माफ़ी | Inspirational Stories In Hindi | Emotional And Sad Hindi Story | Moral Story In Hindi

Inspirational Stories In Hindi : मेरा नाम रूपा है मैं 18 साल की थी जब एक दिन में कंपनी के बाहर खड़ी थी मेरी हालत इतनी खराब थी कि मेरे पैरों में चप्पल टूटी हुई थी जो कपड़े मैंने पहन रखे थे वह फटे हुए थे मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे मैं लगातार भगवान से यही प्रार्थना किए जा रही थी कि आज मेरी साहब जी से बात हो जाए और वह मेरी परेशानी का हल कर दे वह मुझे इसका कंपनी में नौकरी पर रख ले 

काफी देर से मैं साहब का इंतजार कर रही थी और फिर ने मुझे वहां से भगाने की बहुत कोशिश की वह मुझसे कह रहा था कि तुम यहां से चली जाओ तुम शायद यहां पर साहब से भीख मांगने के लिए खड़ी हो मगर तुम नहीं जानती कि साहब को इस बात पर बहुत गुस्सा आता है वह मांगने वालों को ऑफिस के सामने खड़े नहीं होने देते मगर मैं उनकी बातों को नजर अंदाज करते हुए वहीं पर खड़ी रही मुझे इस बात पर विश्वास था कि साहब जी वहां पर आएंगे 

तो जब मैं उनसे मदद की अपील करूंगी तो वह कभी भी मुझे धुत करेंगे नहीं तभी वहां पर एक बड़ी सी गाड़ी आकर रुकी और मुझसे पहले ही वहां पहुंचकर गाड़ी का दरवाजा खोलने लगा और मुझे गुस्से से कहने लगा कि यहां से निकलो वरना साहब को गुस्सा आ जाएगा मगर मैं उसे नजर अंदाज करते हुए साहब से कहने लगी कि मैं बहुत गरीब हूं मुझे पैसों के लिए काम की सख्त जरूर जरूरत है 

आप मुझे अपनी कंपनी में काम पर रख ले आप जैसा मुझे कहेंगे मैं वैसा करूंगी साहब ने मुझे गौर से सिर से लेकर पैर तक देखा उनके देखने का अंदाज ऐसा था कि मैं पूरी तरह से कांप रही थी मगर फिर मेरी हैरत की इंतिहा नहीं रही जब वह मुझसे कहने लगे कि तुम्हारी पढ़ाई कितनी है जब मैंने उन्हें बताया कि मैं 12वीं फेल हूं तो यह सुनकर वह खामोश हो गए फिर कहने लगे कि ठीक है

 मैं इसके बाव जूद भी तुम्हें यहां पर नौकरी पर रख रहा हूं और तुम्हें काम भी सिखाया जाएगा मगर मेरी एक शर्त है उनकी पहले बात सुनकर जहां मैं खुशी से खिल उठी थी वहीं पर अगली बात सुनकर मैं हैरानी से उन्हें देखने लगी कैसी शर्त वह कहने लगे कि तुम्हें एक बार मेरी बात माननी होगी जो मैं तुम्हें करने को कहूंगा तुम्हें करना पड़ेगा यह कहकर उन्होंने मुझे मेरी आधी तनखा मेरे हाथ पर रख दी थी

 फिर मुझे कहने लगे कि यह इस लिए एडवांस में दी है ताकि तुम अपनी जरूरतों को पूरा कर लो और अपना लिया बेहतर कर लो उनकी बात सुनकर मैं शर्मिंदा हो गए फिर मुझे कहने लगे कि कल से तुम नौकरी पर आ जाना मैं खुशी-खुशी अपने घर आ गई घर आकर जब मैंने अपनी मां को यह बात बताई तो उसे भी अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था जब से बापू हम लोगों को छोड़कर गए थे तब से ही जैसे परेशानियां हम दोनों के लिए ही रह गई थी हम दोनों बहुत ही ज्यादा परेशान और गरीब हो गए थे

 

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 कोई हमसे हमारी जरूरतों के मुताबिक नहीं पूछता था यहां तक कि जो भी हमारे रिश्तेदार थे वह सब हमें देखकर मुंह मोड़ लेते थे जैसे हम कोई अछूत हो मैंने इन पैसों से अपने लिए दो-तीन कपड़ों के जोड़े खरीदे थे क्योंकि मैं इनके बिना अपने ऑफिस में नहीं जा सकती थी मैंने घर का भी थोड़ा सा सामान खरीद लिया था अम्मा यह देखकर खुश हो गई थी वह कहने लगी कि भगवान ने चाहा तो तो हमारी हालत फिर से अच्छी हो जाएगी

