Sad And Emotional Hindi Story | Long Hindi Story | Family Hindi Story

Sad And Emotional Hindi Story : इस घर में पिछले कुछ महीनों से जो सब हो रहा था वह बहुत ही ज्यादा अजीब था इतना अजीब कि अब मैं भी उसके बदले में कुछ अजीब करने को तैयार हो गई थी मैं अपने पति के कपड़े पहन रही थी क्योंकि मुझे अपने पति की तरह नजर आना था मैं ऐसा क्यों कर रही थी इसके पीछे बहुत बड़ी कहानी थी पर मैंने अपने पति के कपड़े पहन लिए और अब मैं बिल्कुल एक मर्द लग रही थी और वह भी अपने पति जैसा मैंने गमछा भी अपने चेहरे पर लपेट लिया था कि मेरा मुंह नजर ना आए 

 

और मैं उस घर के अंदर चली गई अभी मैं घर के अंदर गई ही थी कि मैंने भारी सी आवाज में कहा आ गया हूं मैं और उसके बाद जो वहां पर हुआ वह देखकर मैं हैरान रह गई वह सारी औरतें मेरी तरफ ऐसे लपकी थी कि जैसे मैं आम आदमी नहीं बल्कि कोई बहुत बड़ा हीरो हूं और उसके बाद उन्होंने मुझे एक झूले पर बिठा दिया मेरे आसपास बैठ गई एक औरत मेरे पैर दबाने लगी तो दूसरी औरत मेरा सिर दबाने की कोशिश करने लगी और तीसरी ने तो मेरे साथ ऐसा किया कि मेरा पूरा मेरे पति का नाम राकेश था बहुत ही रंगीन मिजाज आदमी था 

 

लेकिन वह उन लोगों में से था जिसे खूबसूरती देखने का शौक था लेकिन बाद में हाथ लगाने की हिम्मत नहीं करता था बस दूर से लड़कियों को देखता था क्योंकि बाजार में औरतों के कपड़ों की दुकान थी पूरे दिन उसकी दुकान पर औरतें आती थी और उसे यह आदत पड़ गई थी पर मुझे पता था कि वह ऐसी वैसी हरकतें करने के काबिल नहीं है और अब हम घर बदल रहे थे मेरे पति ने कहा कि आसपास देख लेंगे जो घर सबसे अच्छा हुआ उसी से ज्यादा मेल मिलाप रखेंगे मैंने कहा कि हां ठीक है पहले हम लोग किराए पर रहते थे और किराएदार की कोई मोहल्ले धारी नहीं होती 

 

लेकिन जहां अपना घर होता है वहां पर मोहल्ले में पड़ोसियों के साथ अच्छी बात हो तो उसका फायदा ही होता है पर आजकल हर कोई इस काबिल नहीं होता लोग बड़े अजीब होते हैं मेरे पति ने कहा कि तुम अकेली रहती हो और मैं भी पूरा दिन दुकान पर होता हूं इसलिए किसी ना किसी से यारी दोस्ती बनानी ही पड़ेगी हम लोग एक नए मोहल्ले में आ गए यह मोहल्ला बहुत भरा हुआ था यहां बहुत सारे घर थे बड़ी रौनक थी मैं भी खुश थी कि मेरा अपना घर बन गया था मेरा पति काम बहुत अच्छी तरह से करता था पूरा दिन दुकान पर बैठता था मुझे उससे कोई भी मसला नहीं था

 

 जब हम लोग यहां पर आए तो साथ वाले घर में एक पति-पत्नी रहते थे उसकी पत्नी बहुत अच्छी थी उसका नाम कूफा था जब हम लोग घर में काम कर रहे थे तो वह मेरे लिए चाय बनाकर ले आई और उसने कहा कि आप तो हमारे पड़ोसी हैं और सोचा कि आप शिफ्टिंग कर रहे हैं तो मैं आपके लिए चाय बनाकर ले आई मैंने अपने पति से कहा कि देखो कितने अच्छे लोग हैं तो उसने कहा नहीं इतनी भी अच्छी नहीं है अजीब सी औरत है वजन देखा है उसका जैसे धरती का बोझ हो 

 

