया है उसने कहा जी मां मैंने ही रखे थे मैंने कहा बेटा तुमने क्यों रखे थे और तुम्हारे पास कहां से आए तो वह कहने लगी

 मां मैंने ये पैसे आपके लिए ही रखे थे आपकी मदद करने के लिए मैंने कहा तुम ये पैसे कहां से लेकर आई हो उसने कहा कि मैंने ये पैसे खुद कमाए हैं मैंने अपनी बेटी से कहा लेकिन तुम क्या करती हो तो वह कहने लगी यह तो मैं आपको नहीं बता सकती मगर यह पैसे मैंने कमाए हैं यह मेरे कमाए हुए पैसे हैं मेरी बेटी अब जवान हो रही थी और वह मेरी ही तरह बहुत खूबसूरत थी कमसिन थी लेकिन बेवकूफ नहीं थी

 वह अपनी उम्र से ज्यादा समझदार थी क्योंकि इस घर में उसने अपनी मां को घर के लोगों का अत्याचार सहते हुए भी देखा था इसलिए उसके अंदर कोई इतना बचपन नहीं था वह इतनी मासूम नहीं थी और यह भी जानती थी कि आज के जमाने में पैसे कमाना कोई आसान बात नहीं है मैंने कहा सुनो प्रतीक्षा मेरी बात गौर से सुनो बेटी यह जो तुम रोज इतने सारे पैसे अभी हम दोनों इस बारे में बात कर ही रहे थे कि अचानक मेरा पति कमरे में आ गया

 उसने हम दोनों को इस तरह से बैठे हुए देखकर कहा कि पैसों के बारे में मां बेटी क्या बातें कर रही हो मैंने कहा कि मुझे कुछ पैसों की जरूरत है कि आप मुझे दे सकते हो मेरे पति ने मुझसे कहा कि मैं तुम्हें पैसे तो नहीं दे सकता मगर जिसके लिए तुम पैसे मांग रही हो उसकी शादी जरूर करवा सकता हूं अपने पति के मुंह से मैं यह बात कई बार सुन चुकी थी मैं अपनी बेटी को इतनी कम उम्र में शादी नहीं करवाना चाहती थी

 मुझे गुस्सा आ गया और मैंने अपने पति से कह दिया कि जैसा सा आप सोच रहे हो ऐसा नहीं हो सकता मुझसे अपनी बेटी के लिए जितना बन सकेगा मैं करूंगी लेकिन कम उम्र में कभी भी उसकी शादी नहीं करूंगी मेरे पति ने कहा तो फिर ठीक है मेरे पास एक भी रुपया नहीं है तुम लोगों के लिए यह कहकर मेरा पति कमरे से बाहर निकल गया था मेरा पति अभी दरवाजे के बाहर ही खड़ा हुआ कुछ कर रहा था 

मेरी बेटी कुछ बोलने लगी मैंने उसे इशारा करते हुए खामोश कर दिया था मैं नहीं चाहती थी कि यह बात मेरे पति को पता चले क्योंकि यह बात अगर मेरे पति को पता चल जाती तो बहुत बड़ा तूफान आ जाना था और वह सीधा जाकर यह बात मेरी सास को बताता और मेरे लिए एक और नई मुसीबत आ जाती पहले मैं खुद पता करना चाहती थी कि आखिर बात क्या है वैसे यह बात बहुत अजीब थी कि मेरी बेटी स्कूल जाती है

 और ट्यूशन जाती है इसके अलावा तो वह कभी घर से बाहर निकलती ही नहीं तो फिर वह पैसे कहां से ला रही थी इस बात का जवाब तो वही दे सकती थी मगर उसने तो जवाब देने से इंकार कर दिया था एक दिन मैं उसके स्कूल चली गई मैंने वहां जाकर देखा तो मेरी बेटी पढ़ाई कर रही थी मैंने उसके टीचर से भी उसके बारे में पूछा था कि वह छुट्टी तो नहीं करती सही से पढ़ रही है ना और पढ़ाई में कैसी है कोई गलती तो नहीं करती उसकी टीचर्स ने कहा कि आपकी बेटी पढ़ाई में बहुत अच्छी है