 मगर मैं यह सोच रही हूं कि जल्दी से तुम्हारे हाथ पीले कर दूं कल को अगर मुझे भी कुछ हो गया तो तुम इस संसार में अकेली पड़ जाओगी और तुम जानती हो कि दुनिया कैसी है तुम्हें अकेला देखकर नोच कर खा जाएगी मैंने मां का हाथ पकड़ लिया उसे तसल्ली दी कि ऐसा कुछ भी नहीं होता भगवान ने चाहा तो सब ठीक हो जाएगा तुम अपनी आंखों से मेरी खुशियां देखकर जाओगी मां मां मेरी बात सुनकर मुस्कुराई थी 

अगले दिन से ही मैंने ऑफिस में जाना शुरू कर दिया था यह काम बहुत मुश्किल था और मेरी पढ़ाई भी बहुत ज्यादा नहीं थी इसलिए मुझे यह काम समझने में मुश्किल तो हो रही थी मगर मैं पूरी लगन से यह काम सीख रही थी मुझे यह काम सिखाने की जिम्मेदारी साहब ने रवि सर पर डाल दी थी रवि सर बहुत अच्छे थे और मुझे हर चीज बहुत अच्छे से समझाते थे मगर एक बात मुझे समझ नहीं आई थी यहां यहां पर काम करने वाली लड़कियां मुझे देखकर अजीब अंदाज में हंसती थी 

और कई बार वह मुझे देखते हुए एक दूसरे को अजीब से उल्टे सीधे इशारे भी करती और मुझसे सवाल भी पूछती थी जब मैं साहब के कमरे से वापस आती तो वह मुझे हंसते हुए कहती कि तुम्हें तो यहां पर आए हुए काफी दिन हो गए हैं बड़ी बात है कि अब तक तुम्हें साहब कहीं भी लेकर नहीं गए उनकी बात सुनकर मुझे बहुत अजीब लगता था भला साहब ने मुझे कहीं क्यों लेकर जाना था मुझे इन लड़कियों की सोच पर अफसोस होता था

 उनकी सोच किस कदर गंदी थी और वह किस अंदाज में दूसरों के बारे में बातें करती थी मुझे यहां पर काम करते हुए दो महीने का वक्त गुजर गया था इन दो महीनों में ना तो साहब ने नजर उठाकर मेरी तरफ देखा था और ना ही कभी कोई ऐसी वैसी बात कही थी जिसके बिना पर मैं उनके बारे में कुछ गलत सोचती मैं समझती थी कि साहब जी बहुत अच्छे थे जिन्होंने मजबूरी की हालत में मेरी मदद की थी और मुझे नौकरी पर रख लिया था 

मगर इन लड़कियों की बातें मुझे परेशानी और दुख में फंसा दिया करती थी मेरी मां के दिल में भी 100 तरह के प्रश्न थे कि आखिर उस बंदे ने मुझ जैसी मामूली सी लड़की को नौकरी पर क्यों रखा था जबकि वहां पर तो मुझसे ज्यादा पढ़ाई वाली और काबिल लड़कियां मौजूद थी अब उनके दिल से भी तमाम प्रश्न दूर हो गए थे मैं ऑफिस में काम कर रही थी आज साहब ऑफिस में नहीं आए थे उनकी सेक्रेटरी का कहना था कि वह आज किसी जरूरी काम की वजह से ऑफिस में नहीं आएंगे

 और बाकी स्टाफ भी शाम के वक्त चला गया था मैं भी घर जाने ही वाली थी जब मुझे साहब के नंबर से कॉल आई और वह मुझे कहने लगे कि तुम फौरन से घर आ जाओ मेरी पत्नी की तबीयत सही नहीं है और आज मुझे तुम्हारी जरूरत है तुम्हें याद है ना मैंने तुम्हें कहा था कि जिस दिन मुझे तुम्हारी जरूरत पड़ी उस दिन तुम्हें मेरी बात माननी पड़ेगी यह सुनकर मैंने साहब से कहा कि मैं अभी आपके घर आ जाती हूं 

और फिर मैंने मां को फोन करके बता दिया कि मैं आज काम की वजह से साहब के घर जा रही हूं मैं जल्द ही वापस आ जाऊंगी फिर मैं जब साहब जी के घर गई साहब जी हॉल में ही टहल रहे थे मुझे देखकर वह बेताबी से मेरी तरफ बढ़े फिर मुझे कहने लगे कि तुम्हें मैंने एक बार कहा था कि तुम मेरी मदद करोगी और तुमने भी इस बात की हामी भर ली थी मैंने हां में सिर हिला कर उन्हें इस बात का जवाब दिया कि मुझे अभी भी वह बात याद है 

और मैं आपकी बात मानने के लिए तैयार हूं तब वह अजीब से अंदाज में मुस्कुरा दिए और फिर कहने लगे कि मेरे साथ मेरे कमरे में चलो उनकी यह बात सुनकर मैं घबरा गई थी सभी लड़कियों की बातें मेरे कानों में बज गई थी जो उन्होंने साहब के बारे में मुझसे कहा था कि वह मुझे अभी तक कहीं भी लेकर क्यों नहीं गए इसका मतलब यह था कि साहब की अपनी ऑफिस में काम करने वाली लड़कियों पर बुरी नजर थी जब ही तो उन लड़कियों ने मुझसे यह बात कही थी मैंने साहब जी को कहा कि मैं ऐसी लड़की नहीं हूं