मैंने कहा कि आपको उसके वजन से क्या है आपने देखा नहीं वह हमारे लिए चाय बनाकर लाई है और वही हमारी पड़ोसन है मेरे पति ने कहा पड़ोसी घर के सामने वाले भी होते हैं रुको मैं किसी बहाने से उनके घर जाता हूं देखकर आता हूं घर में कौन है मैं हैरान थी कि मेरे पति को क्या हो गया सब लोग कहते थे कि इस आदमी से शादी ना करो औरतों की चीजों की दुकान बनाकर बैठा है इसका दिमाग भी किसी औरत से कम नहीं होगा मुझे उस वक्त तो इस बात पर गुस्सा आता था 

 

लेकिन बाद में मुझे पता चला कि हां ऐसा ही था मेरा पति मेरे सारे मामलो में बोलता था अगर मैं अपनी मर्जी से कोई साड़ी पहन लेती तो कहता था नहीं यह अच्छी नहीं लग रही इसके साथ दूसरा वाला ब्लाउज पहन कर आओ इसके साथ दूसरा जूता पहन लो मुझे उसका मामले में बोलना अच्छा नहीं लगता था मर्द इस तरह की हरकतें करें तो बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था ऊपर से हमारे यहां अभी तक कोई संतान भी नहीं हुई थी और सब लोग मेरे पति पर ही शक करते थे और बातें करते थे वे कहते थे

 

 कि यह बच्चा पैदा करने के काबिल नहीं है इसका इलाज क्यों नहीं करवाती मुंह पर तो कोई नहीं कहता था लेकिन पीठ पीछे बातें सुनने को मिलती थी तो बहुत बुरा लगता था मेरा पति ना सिर्फ औरतों के कपड़े बेचता बल्कि कभी-कभी उनको खुद भी साड़ी पहन कर दिखाता था कि यह देखें आंटी जी यह देखें यह क्या है क्या सामान आया है इस तरह की बातें करता था ठीक है उसका काम था और माल बेचने के लिए ग्राहक को खुश करना पड़ता है ना जाने किया किया करना पड़ता है लेकिन फिर भी जो लोग इस काम को नहीं समझते उनको यह सब कुछ अजीब लगता है

 

 मेरे घर वालों को भी यह सब कुछ बहुत अजीब लगता था वही बात हुई जो उसने सामने वालों के घर में ही दोस्ती यारी लगाने की ठान ली थी उसने कहा कि एक आंटी रहती है बहुत अच्छी औरत है मैंने कहा कि अच्छी औरत है पानी तक तो पूछा नहीं और तुम वहां पर दो घंटे बिता करके आ गए अच्छी औरत होती तो हमारा थोड़ा सा ख्याल करती जैसे साथ वाली हमारे लिए चाय लेकर आई है उसने कहा कि हां यह बात तो तुम ठीक कह रही हो खैर रात हो गई अब हम लोग इतना थक गए थे 

 

मैंने कहा कि मैं तो खाना नहीं बना सकती कुछ ऑन आर्डर कर लो लेकिन पहले ही इस शिफ्टिंग में इतने पैसे लग रहे थे कि ऑन ऑर्डर करने का दिल नहीं कर रहा था थोड़ी देर बाद देखा तो सामने वाली आंटी हमारे लिए खाना बनाकर ले आई उसके साथ उसकी एक बेटी भी थी उन्होंने हाथ में इतना खाना उठा रखा था कि जैसे शादी का खाना है हमारे लिए शाही पनीर दाल मखनी चावल रोटियां पराठे यहां तक के थर्मस में गरम-गरम चाय भी डाल रखी थी

 

 और उसके साथ खाने के लिए नमकीन और बिस्कुट भी वह सब कुछ हमारे पास रख के चली गई और कहा कि आप लोग थक गए होंगे आराम से खा लीजिएगा चाय भी पी लीजिएगा अब मेरे पति ने मेरी तरफ देखा और कहा कि तुम्हें तो लोगों की पहचान ही नहीं है एक औरत तुम्हारे लिए खाली चाय बनाकर लाई तो तुम उसको ही बहुत अच्छा समझ रही थी यह देखो ऐसे व्यवहार रखा जाता है लोगों के साथ ऐसे होते हैं खानदानी लोग इतना सारा खाना अगर हम लोग बाहर से ऑन आर्डर करते तो हमारे कितने पैसे लग जाते अरे यह खाना तो हम कल भी खा लेंगे

 