 और कोई छुट्टी भी नहीं करती कोई पीरियड भी मिस नहीं करती आपकी बेटी बहुत इंटेलिजेंट है एक दिन आपका नाम रोशन करेगी स्कूल में तो सब कुछ ठीक था मुझे यकीन था कि अगर कोई गड़बड़ वाली बात होती तो उसकी टीचर मुझे जरूर बताती पर टीचर ने तो मेरी बेटी की तारीफ ही की थी इसका मतलब कि टीचर को भी कुछ नहीं पता था 

मेरी बेटी के लाए हुए पैसे मेरे लिए एक मुसीबत बन गए जब वह पैसे मेरे पति ने अलमारी में रखे हुए देख लिए तब मेरे पति ने कहा कि तुम्हारे पास तो पहले से ही इतने सारे पैसे हैं तो फिर तुम मुझसे पैसे क्यों मांगती हो अपने पति को तो मैंने बहाना दे दिया था कि यह मेरी सिलाई के पैसे हैं कल ही मुझे एक औरत देकर गई है मैं हैरान थी कि सच में मेरी बेटी के हुए पैसे मेरे लिए बहुत बड़ी परेशानी बन गए थे 

अब मुझे झूठ पर झूठ बोलना पड़ रहा था मेरे पति ने वह पैसे अपने पास रख लिए थे और कहा कि और सिलाई कर लेना और थोड़े पैसे मुझे भी दे देना मैंने अपने पति से कहा कि यह पैसे मेरी बेटी की स्कूल की फीस के लिए हैं मेरे पति ने कहा कि उसके स्कूल की फीस देने की कोई जरूरत नहीं है मैं तुमसे कई बार कह चुका हूं कि इसकी शादी कर दो और इस पर पैसा बर्बाद करना बंद करो 

मैंने अपने पति से पैसे लेने की बहुत कोशिश की मगर उस ने मुझे पैसे नहीं दिए उसने कहा कि मुझे भी अभी पैसों की जरूरत है मेरा पति बहुत बुरा इंसान था उसने मुझे पसंद किया था तब जाकर शादी की थी लेकिन जिस दिन से मेरी शादी उससे हुई थी वह हमेशा अपनी मां के कहने में रहता था और मेरी सास ना जाने मेरे पति को क्या-क्या बताती थी तभी से ही मेरा पति पूरी तरह से बदलकर रह गया था

 जितना वह मुझे शादी से पहले पसंद करता था शादी के बाद उतनी ही मुझसे नफरत करने लगा था मेरा पति मेरे बेटे का हर खर्चा उठाता था था मेरी सास ने मेरे बेटे को मुझसे दूर कर दिया था उनका कहना था कि तू अपनी बेटी की ही परवरिश कर ले यह हमारे घर का चिराग है हम इसकी देखभाल करेंगे मेरा बेटा मुझसे ज्यादा अपनी दादी को मां समझता था और मेरा पति भी मेरे बेटे की हर ख्वाहिश को पूरी किया करता था

 उन्होंने बेटा और बेटी में काफी फर्क किया हुआ था अब मेरे लिए इस दुनिया में अगर कोई मेरा अपना था तो वह सिर्फ मेरी बेटी थी क्योंकि मेरे माता-पिता भी इस दुनिया से जा चुके थे और मेरी बहनें थी वह सब अपनी अपनी जिंदगी में इतनी बिजी थी कि उन्होंने कभी मेरी खबर लेने की कोशिश ही नहीं की थी मुझे बड़ी टेंशन हो रही थी क्योंकि यह गांव था और यहां पर छोटी-छोटी बातें बड़ी आसानी से फैल जाती थी