 मैं मजबूरी की वजह से यह नौकरी कर रही हूं मगर आप मेरी इज्जत नहीं खरीद सकते मेरा इतना कहना ही था कि उनके चेहरे पर गुस्सा छा गया वह कहने लगे कि मैं तुमसे ऐसा वैसा कुछ भी नहीं चाह रहा मुझे तुमसे कुछ और बात करनी है अब उनका गुस्सा देखकर मुझे भी अपनी सोच पर शर्मिंदगी महसूस हुई मैंने उनसे माफी मांगी और उनके साथ उनके कमरे में आ गई मगर अंदर का मंजर देखकर मेरे पैरों के नीचे से जमीन निकल गई थी क्योंकि मैं यह सोचकर यहां पर आई थी कि साहब की पत्नी बीमार थी 

और साहब ने अपनी पत्नी की देखभाल के लिए मुझे यहां बुलाया था मगर आगे का जो मंजर था उसने तो मुझे हैरान कर दिया था मैंने हैरत भरी नजरों से साहब की तरफ देखा यह सब क्या है यह कैसे हो गया साहब कहने लगे कि बस यह सब कुछ अचानक से हो गया और मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैंने यह कैसे कर दिया वे दोनों हाथों में सर थाम के रह गए थे मगर मेरी हालत ऐसी थी कि मैं यह सब देखकर पागल होने को आ गई थी मैंने साहब को कहा कि आपको इन्हें अस्पताल लेकर जाना चाहिए था 

डॉक्टर को दिखाना चाहिए था वे खामोशी से मेरे चेहरे की तरफ देखते रहे फिर कहने लगे कि यह मर चुकी है अब इसे कहीं भी लेकर जाने का कोई फायदा नहीं है कोई डॉक्टर इसे नहीं बचा सकता मुझे यह बात सुनकर बहुत दुख हुआ था मैंने उनसे कहा कि मुझे बताइए आखिर यह सब कैसे हुआ और क्यों हुआ उन्होंने गहरी सांस ली फिर कहने लगे कि दरअसल मैं एक लड़की को पसंद करता हूं

 और मैं शादी भी उसी के साथ करना चाहता था मगर मजबूरी के बिना पर मेरी शादी सलोनी के साथ हो गई मगर शादी करने के बावजूद भी मैं उस लड़की को भूल नहीं पाया था और फिर अपनी पत्नी से छुपकर मैंने उसके साथ भी ताल्लुक रखा हुआ था और अक्सर उससे भी मिलता रहता था अब मेरी पत्नी का मुझ पर शक रहने लगा था ना जाने कैसे उसे मुझ पर शक हुआ था यह किसी जासूस की शरारत थी या फिर वह खुद ही मुझ पर नजर रखने लगी थी आज सुबह उसने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों के लिए मुंबई जा रही है

 और यहां एक हफ्ता मुझे उसके बिना ही रहना पड़ेगा मैंने उसके सामने अपनी उदासी का इजहार किया था मगर दिल ही दिल में यह सोचकर खुश था कि मैं पूजा के साथ दिल खोलकर मुलाकात कर सकता था अब मुझे किसी का कोई खतरा भी नहीं था जबकि मैंने पूजा को घर में बुला लिया और उसके थोड़ी ही देर के बाद मेरी पत्नी भी घर वापस आ गई उसने मुझे पूजा के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया था और फिर वह मुझ पर चिल्लाने लगी मेरे साथ बदतमीजी करने लगी गुस्से की हालत में ना जाने कैसे मेरे हाथ में वह खंजर आ गया 

जो कि मैंने बगैर सोचे समझे उसके सीने में उतार दिया और वह अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठी अब मैं बहुत परेशान हूं मैं क्या करूं ऐसे में मुझे तुम्हारा ख्याल आया और तुम्हारी बातें मुझे याद आ गई इसलिए अब तुम्हें मेरा एक काम करना होगा उनकी बात को मैं तसल्ली से सुन रही थी उनकी यह बात सुनकर मैं चौक उठी फिर उनसे कहने लगी कि मुझे क्या करना होगा वह गहरी सांस लेकर कहने लगे कि तुम्हें मेरी पत्नी के कत्ल को अपने सिर पर लेना होगा तुम्हें सबको यह कहना होगा कि यह कत्ल तूने किया है

 तुम यहां पर चोरी के इरादे से आई थी और मेरी पत्नी ने तुम्हें देख लिया और तुमने अपने बचाव के लिए उसे मार दिया साहब की बात सुनकर मैं शोक्ड हो गई उन्हें कहने लगी कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता मैं यह कत्ल अपने नाम कैसे ले सकती हूं मुझे सजा हो जाएगी और मेरी मां को यह सब पता चलेगा तो वह जीते जी मर जाएगी साहब जी कहने लगे तुम्हें कुछ नहीं होगा मैं तुम्हें बचा लूंगा 