 मेरे पति ने खाना निकालना शुरू कर दिया और वह खाना बहुत ज्यादा स्वादिष्ट था वह कहते हैं ना पुरानी आंटी होती है उनके हाथ में बहुत स्वाद होता है और ऐसा ही था खाना तो वाकई बहुत मजेदार था मैं भी चुप हो गई मैंने कहा कि हां ठीक कह रहे हो तुम लेकिन मुझे वह आंटी ज्यादा अच्छी नहीं लगी थी पहले ही दिन हमारे लिए इतना कुछ कर रही थी पता नहीं हमसे किस परिणाम की उम्मीद लगाकर बैठी थी सुबह वह हमारे लिए नाश्ता भी लेकर आई और बर्तन लेने के लिए भी खुद ही आ गई अब यह कुछ ज्यादा ही हो रहा था मैंने उनको कहा कि आप इतना नहीं करें

 

 तो उसने कहा कि आपको हमारे पड़ोसी हो आप लोगों ने यह घर ले लिया है और हमारे घर में ना कोई मर्द नहीं है हम आप लोगों की मदद करेंगे कभी आप हमारी मदद कर देना मैं समझ गई कि किस लिए सब कुछ कर रही है फिर मैंने सोचा कि चलो ऐसा है तो कोई मसला नहीं इतना तो बंदा कर ही लेता है मैंने भी कह दिया कि ठीक है हमारे पास गाड़ी भी थी और उनके पास गाड़ी नहीं थी उन्होंने सोचा होगा कि कभी कहीं जाना होगा तो हमारी गाड़ी उनके काम आ जाएगी

 

 पति है गाड़ी में छोड़ आएगा लेकिन यह तो बाद की बात है आंटी मेरी जिंदगी में तो बहुत बड़ा तूफान लेकर आने वाली है हमारा घर सेट हो गया ज्यादा वक्त नहीं लगा हम लोगों ने बड़ी अच्छी तरह से शिफ्टिंग की थी चीजों को बहुत तरीके से रखा था जो चीजें पुरानी थी उनको वहीं पर पर छोड़ दिया था मेरा घर सेट हो गया था मैं बहुत खुश थी

 

 

अब मैंने पूजा रखनी थी और उसकी तैयारियों में लगी थी इसमें भी उस आंटी ने उसकी बेटियों ने बहुत साथ दिया जब मैंने उनको पूजा में आमंत्रित करने गई तो मुझे यह पता चला कि उसके घर में तो बेटियां ही बेटियां थी उसकी तो बेटियां थी 

 

और सभी इस खूबसूरत दुबली पतली एक ही उम्र की लगती थी उसने कहा कि इनमें एक-एक साल का फर्क है लेकिन जवान हो गई हैं तो एक जैसी लगती है है मैंने कहा कि आपने इनकी शादी नहीं की तो उन्होंने कहा कि बस रिश्ते तलाश कर रही हूं लड़कियां अच्छी थी मेरी बहुत इज्जत की मुझे चाय पानी पूछा एक लड़की तो मेरे पास आकर बैठ गई उसने कहा मेरा नाम रेखा है और कहा कि दीदी आप थक गई होंगी आपने अकेले इतना बड़ा घर शिफ्ट कर लिया मैं आपके पैर दबा देती हूं

 

 मैंने कहा कि नहीं नहीं तुम मेरे पैर दबाव अच्छा नहीं लगता मुझे बड़ा अजीब लगा मुझे यह सब कुछ ज्यादा ही लग रहा था इतना भी कोई किसी के अच्छा नहीं होता था लेकिन अब हम लोग ऐसे समाज में रहते हैं कि जहां कोई किसी के साथ थोड़ा सा भी अच्छा करता है तो हम यह नहीं कहते कि तुम्हारा शुक्रिया हम यह सोचने लगते हैं कि यह मेरे साथ अच्छा क्यों कर रहा है कहीं इसके दिल में कोई बात तो नहीं है इसको मुझसे कोई मतलब तो नहीं है क्या करें जमाना आजकल ऐसा ही हो गया

 

 लेकिन बस सादा सा मर्द है ऐसा नहीं है कि जिससे शादी करने की कोई औरत सपने देख सकती है बस सीधा साधा है मुझे कभी कभी ऐसा लगता है कि मेरे पति के अंदर एक औरत भी रहती है औरतों की बातें करना उसको ज्यादा अच्छा लगता है तो कहने लगे कि तुम तो पागल हो अरे मर्द तो मर्द होता है और उन औरतों के लिए यह मर्द नहीं है सिर्फ एक अपनी दुकान की वजह से मैं औरत बनता हूं वरना यह औरतें दुकान तक हड डप के खा जाएंगे और तुम हाथ मलती रह जाओगी 