 इसलिए मुझे बड़ी सोच समझकर कदम बढ़ाना था स्कूल में तो मुझे कुछ नहीं मिला था फिर मुझे अपनी बेटी के दोस्त पर शक होने लगा क्योंकि जब से मेरी बेटी ने उसके घर ट्यूशन जाना शुरू किया था वह हमारे घर बिल्कुल नहीं आती थी और ना ही उसकी मां आ रही थी मेरी बेटी भी रोज उसके घर ट पढ़ने जा रही थी मैंने सोचा कि एक बार मैं भी वहां पर जाकर देखती हूं क्योंकि वह घर से स्कूल या फिर अपने दोस्त के घर जाने के लिए ही निकलती थी 

उसके अलावा तो वह सारा दिन मेरे साथ ही रहती थी पर जब मैं अपनी बेटी के दोस्त के घर उसके ट्यूशन के टाइम पर गई तो यह देखकर हैरान रह गई कि मेरी बेटी और उसके दोस्त वहां पर थी ही नहीं मेरी बेटी की जो दोस्त थी उसके घर का दरवाजा खुला हुआ था उसका घर ज्यादा बड़ा नहीं था सिर्फ एक छोटा सा कमरा और छोटा सा ही आगन था उसके घर का दरवाज दरवाजा खुला हुआ था

 मैंने झांक कर देखा तो पूरे घर में उसकी मां के अलावा मुझे कोई नजर नहीं आ रहा था मैं घर के अंदर तो नहीं गई मगर बाहर से ही देखकर समझ गई थी कि मेरी बेटी यहां पर नहीं है मुझे कुछ गड़बड़ का एहसास हो रहा था क्योंकि वह लड़का जो मेरी बेटी को ट्यूशन पढ़ाता था वह भी यहां पर मौजूद नहीं था अब मुझे उस लड़के पर शक हो रहा था कि कहीं उसने मेरी बेटी के साथ तो कुछ नहीं कर दिया 

मैं बड़ी परेशान थी और सोच रही थी कि किस तरह से स चाई का पता लगा सकूं मैं खामोशी से अपने घर आ गई थी मैंने अपनी बेटी को भी शक होने नहीं दिया था कि मैं उसके बारे में जानने के लिए स्कूल और उसके दोस्त के घर भी जा चुकी हूं अगले दिन मैं अपनी बहन के घर का कहकर अपनी ससुराल से सुबह के समय ही निकल चुकी थी क्योंकि आज मुझे आधा दिन लग सकता था मेरी बेटी 5 घंटे तो स्कूल में ही रहती थी 

और उसके बाद दो घंटे के लिए वह अपने दोस्त के घर जाने लगी थी जब मेरी बेटी स्कूल चली गई तो मैं भी उसके पीछे-पीछे उसके स्कूल गई मैंने देखा कि मेरी बेटी स्कूल के अंदर चली गई है और अपनी क्लास में बैठकर पढ़ाई कर रही है मैं आज भी उसके टीचर से थोड़ी बहुत बातचीत करके स्कूल के बाहर आकर खड़ी हो गई थी और उसकी छुट्टी पर बाहर निकलने का इंतजार करने लगी थी

 कड़ी धूप में खड़े-खड़े मुझे 5 घंटे हो चुके थे जब स्कूल की छुट्टी हुई तो मेरी बेटी अपनी दोस्त के साथ बाहर निकली थी मैंने जल्दी से अपना चेहरा छुपा लिया ताकि मेरी बेटी मुझे ना पहचान ले मेरी बेटी और उसके दोस्त सब मिलकर घर जा रही थी मैं अभी भी उन दोनों का पीछा कर रही थी वह दोनों घर के अंदर चली गई मैं रश्मी के घर के बाहर ही खड़ी हो गई थी लेकिन यह देखकर हैरान रह गई कि 5 मिनट के बाद मेरी बेटी और रश्मी ने कपड़े बदल लिए थे