मैं तुम्हारी जमानत करवा लूंगा और पुलिस को कह दूंगा कि मैंने तुम्हें अपनी पत्नी के कत्ल के लिए माफ किया लेकिन अगर मुझे जेल हो गई तो मुझे कोई शख्स भी नहीं बचा सकता मेरा पैसा भी मेरे किसी काम नहीं आएगा और तुम फिक्र मत करो यह मेरा तुमसे वादा है मेरे पास बहुत पैसा है और मेरी यह बात कहने से कि मैंने तुम्हें अपनी पत्नी का कत्ल करने के बावजूद भी माफ किया और थोड़े से पैसे खर्च करने से तुम जेल से बाहर आ सकती हो

 मैं तुम्हारी प्रमोशन भी कर दूंगा तुम्हारी सैलरी भी बढ़ा दूंगा और तुम्हें अच्छे इलाके में घर भी दे दूंगा और इसके अलावा जो तुम कहो होगी मैं तुम्हें करके दूंगा मैं दोनों हाथों में सर थाम के रह गई थी कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करूं मेरा दिल और दिमाग बार-बार मुझे यह एहसास दिला रहे थे कि यह गलत है मुझे यह सब अपने सर पर नहीं लेना चाहिए मैं इस तरह से फंस जाऊंगी दूसरी तरफ साहब जी भी मुझे सवालिया नजरों से देख रहे थे 

और जब मैंने सोचने समझने के बाद इंकार किया तो उन्हें गुस्सा आ गया वह कहने लगे कि अगर तुम खुद नहीं मानोगी तो मैं तुमसे जबरदस्ती भी यह बात मनवा सकता हूं मैं तुम पर चोरी का इल्जाम लगा सकता हूं तुम्हारे घर में पैसे रखवा करर तुम्हें फंसा सकता हूं और अपनी पत्नी की लाश को गायब करना मेरे लिए बिल्कुल भी मुश्किल काम नहीं है मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था कि मैं उनकी बात मान लूं यूं भी मुझे अपनी तो परवाह नहीं थी 

मगर जब उसने मेरी मां के बारे में धमकी दी तो मैं यह बात बर्दास्त नहीं कर पाई थी अपनी मां के लिए तो मैं अपनी जान भी दे सकती थी अगर मेरी मां को री वजह से तकलीफ पहुंचती तो यह मैं कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकती थी उसे मेरा फैसला सुनकर बहुत खुशी हुई थी तभी उसने पुलिस को कॉल कर दी और फिर पुलिस मुझे पकड़कर जेल में ले गई थी आज मेरी जेल में पहली रात थी

 आज पहला दिन था कि मैं अपने घर से दूर अपनी मां से दूर रह रही थी और बार-बार मैं बुरी तरह से रो रही थी मुझे यकीन नहीं आ रहा था कि मेरे साथ यह क्या हो गया था अब मुझे इस बात पर पछतावा हो रहा था कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था मुझे साहब की बातों में नहीं आना चाहिए था अब पुलिस ने भी जब पूछताछ की तो मैंने उनके सामने भी वही बात बता दी जो मुझे साहब जी ने कहने को बोला था अब मेरा दिल अंदर से बुरी तरह से रो रहा था काफी दिन गुजर गए थे 

साहब ने तो कहा था कि वह एक हफ्ते के बाद ही मुझे जेल से रिहा करवा लेंगे मगर अब तो दो हफ्ते का वक्त बीत गया था अब तक तो साहब ने मेरे लिए कुछ भी नहीं किया था और दो हफ्ते के बाद मेरी मां मुझसे मिलने के लिए आई तो वह बहुत रो रही थी मैंने मां को देखा तो अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाई मैंने मां को कहा कि साहब से पूछो कि वह आखिर क्या कर रहे हैं अब तक उन्होंने मुझे बाहर निकालने के लिए बंदोबस्त क्यों नहीं किया मां मुझे हैरत से कहने लगी कि मैं तो तुम्हारे साहब के पास कितनी बार जा चुकी हूं

 मगर उसका कहना है कि वह तुम्हें कभी माफ नहीं कर सकता तुमने उसकी पत्नी का कत्ल किया है यहां तक कि मैं उसके पैर भी पढ़ चुकी हूं मगर वह तुम्हें माफ करने पर तैयार ही नहीं है यह सुनकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया था तब मैंने सारी बात अपनी मां को बताई तो वह भी मुझे कहने लगी कि मुझे तुमसे इस कदर बेवकूफी की उम्मीद नहीं थी तुम किसी की बातों में कैसे आ सकती हो तुमने ऐसा क्यों किया है तुमने यह जुर्म अपने सिर पर क्यों लिया मां आप बुरी तरह से रो रही थी 