 

ऐसे में हमारे पास कुछ नहीं बचेगा मैंने कहा पहले को नहीं था पर अभी-अभी हमने घर बनाया है गाड़ी ली है इससे पहले कुछ नहीं था अब दुकान भी है दुकान भी अभी छुड़वाई है पहले तो कर्जे की वजह से फंसी हुई थी भगवान की बड़ी कृपा है हमारे ऊपर सब कुछ ठीक है बच्चे नहीं है इसलिए ज्यादा खर्च भी नहीं है हमारा अब तो घर भी अपना हो गया और सवारी भी अपनी बन गई उसने कहा कि फिर तो तुम्हारे पति के पास बहुत पैसे रहते होंगे और वह सारे पैसे निकाल देगा 

 

और अब तुमने बात कर दी है तो मैं भी तुम्हें बता दूं एक दिन मैंने उसे आंटी जी के घर दो किलो पनीर लेकर जाते हुए देखा है तुमने मंगवा था क्या उससे पनीर मैंने कहा कि नहीं मैं तो पनीर ज्यादा चाहों से नहीं खाती हूं मैंने तो नहीं मंगवाया था उसने कहा कि फिर आंटी जी ने मंगवाया होगा उनके घर में पनीर लेकर जा रहा था मैंने कहा कि हो सकता है आंटी जी ने उसे पैसे दिए हो तो उसने कहा कि वह किसी को पैसे नहीं देती जिसके उसने पैसे देने होते हैं

 

 किराने वाले के पास जाकर पूछो इनका घर कर्जे पर चल रहा है वह बेचारा उनके दरवाजे के आगे आकर एक दफा बातें भी सुनाकर गया है है लेकिन मां और बेटियों को शर्म ही नहीं आती इनसे तो पूरा मोहल्ला परेशान है और तुम हो कि अपने पति को उनके पास खुलना छोड़ा हुआ है लेकिन अब मेरी एक बात गौर से सुन लेना ऐसे सीधा अपने पति को माना नहीं करना क्योंकि यह जो मर्द होता है ना यह उल्टी खोपड़ी का होता है इसे जिस काम से माना करो यह वही करता है

 

 तुम उससे पूछना कि तुम वहां बार-बार क्यों जाते हो और फिर माना करना कि नहीं जाया करो या फिर इसको इतना बिजी कर दो कि इसके पास इतना वक्त ना बचे मैंने कहा कि वह तो पहले ही बड़ा मसरूफ रहता है दुकानदार बंदे की कौन सी जिंदगी होती है उसकी तो कोई छुट्टी भी नहीं होती तो वह कहने लगी कि अगर फिर भी वह अपना कारोबार छोड़कर इन लोगों के पास आता है तो इसका मतलब कि बात तो पहले ही आगे निकल चुकी है अब तुम क्या बचा लोगी 

 

मैंने कहा कि ऐसी बातें नहीं करो उसने कहा कि मेरी मानो बहन अपने पति को बचा लो तुमने आज कल के ड्रामा फिल्मों में नहीं देखा यह सब कुछ कितना हो रहा है मैं उसके पास बैठकर मेरा तो सर चकराने लगा था बातें तो उसकी सारी ठीक थी रात में तो मैंने अपने पति से बात करने की कोशिश की मैंने कहा कि यह बार-बार सामने वाली आंटी के घर क्यों चले जाते हैं और आप मुझे बताते भी नहीं है पूछती हूं तो गुस्सा हो जाते हैं उसने कहा कि मैं बार-बार नहीं जाता उनको काम होता है

 

 तो वह बुला लेती है मैंने कहा कि अगर उनके इतने काम हैं तो वह काम पर किसी आदमी को क्यों नहीं रख लेती इस घर में भी कुछ काम रहते हैं जो अभी नहीं हुए अपने घर के काम तो आपने कभी नहीं किए इस बात पर मेरा पति गुस्सा करने लगा और आज मुझसे इस तरह से बोलने लगा जैसे आज तक नहीं बोला था मैं तो हैरान थी कि इसके अंदर इतना गुस्सा कहां से आ गया उसने कहा कि सारा घर तो बदल कर दिया है तुम अभी भी कहती हो कि मैं काम नहीं करता