 और वो दोनों अपने चेहरे को ढककर उस लड़की के साथ घर से बाहर निकल रही थी मैं चौकन्ना हो गई थी कि आखिर ये तीनों कहां जा रहे हैं मैं उनका पीछा करने लगी वो तीनों पैदल चलते-चलते काफी दूर तक आ गए थे वो तीनों तो आपस में बातें कर रहे थे इसलिए उन्हें रास्ते का पता ही नहीं चल रहा था मैं अकेली थी इसलिए इतनी दूर तक चलते-चलते बहुत थक गई थी हमारा गांव अब काफी दूर रह गया था

 और वह अब दूसरे गांव में आ गए थे यह हमारे गांव के पास वाला ही गांव लगता था इस गांव में आने के बाद यह तीनों एक बड़े से घर के आगे रुक गए थे और उसके बाद उस लड़के ने उन दोनों को घर के अंदर जाने का इशारा किया और खुद बाहर ही खड़ा हो गया था रश्मी और मेरी बेटी घर के अंदर चली गई थी यह देखकर तो मैं परेशान हो गई कि व लड़का अपनी बहन और मेरी बेटी को कहां पर लेकर आया है 

और उसने उन दोनों को अकेले घर के अंदर कैसे जाने दिया आखिर वह दोनों अंदर क्या करने वाली थी मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था मैंने फौरन जाकर उस लड़के का गिरेबान पकड़ लिया और कहा कि यह दोनों अंदर क्यों गई हैं तू मेरी बेटी के साथ क्या करना चाहता है और यहां पर क्यों लेकर आया है वह लड़का घबरा गया था और पहचान गया था कि मैं कौन हूं उसने मुझसे कहा तसल्ली रखो आंटी प्लीज मुझे छोड़ दो आप 

आप प्रतीक्षा की मम्मी हो मैं आपको अच्छी तरह से जानता हूं लेकिन एक बार मेरी बात तो सुन लो उसने मेरे आगे हाथ जोड़ दिया और कहने लगा आंटी आप यह भी तो देखो कि प्रतीक्षा के साथ-साथ मेरी बहन भी है उसके जुड़े हुए हाथ देखकर मैंने उसका गिरेबान छोड़ दिया था और उसकी बात सुनने लगी थी उसने कहा कि आपको जानना है कि ये दोनों क्या कर रही हैं 

तो आप मेरे साथ अंदर चलो वो मुझे लेकर घर के अंदर चला गया था यह घर काफी बड़ा था पर जैसे ही मेरी नजर सामने की तरफ गई तो यह देखकर मैं हैरान रह गई थी कि मेरी बेटी और उसकी दोस्त के हाथ में झाड़ू थी और वह दोनों वहां का काम कर रही थी अपनी बेटी को इस हालत में देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए थे हम दोनों को इस तरह से देखकर वहां की मालकिन भी आ गई जो कि बहुत खूबसूरत थी

 उसने कहा आलोक की औरत कौन है मेरी बेटी और रश्मी भी देख चुकी थी कि मैं उनका पीछा करते हुए यहां तक पहुंच गई हूं वो दोनों भी शॉक खड़ी हुई थी मैं फौरन ही अपनी बेटी के पास गई और उसके हाथ से झाड़ू छीनकर कहने लगी क्या कर रही हो तुम यहां पर मैं अपनी बेटी के थप्पड़ मारने जा रही थी तभी मेरा हाथ उस मालकिन ने रोक लिया मैंने अपना हाथ झटक करर वापस छुड़वा लिया

 मैंने कहा आखिर यहां पर क्या हो रहा है तब उस औरत ने मुझे एक ऐसी बात बताई मेरी आंखों में आंसू आ गए और मैं जमीन पर ऐसे गिर गई जैसे मेरे शरीर से जान निकल गई हो मैंने अपनी बेटी की तरफ देखा वह भी रो रही थी मुझे उस औरत ने अपने बारे में बताया कि मैं अभी दो महीने पहले ही शहर से इस गांव में शिफ्ट हुई हूं हूं मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है मैं बिल्कुल अकेली हूं और मैं शहर के स्कूल की एक इंग्लिश टीचर हूं