मुझे यकीन नहीं आ रहा था कि मेरे साथ साहब ऐसा कैसे कर सकते थे वह मुझे इतना बड़ा धोखा कैसे दे सकते थे अब मैं फूट-फूट कर रो पड़ी थी मैं उस दिन को कोस रही थी जब मैंने साहब को नौकरी देने के लिए कहा था और उनकी यह शर्त मान ली थी कि जो करने को बोलेंगे मैं कर दूंगी मुझे भी यह कत्ल अपने सर पर लेने की क्या जरूरत थी मैं अपनी मां को लेकर वहां से दूर चली जाती या कानून को अपनी तरफ ले लेती तो आज यह सब कुछ ना होता मेरी मां तो पढ़ी लिखी भी नहीं थी

 और उसके पास तो इतने पैसे भी नहीं थे कि वह कोई वकील कर सकती जो मुझे निकालने के लिए बंदोबस्त कर सकती जो यह काम कर सकता था वह ना जाने क्यों हाथ पर हाथ रखकर बैठा हुआ था अब मुझे डर लग रहा था कि सारी जिंदगी इस जेल में ही ना सड़ जाऊं मगर फिर एक दिन एक अच्छी बात हुई मैंने तो यह सोच लिया था कि मैंने सारी जिंदगी इस जेल में सड़ते हुए गुजारनी है सारी जिंदगी अपनी मां की शक्ल देखने को तरस जाऊंगी

 मगर उस दिन जब जेलर ने आकर मुझे जेल से बाहर निकाला और जब मुझे वह बात बताई तो उसे सुनकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया था उसने मुझे कहा कि मेरे माता-पिता दोनों ही गरीब खानदान से ताल्लुक रखते थे मगर दुख की बात यह थी कि उन्होंने गरीबी में ही जिंदगी जीने को मंजूरी दे दी थी उन्होंने कभी भी अपने हालात को बदलने की कोशिश नहीं की थी मैं जब उन्हें गरीबी के हालत में जिंदगी गुजारते हुए देखती तो मुझे गुस्सा आता था मैं उन्हें कहती कि इंसान को अपने हालात बदलने की कोशिश करनी चाहिए 

अगर आप गरीब हैं तो आपको यह कोशिश करनी चाहिए कि आप अपनी कमाई को ज्यादा कैसे कर सकते हैं आपको अपना कोई काम करना चाहिए कोई हुनर सीखना चाहिए अपनी पढ़ाई को पूरा करना चाहिए हो सकता है कि आपको इससे बेहतर नौकरी मिल जाए मैं जब ऐसी ही बातें अपनी सहेलियों से और हम उम्र लड़कों से करती थी तो वह सब मेरा मजाक उड़ाते मुझ पर हंसते और कहते कि हम सब लोग गरीब हैं और गरीब घर में पैदा हुए हैं 

हमारा नसीब कैसे बदल सकता है मगर मुझे इस बात पर गुस्सा आता था मैं सोचती थी कि जब इंसान कुछ करने पर आए तो वह कुछ भी कर सकता है उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं होता मैं अपने इलाके की पहली लड़की थी जो स्कूल के बाद कॉलेज में पढ़ने के लिए आई थी यूं तो जब मैं कॉलेज में आई तो मेरे फटे पुराने कपड़े देखकर सभी लड़कियां मेरा मजाक उड़ाती थी उनकी नजरों में गरीबी एक मजाक था 

जो चीज उन्होंने जिंदगी में नहीं देखी थी वह उसकी बदसूरती से उसकी तकलीफ से वाकिफ कैसे हो सकती थी मुझे उनका रवैया बहुत ही ज्यादा दुखी करता था मगर मैं यहां पढ़ने आई थी कुछ बनने आई थी और ऐसे में अगर मैं छोटी-छोटी बातों को अपने मन के साथ लगा लेती तो मैं कभी भी कामयाब नहीं हो सकती थी मैं पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और सब लड़कियों से ज्यादा मेरे ही नंबर आते थे 

अब लड़कियों का मेरे साथ व्यवहार बदलने लगा था वह मेरे साथ अच्छे से पेश आने लगी थी और यह मेरी पहली कामयाबी थी मुझे लगता था कि जिंदगी में सब कुछ ठीक हो जाएगा सब कुछ वक्त गुजरने के साथ साथ मुझे हासिल हो जाएगा जब मैं पढ़ लिखकर किसी काबिल बन जाऊंगी तो यही लोग जो मजाक उड़ाते थे वही लोग मुझसे ताल्लुक जोड़ने में फक्र महसूस करेंगे मगर भगवान को शायद कुछ और मंजूर था अब मैं 12वीं क्लास में थी जब मेरे पिता का इंतकाल हो गया था 

बापू के बाद से तो हमारी दुनिया ही अंधेर हो गई थी हमारे आसपास तो हमारी तरह गरीब लोग रहते थे और वह सब अपना खाना पना ही मुश्किल से पूरा करते थे ऐसे में उनसे मदद की उम्मीद कैसे रखी जा सकती थी हमारे जो रिश्तेदार थे जो बापू के मिलने वाले थे उन सब ने तो हमारी तरफ से अपनी आंखें बंद कर ली थी कोई भी शख्स हमारी मदद करने को हमारी बात सुनने को तैयार नहीं था और यह सब कुछ मुझे बहुत तकलीफ में धकेल होता था