 

 मैंने कहा कि अच्छा गुस्सा ना करें मुझे तो उससे डर लगने लगा था क्योंकि इससे पहले वह कभी भी इस तरह से मुझ पर चलाया नहीं था लेकिन मैं उसे रोक नहीं पा रही थी वह सामने वालों के घर जाता था बार-बार जाता था उनके लिए चीजें भी लेकर जाता था वह भी बार-बार उसे फोन करके बुलाती थी एक दिन मैं चली गई और सोचा कि आज सीधा जाकर कह दूंगी कि मेरे पति को ना बुलाएं पर जैसे ही मैं अंदर गई तो उन लोगों ने मेरी इतनी सेवा की कि मैं हैरान रह गई

 

 एक लड़की ने देखा कि मेरे पांवों पर मिट्टी लगी हुई है तो उसने मेरे पांवों की मालिश शुरू कर दी दूसरी ने मेरे लिए चाय बना ली तीसरी हलवा बना लिया और एक ने कहा दीदी आपका सर दबा देती हूं आप बहुत थकी हुई लग रही हैं अकेली रहती हैं आपके बाल खराब हो रहे हैं किसी ने कभी आपके सर में तेल नहीं लगाया मैं लेट गई उन्होंने मेरी इतनी सेवा की कि मैं जो बात करने गई थी वह कर ही नहीं पाई मुझे मौका ही नहीं मिला मैंने उनसे कुछ बोल ही नहीं पाई और वहां से वापस आ गई

 

 लेकिन रात को मैं यह सोचने लगी कि अगर यह लोग मेरी इतनी सेवा करते हैं तो मैं कुछ नहीं बोल ही नहीं पाई तो इसका मतलब है कि यह मेरे पति के साथ भी ऐसा ही करती होंगी तभी वह बार-बार वहां जाता है रात हुई तो मैंने सोचा कि पति की सेवा खुद ही कर लेनी चाहिए वैसे भी यह मेरा धर्म है यह नहीं होके उसे वहां जाना पड़े मैंने कहा मैं आपके पैरों की मालिश कर देती हूं तो उसने कहा तुम्हें आज यह ख्याल कैसे आया मैंने कहा मुझे ख्याल नहीं आएगा तो किसको आएगा मैं पत्नी हूं

 

 आपकी सेवा करना तो मेरा ही काम है है ना उसने कहा लेकिन मेरे पैरों में दर्द नहीं है फिर मैं कौन सा काम करता हूं जिससे मेरे पैरों में दर्द हो जाए मैंने कहा तो फिर सर में तेल लगा देती हूं दूसरे का क्या सर में तेल नहीं लगाना नहीं तो सुबह मुझे बाल धोने पड़ेंगे मुझे जल्दी जाना है मैंने कहा तो फिर हाथों पर लगा देती हूं

 

 

तो उसने कहा तेरे हाथों में कौन तेल लगाता है क्या हो गया है तुम्हें मैंने कहा बस मुझे आपकी सेवा करनी है मैं आपसे बहुत प्रेम करती हूं तो मेरा पति कहने लगा मुझे पता था मुझसे बहुत प्रेम करती हो मैंने कहा फिर पता है तो मेरी बात क्यों नहीं मान लेते मैं थोड़ा सा अच्छे से पेश आने की कोशिश कर रही थी

 

 पर मेरा पति मेरी बातें सुनते सुनते ही सो गया सुबह मैंने यह बात अपनी पड़ोसन को बता दी उसने फिर से मेरे कान भरे और कहा अपने पति को उसे घर में नहीं जाने दो जाकर उन लोगों से बात करो झगड़ा करो उसे लड़ाई करो लेकिन जैसे ही मैं झगड़ा लड़ने जाती थी वह लोग मेरी सेवा करके मुझे बिल्कुल ही चुप करवा देते थे लेकिन मेरा पति वहां बार-बार क्यों जाता था

 