 दरअसल मैं जब से यहां पर शिफ्ट हुई हूं मुझे काम की बहुत परेशानी हो रही थी क्योंकि मैं एक पढ़ी लिखी लड़की हूं और मैं घर के काम बिल्कुल भी नहीं जानती आपकी बेटी मेरे घर में काम करती है आपकी बेटी ने कहा था कि वह मेरे घर की साफ सफाई कर दिया करेगी बहुत प्यारी बेटी है आपकी और बहुत समझदार भी है आपकी बेटी कोई गलत काम नहीं कर रही है यह दूसरी लड़की रश्मी जो आलोक की बहन है

 यह मेरे पास इंग्लिश सीखने के लिए आती थी जब से आपकी बेटी मेरे घर में काम करने आने लगी है तब से ही आपकी बेटी की मदद करने लगी है और इसके हिस्से के जो पैसे हैं यह भी वह अपने दोस्त को दे देती है रश्म भी एक बहुत अच्छी लड़की है मैंने रश्मी की तरफ देखा तो उसने अपनी आंखें झुका ली थी रश्मी चाहती तो सिर्फ अपनी दोस्त को ही यहां पर काम करने दे सकती थी मगर उसने उसकी मदद की मैंने आपकी बेटी से पूछा था कि तुम यह काम क्यों करती हो क्या 

तुम्हारा इस दुनिया में कोई नहीं है जो तुम यह काम करने पर मजबूर हो गई हो अभी तुम्हारी उम्र भी कम है तुम पढ़ाई करो मगर आपकी बेटी ने मुझे कुछ ऐसा बताया जिसे सुनकर मेरा दिल बहुत दुखा था उसने मुझे आपकी पूरी कहानी बता दी थी आपकी बेटी ने मुझे बताया था कि मेरी मां मेरे लिए बहुत मेहनत करती है परेशान रहती है और थक जाती है और रात को जब सो जाती है तो मेरी मां को बहुत दर्द होता है 

और वह दर्द की वजह से सो नहीं पाती उनके पूरे शरीर में हड्डियों में दर्द रहता है लेकिन अगले दिन वह फिर से खड़ी हो जाती हैं इसलिए मैं उनके लिए कुछ करना चाहती हूं उन्होंने मेरी पढ़ाई के लिए बहुत कुछ किया है मैं सारी जिंदगी उनकी एहसानमंद रहूंगी मेरा यह घर बहुत बड़ा है और मैं यहां अकेली रहती हूं इसलिए मुझे काम करने की बहुत परेशानी हो रही थी मुझे वैसे भी एक नौकरानी की जरूरत थी

 जब मैंने इस बारे में रश्मी को बताया कि मुझे नौकरानी की जरूरत है तो उसने मुझे आपकी बेटी के बारे में बताया था आपकी बेटी यहां पर दो घंटे निकालकर मेरे पास आती है और इसने आपसे झूठ कहा है कि आलोक इसे ट्यूशन पढ़ाता है जबकि मैं इन दोनों को ट्यूशन पढ़ाती हूं एक घंटा यह दोनों पढ़ाई करती हैं और एक घंटे में मिलकर यह दोनों घर को पूरी तरह से साफ कर देती हैं मैं उनकी मेहनत के पैसे इनको रोज दे दिया करती हूं 

और ट्यूशन भी फ्री में पढ़ाती हूं क्योंकि मुझे ये दोनों ही बच्चियां बहुत पसंद है मैंने अपनी बेटी को देखा तो मैं हैरान रह गई जो घर में रहकर सिर्फ पढ़ाई करती रहती है अपनी मां को यह तसल्ली दिलाना चाहती है कि वह अपनी मां के पैसों को खराब नहीं कर रही इधर आकर वह घर के सारे काम करती है और अपनी मां की भी मदद कर रही है आज मुझे अपनी बेटी पर बहुत गर्व महसूस हुआ था 