 अब तो मेरी मां ने लोगों के घरों में काम करना शुरू कर दिया था मगर इससे भी हमारा गुजारा होना नामुमकिन था फिर मेरी मां अचानक से बीमार हो गई और अब तो उनमें चारपाई से उठने की भी हिम्मत नहीं थी जब तक उनका किसी अच्छे से डॉक्टर से इलाज ना करवाया जाता जब तक उन्हें दवा ना दी जाती वह तब तक ठीक कैसे हो सकती थी मैं लोगों के घरों में काम नहीं कर सकती थी इसलिए मैंने छोटी बच्चियों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दी थी

 मगर उससे भी इतने पैसे नहीं आते थे कि मैं घर चलाने के साथ-साथ अपनी मां का इलाज भी करवाऊं बापू को तो मैंने खो दिया था मगर उनके बाद अपनी मां को खोने का सोच भी नहीं सकती थी तभी मैं उस कंपनी में नौक नकरी करने चली गई थी क्योंकि मुझे इस बात का अंदाजा था कि मेरे पास नॉलेज कम थी मगर मुझे इस बात का भी यकीन था कि अगर मैं उस शख्स को मजबूरी बता दूं 

और उसे अच्छे से अपने हालात के बारे में आगाह कर दूं तो वह मुझे नौकरी पर रख लेगा और मेरा यह अंदाज गलत नहीं था मगर मैं क्या जानती थी कि मैं कौन सी बड़ी मुसीबत में पड़ने वाली थी उस शख्स ने मुझे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया था और शायद वह खुद अपनी जिंदगी में बिजी हो गया था जबकि उसने अपने वादे को पूरा नहीं किया था मैं इस बारे में सोच सोच कर पागल हो रही थी कि आखिर मैंने उसका क्या बिगाड़ा था

 उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया था और अब जब जेलर ने मुझे यह कहा कि अब तुम यहां से बाहर जा सकती हो क्योंकि तुम्हारी बेगुनाही साबित हो चुकी है तो यह सुनकर मुझे यकीन नहीं आ रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है वह कहने लगी कि कल की खबर में सब कुछ आ जाएगा और कल तुम्हें एक बार फिर से अदालत में पेश किया जाएगा इसलिए कल वक्त पर आ जाना जो भी हकीकत है 

वह सबके सामने आ जाएगी मैं उनका शुक्रिया करके घर आई मेरी मां बहुत ही ज्यादा रो रही थी उसके पास मोहल्ले की औरतें बैठी हुई थी और सब ने जब मुझे अपनी आंखों के सामने देखा तो उन्हें भी यकीन नहीं आ रहा था मेरी मां मुझे देखकर कितनी ही देर मुझसे लिपट कर रोती रही मुझे कहने लगी कि तुम यहां पर कैसे तो मैंने उनसे कहा कि मुझे यकीन था कि मेरे साहब मेरी जमानत करवा लेंगे

 और देख देख ले उन्होंने आखिर मेरी जमानत करवा ही ली मुझे आजाद करवा ही लिया अब मैं साहब से शुक्रिया अदा करने के लिए उनके घर में जाना चाहती हूं मैंने नहा धोकर कपड़े बदले और फिर अपनी मां के हाथ का बना खाना खाकर मैं साहब का शुक्रिया अदा करने उनके घर गई मैं आज बहुत खुश थी कितने दिनों के बाद मैं कैद से रिहा हुई थी ऐसे में मेरा खुश होना और साहब का शुक्रिया अदा करना तो बनता था

 जब उनके घर आई तो यह देखकर मैं न परेशान रह गई क्योंकि साहब के घर के आसपास तो पुलिस जमा थी और उनका दरवाजा भी बंद था चौकीदार के बजाय वहां पर पुलिस वाले नजर आ रहे थे मैं वहीं से वापस आ गई और जब रास्ते में मिलने वाले कुछ लोगों से इस बारे में पूछा तो वह सब कहने लगे कि साहब को पुलिस पकड़ कर ले गई है और यह घर भी सील कर दिया गया है

 मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था यह क्या था तो फिर मैं बाहर कैसे आ गई थी क्या पुलिस वालों को पता चल गया था कि यह कत्ल मैंने नहीं बल्कि साहब ने किया है सारी हकीकत तो कोर्ट में जाकर ही मालूम होनी थी मैं फिर खामोशी से अपने घर वापस आ गई तो मां ने मुझसे पूछा कि साहब से मिली तो मैंने मां को सारी बात बताई तो वह भी सुनकर हैरान रह गई आखिर ऐसा कैसे मुमकिन हुआ है 