 और फिर बहाने भी करता था अब मैंने सोच लिया था कि मुझे कुछ और ही सोचना होगा मुझे किसी तरह यह देखना होगा कि जब मेरा पति वहां जाता है तो क्या करता है क्योंकि एक तो वहां जाता है तो दो घंटे तक वहीं बैठ जाता था लेकिन यह काम किसी सीधे तरीके से होने वाला नहीं था मुझे एक प्लान की जरूरत थी मैंने यह अपने पति से कह दिया कि मुझे कुछ रुपयों की जरूरत है मैंने कोई सामान लेना है उसने कहा कि घर का सामान तो हम ले आए थे और कपड़े के तुम्हारे मेरी दुकान पर जाते हैं 

 

और कौन सा सामान लेना है मैंने कहा क्यों कपड़ों के अलावा और कोई चीज नहीं होती मैं दिल ही दिल में सोच रही थी कि आज मुझसे सवाल क्यों कर रहा है पहले तो मैं इससे पैसे मांगती थी तो फॉरेन पैसे निकाल कर मुझे दे देता था मैंने कहा कुछ पैसे चाहिए और भी चीजें होती हैं उसने कहा कि अभी मेरे पास पैसे नहीं है मैं हैरान रह गई कि पहली जैसा ही उसने मुझे इंकार किया था लेकिन जब शाम हुई तो मैंने अपने घर की छत से देखा कि वह सामने वाली औरत के घर बहुत सारा सामान लेकर जा रहा था

 

 और मुझे साथ वाली औरत ने बताया था कि यह तो किसी से सामान मंगाती है तो आड़ सट नहीं देती और तुम्हारे पति से भी अगर सामान मंगवाया है तो खुद से पैसे नहीं दिए होंगे मुझे बहुत गुस्सा आया कि मेरे पास मेरे पति के लिए पैसे नहीं थे और उनके लिए पैसे हैं और अब सामान लेकर जा रहा है और फिर मुझे इस बात पर यकीन था मैंने उससे पूछा सामने वाली थी तो उसने कह दिया कि नहीं कुछ नहीं मंगवाया था वह मुझसे क्यों कोई चीज मंगवाए मैं कोई उनका नौकर हूं

 

 सामने तो मार्केट है जहां से ले सकते हैं मैंने कहा फिर इतनी देर वहां बैठकर क्या करते रहते हो तो कहने लगा कि मैं तो कुछ भी नहीं करता तो वह बदल के लिए गया था और एक दफा उनको कोई मशवरा चाहिए था तो मैंने मशवरा दे दिया के मामला था ना बात थी मैंने कहा अच्छा दिल ही दिल में सोच रही थी कि तुम क्या खिचड़ी पका रहे हो उसके बारे में मुझे पता चल गया है मेरे पति का कपड़े पहनने का तरीका एक अलग सा ही था क्योंकि वह दुकानदार बंदा था

 

 वह सलवार सूट ही पहनता था और गले में एक गमछा भी डाल के रखता था जिससे वह गर्मी में अपना मुंह साफ कर लिया करता था कभी कभी उसी से अपना सर भी बांध लेता था मैंने सोच लिया कि मुझे कोई प्लान बनाना पड़ेगा एक दिन मेरे पति ने कहा कि आज मैं शहर से बाहर जा रहा हूं माल खरीदना है वह माल खरीदने के लिए अक्सर दूर ही जाया करता था उस दिन वह घर पर नहीं था और मैंने क्या किया कि उसके कपड़े में से ऐसे कपड़े निकाले

 

 जिसमें मैं उसके जैसी लगूं या नहीं ऐसा जोड़ा जो वह बार-बार पहनता था और सर पर टोपी पहन ली और गमछा के साथ अपना चेहरा छुपा लिया मेरा प्लान यह था कि मैं अपना चेहरा छुपाकर और अपने पति का होलिया बनाकर सामने वाली औरत के घर जाऊंगी और और मुझे पता चल जाएगा कि वहां पर मेरा पति क्या करता है और अगर बाद में उनको पता चल भी गया तो मुझे कोई परवाह नहीं मेरे कौन से अपने रिश्तेदार हैं कह दूंगी कि मैं तो मजाक कर रही थी

 

 मैंने ऐसा ही करना था लेकिन मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था और मैं थोड़ी परेशान भी हो रही थी सोचा कि साथ वाली पुष्पा को बता देती हूं वह मेरी थोड़ी मदद कर देगी हो सके तो उसे भी अपने साथ ले जाती हूं लेकिन जब पता किया तो पता चला घर पर नहीं थी यह सामने वाली औरत की बेटियां तो थी ही बड़ी अजीब सी इन्होंने अपनी खूबसूरती के जाल में सबको फंस के रखा था तो मेरे पति कौन से खेत की मूली था मेरे पति भी बहुत जल्दी फिसल जाने वालों में से था