और साथ ही साथ मुझे उसके दोस्त पर भी बहुत प्यार आया था जो अपनी दोस्त की इतनी मदद कर रही थी आलोक रश्मी का भाई था आलोक ने बताया कि आंटी आपकी बेटी मेरी बहन की तरह है मैं इन दोनों को साथ लेकर आता हूं इनकी पूरी जिम्मेदारी निभाता हूं कि कहीं रास्ते में इनको कोई परेशानी ना हो जाए और यहां से साथ ही लेकर जा जाता हूं यही वजह है कि ये दोनों अपना चेहरा छुपाकर घर से निकलती हैं

 ताकि इनको कोई पहचान ना सके मैंने आलोक के सर पर हाथ रखा और इन तीनों बच्चों को गले से लगा लिया मेरी बेटी तो बहुत रो रही थी मेरी मासूम सी बेटी आज उसने मेरा दिल जीत लिया था मालकिन मुझसे कहने लगी आपकी बेटी बहुत अच्छी है अपनी बेटी पर कभी हाथ मत उठाना आज के जमाने में ऐसे बच्चे कहीं नहीं मिलते आपने अपनी बेटी की बहुत अच्छी परवरिश की है मैंने अपनी बेटी को चुप कराया

 और कहा कि बस अब मत रोना तुमने कुछ गलत नहीं किया तुमने तो अपनी मां का एहसास किया है उसका एहसास किया है जिसका एहसास इस दुनिया में कभी किसी ने नहीं किया मैंने मालकिन से कहा कि मैं बड़ी मुश्किल से अपनी बेटी को पढ़ाई करने के लिए घर से निकालती हूं मेरे ससुराल वालों को इसका पढ़ना लिखना बिल्कुल पसंद नहीं है अगर यह बात किसी को पता चल गई तो क्या होगा

 मालकिन ने कहा कि आप टेंशन मत लो जब तक आपकी बेटी का इंटर्न नहीं हो जाता तब तक इसे इस तरह से मेरे पास भेजती रहो उसके बाद में इस को एक अच्छी नौकरी लगवा दूंगी फिर आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी जैसा चल रहा है वैसा चलने दो मैं इस बात पर एग्री हो गई थी और अपनी बेटी को लेकर घर वापस आ गई थी मैंने आलोक और रश्म का भी शुक्रिया अदा किया था

 इस तरह से यह बात काफी समय तक छुपी रही कि मेरी बेटी दूसरे गांव में घर का काम कर रही है मेरी बेटी इन्हीं पैसों से अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी और फिर जब कुछ साल गुजर गए और मेरी बेटी का इंटर कंप्लीट हो गया तो मेरी बेटी ने वह काम छोड़ दिया था मालकिन ने उसे भी अपनी बेटी बना लिया था और उसकी अच्छी जगह नौकरी दिलवा दी थी मेरे ससुराल में तो सारे लोग मेरे और मेरी बेटी के शुरू से ही खिलाफ थे

 मैं अपनी बेटी की नौकरी लगते ही उसके साथ शहर आ गई थी और अब हम दोनों मां-बेटी किराए के मकान में शहर में ही रह रहे हैं मेरी बेटी मेरा पूरा खर्चा उठाती है घर छोड़ने पर मेरे पति ने मुझे डाइवोर्स दे दी थी क्योंकि वह इंसान कभी मेरा था ही नहीं अब मैं अपनी बेटी के साथ बड़े चैन और सुकून की जिंदगी गुजार रही हूं मैंने अपनी बेटी को पढ़ाया लिखाया आज मेरी बेटी मेरा नाम रोशन कर रही है 

कहने को तो मेरे पास बेटा भी था मगर उसने कभी मेरा साथ नहीं दिया मेरी बेटी बेटों वाला ही काम करके मेरा साथ दे रही थी इसलिए कभी भी बेटा और बेटी में फर्क ना करें मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि भगवान हर किसी को ऐसी बेटी दे जैसी मेरी है जो अपने माता-पिता का एहसास करे और हमेशा उनकी खुशी को ही अपना कर्तव्य समझे दोस्तों उम्मीद करती हूं आपको हमारी कहानी पसंद आई होगी| 

 

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