मगर जो भी था मेरे हक में तो यह बेहतर हुआ था अगले दिन जब मैं अदालत में पेश हुई तो तब मैं जानने को बेचैन थी कि मेरी बेगुनाही कैसे साबित हुई हुई थी मुझे इस बात का अंदाजा अब हो गया था साहब सामने कटघरे में सर झुकाए खड़े थे जज ने उनसे कहा कि आपका जुम साबित हो गया है और यह बातें सबके सामने आ चुकी है कि यह लड़की बेगुनाह थी इसको महज आपने फंसाया है 

आपके कहने पर इस लड़की ने यह कत्ल अपने सर पर लिया और अब आप सब लोगों को यह बताएं कि आपने अपनी पत्नी का कत्ल क्यों किया साहब थके हुए अंदाज में कहने लगे कि मैं एक गरीब नौजवान था मैं शॉर्टकट चाहता था मैं अपनी जिंदगी बदलना चाहता था क्योंकि मुझे कुर्बानी से और गरीबों से सख्त नफरत थी फिर मैंने एक अमीर लड़की को अपनी मोहब्बत के जाल में फंसा लिया 

उसे इस कदर अपनी मोहब्बत का यकीन दिलाया कि वह मेरे अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती थी और फिर उस लड़की ने अपने बाप की मर्जी के खिलाफ जाकर मुझसे शादी कर ली थी उसके बाप ने मुझे पहली ही नजर में पहचान लिया था कि मैं धोखेबाज हूं मैं ने कभी भी उसकी बेटी को अपने बारे में कुछ नहीं बताया ना जाने कैसे वह शख्स मुझे पहली नजर में पहचान गया था 

मगर मेरी पत्नी ने उनकी किसी बात पर यकीन नहीं किया और मुझसे शादी करके अपने बाप से अलग हो गई कुछ अरसे के बाद उसका बाप जिंदगी की बाजी हार गया तो अब सब कुछ मेरी पत्नी के नाम हो गया था यह सब पैसा जायदाद सब कुछ हम दोनों के पास थे मुझे उसने कभी किसी मामले में रोक टोक नहीं की थी जो दिल करता जहां चाह था मैं चला जाता था उसने कभी मुझसे कोई सवाल नहीं किया था

 और ना ही कभी उसने मुझ पर किसी मामले में शक किया था मगर मेरे लिए यह सब कुछ काफी नहीं था मैं चाहता था कि यह सब कुछ मुझे हासिल हो जाए और फिर जब मेरी दोबारा से पूजा से मुलाकात हुई पूजा मेरी गर्लफ्रेंड थी मैं उसे देखकर अपने दिल पर काबू रखना भूल गया था और उसके साथ भी मेरे ताल्लुक पैदा हो गए थे मैं पूजा से बहुत मोहब्बत करता था उसके बगैर रहने का सोच भी नहीं सकता सता था 

पूजा भी जानती थी कि यह शादी मैंने महज अपनी मजबूरी की वजह से की थी और अब जब मैं उस पर भी पैसा बहाने लगा तो उसने भी मुझसे मोहब्बत का इजहार कर लिया था अब हम दोनों एक साथ बहुत खुश रहने लगे थे मैं अपनी पत्नी का भी बहुत ख्याल रखता था उससे भी बहुत प्यार जताता था उसे कभी भी इस बारे में शक नहीं हुआ था मगर एक दिन उसके खास नौकर ने मुझे पूजा के साथ देख लिया और मेरी पत्नी को सारी बात बता दी

 मगर मेरी पत्नी ने इस बात पर यकीन नहीं किया था वह जब तक अपनी आंखों से देख ना लेती वह मेरे खिलाफ किसी भी बात पर विश्वास नहीं करती थी मगर एक दिन जब उसने मुझे खुद पूजा के साथ देखा तो उसे बहुत दुख हुआ था मगर उसने मेरे सामने किसी बात का इजहार भी नहीं किया और फिर उसने मुझे जानबूझकर कहा कि वह कुछ दिनों के लिए मुंबई में जा रही है यह बात उसने ऐसे ही कही थी

 बल्कि यह जानने के लिए कि मैं उसकी गैर मौजूदगी में क्या करता हूं क्या मैं पूजा से मिलता हूं वह जब चली गई तो मैंने सोचा कि आज पूजा को घर ही लेकर आता हूं उससे मिलने का दिल कर रहा था मगर जब मैं पूजा को घर लेकर आया तो ऊपर से मेरी पत्नी भी आ गई थी उसने हम दोनों को बहुत गलत हालत में देख लिया था और यह देखकर मैं बुरी तरह से खौफ जदा हो गया था मैं जान गया था कि अब वह मुझे छोड़ देगी मेरे हाथ से यह सारी जादा दौलत सब कुछ निकल जाएगा तभी मैंने उसका कत्ल कर दिया

 और यूं उसकी सारी दौलत मेरे हिस्से में आ गई मैं नहीं जानता था कि कमरे में मेरी पत्नी ने सीसीटीवी कैमरे लगा रखे थे जिनके बारे में उसके वकील को पता था और मैं इस सबसे बेखबर था दरअसल जब से मेरी पत्नी को पूजा पर शक हुआ था तब से उसने बेडरूम में यह कैमरा लगा लिया था ताकि अगर मैं उसकी गैर मौजूदगी में पूजा को यहां लेकर आऊं तो उसे यह बात पता चल सके मगर मैं क्योंकि सबसे बेखबर था 

इसलिए मेरी अपनी पत्नी को कत्ल कर ने से लेकर रूपा को यह कत्ल अपने सर पर लेने तक की पूरी रिकॉर्डिंग उसमें मौजूद थी उन दिनों उसके वकील दूसरे शहर में गए हुए थे और वह इससे बेखबर थे क्योंकि जिस जगह पर वह थे वहां पर सिग्नल नहीं आते थे वापस आकर उन्हें मेरी पत्नी के कत्ल के बारे में पता चला तो उन्होंने तमाम सीसीटीवी कैमरों में पुलिस को कहकर रिकॉर्ड चेक करवाया और सारा सच सामने आ गया कि यह कत्ल दरअसल मैंने किया था

 और रूपा को मैंने यह कत्ल अपने ने सर लेने को कहा था अब सारी बात मुझे समझ आ गई थी कि मैं क्यों जेल से रिहा हुई थी और मैं इस बात पर शुक्र मना रही थी वरना अगर वहां पर वह कैमरे मौजूद नहीं होते तो मैं अब तक उस जेल में ही होती मुझे इतना अंदाजा हो गया था कि साहब जी ने कभी भी मुझे जेल से बाहर निकलवाना नहीं था क्योंकि वह पूजा के साथ आजादी से जिंदगी जीना चाहते थे 

अब जब उनकी पत्नी रास्ते से हट गई थी और सारी दौलत भी उनके हाथ आ गई थी ऐसे में वह अपनी मनपसंद औरत से विवाह करके उसके साथ मनपसंद जिंदगी गुजार सकते थे और उन्हें मुझे भी जेल से बाहर निकलवाने की क्या जरूरत थी मगर साहब इस बारे में भूल गए थे कि एक ऊपर वाला भी मौजूद है जो हर चीज पर नजर रखे हुए हैं कब क्या हो जाए 

कोई इस बारे में कुछ भी नहीं कह सकता वह घर और वह जायदाद फिर यतीम खाने को दे दी गई थी क्योंकि साहब की पत्नी का कोई भी रिश्तेदार इस दुनिया में मौजूद नहीं था था उसके बाद मैंने एक होटल में वेटर्स की नौकरी कर ली थी और इसके साथ-साथ मैंने अपनी पढ़ाई का सिलसिला भी जारी रखा था मैं मेहनती तो शुरू से थी मेहनत से जान छुड़ाने वालों में से नहीं थी

 अब मैंने कुछ अरसे के बाद होटल के सारे काम को समझ लिया था साथ ही थोड़ी बहुत रकम भी बचाने लगी थी और अब तो मुझे डिग्री भी मिल गई थी मगर मैंने कहीं पर नौकरी करने के बजाय सोचा था कि मैं कोई अपना छोटा-मोटा कारोबार शुरू कर लूंगी और भगवान ने चाहा तो वह मुझे उसी में बहुत कुछ दे देगा और ऐसा ही हुआ कि मैंने कुछ पैसे उधार लिए थे और कुछ मेरे पास अपनी सेविंग थी

 उन सबको लगाकर मैंने भगवान का नाम लेकर एक छोटी सी दुकान खोल ली थी शुरू में तो मेरा यह काम अच्छे से नहीं चला था मैं भी मायूस हो गई थी मेरी मां भी मुझे बात-बात पर कहती थी कि मैंने यह फैसला करके गलत किया मगर अब जब मेरा काम बहुत अच्छे से चलने लगा था और मैंने जब अपने साथ हेल्पर भी रख लिए थे तो मां को भी मेरे इस फैसले पर खुशी होती और वह मुझे कहती तुम तो बहुत ही बहादुर हो हालात को अपनी मर्जी के मुताबिक तब्दील कर लेती हो

 और मैं मां की बात सुनकर हंस पड़ी थी उसे कहने लगी कि यह सब आपका और पापा का कमाल है जिन्होंने मुझे यह सब सिखाया है मेरा काम बहुत अच्छा चल रहा है और मैं बहुत आगे निकल चुकी हूं जो मेरे साहब ने मेरे साथ किया था उसको जब याद करती हूं तो मेरी रूह का जाती है पर वह एक कल था जो बीत गया लेकिन जो भी उसने मेरे साथ किया था वह बहुत गलत किया था 

पर मैं अब उसे माफ कर चुकी हूं क्योंकि उसे उसके किए की सजा मिल चुकी है वह अपनी पत्नी के कत्ल की सजा उम्र कैद के तौर पर काट रहा है तो इस कहानी के बारे में आपकी क्या राय है कमेंट करके जरूर बताइएगा |

 

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