 

 और इनको कोई शर्म नहीं थी अपनी बेटियों को ऐसे कहती थी कि जो मर्जी करो जिसको मर्जी अपनी बातों में लगाओ पटाओ और उससे पैसे लो घर के सामान मंगवा उतनी बुरी शिक्षा दे रही थी उनको ऐसी औरतें पूरे समाज में सबका नाम बर्बाद करती हैं और इनको जरा शर्म नहीं आई क्या मेरे पति को अपनी बातों में लगा लिया आज इन औरतों ने मेरे हाथ से बचाना नहीं था अगर मुझे पता चल जाता कि वहां पर कुछ फालतू हो रहा है कोई उल्टा सिद्धा काम हो रहा है तो मैंने किसी का भी लिहाज नहीं करना था 

 

जो मेरे दिल में आता मैंने बोल देना था मैं बहुत ज्यादा गुस्से में थी अकेले जाते हुए डर रही थी लेकिन अब मुझे अकेले ही जाना था कि उनके पुष्पा तो घर पर ही नहीं थी इसीलिए मुझे खुद ही जाना था काम थोड़ा मुश्किल था पर करना तो था ही तो मैं रात के समय घर में गई और अकल से काम लेते हुए मैंने ऐसा किया कि पहले से ही बिजली बंद कर दी ताकि वह लोग मुझ में पर ज्यादा ध्यान नहीं करें मैंने जैसे ही घर में पांव रखा तो आंटी जी ने कहा आ गया तू राकेश बेटा देख अचानक से बिजली को क्या हो गया

 

 आजा इधर मेरे पास बैठ जा मैं जाकर बैठी थी कि उसकी सारी बेटियां मेरे आसपास बैठ गई एक बेटी तो पैरों में बैठ गई और एक ने मेरा बाजू पकड़ लिया और फिर उसके बाद जो वहां पर हुआ वह देखकर तो मेरी आंखों में आंसू ही आ गए मुझे ऐसे लगने लगा कि जैसे मैं इस दुनिया की सबसे ज्यादा बुरी और सबसे ज्यादा गलत सोचने वाली औरत हूं और मेरे दिमाग में बहुत ज्यादा गंदगी भरी है क्योंकि जो मैंने सोचा था ऐसा कुछ भी नहीं था वह कहने लगी भैया भैया आपके लिए चाय लेकर आए हैं 

 

भैया आपने हमारा वह काम कर दिया क्या भैया आप कैसे हैं आरे आप आज इतनी कमजोर क्यों लग रहे हैं यह लाइट कैसे बंद हो गई उनकी जुबान तो भाई भाई बोलते हुए रुख ही नहीं रही थी मैंने बहाना किया कि एक मिनट में लाइट देखकर आता हूं और जल्दी-जल्दी उठकर वहां से घर आ गई मैं यह कैसे भूल गई कि इन्हें बेचार हों का कोई भाई नहीं था और इस औरत का कोई बेटा नहीं था इसीलिए शायद उन्होंने मेरे पति को ही अपना बेटा और भाई समझ लिया था वरना वह ऐसा क्यों कहती मैं वापस नहीं गई वह लोग मुझे बुलाने के लिए आई और कहा कि राकेश भैया है

 

 तो मैंने कहा कि नहीं वह घर पर नहीं है पहले थे लेकिन चले गए हैं कहने लगी पता नहीं दीदी क्या हुआ है लाइट खराब हो गई मैंने कहा कि ठीक हो जाएगी फिर मैंने खुद ही जाकर लाइट का बटन भी ठीक कर दिया लेकिन मुझे बहुत बुरा लग रहा था इसीलिए जब मेरा पति घर पर आया तो मैंने उसको सब कुछ बता दिया रोना शुरू कर दिया वह भी हैरान रह गया उसने कहा कि नीतू मुझे नहीं पता था कि तुम इतना ज्यादा सोचोगे लेकिन उन्होंने मुझे अपना भाई बना लिया 

 

क्योंकि उनका कोई भाई नहीं था वह सब बहुत अच्छी हैं मैं तो सिर्फ उनकी मदद कर रहा था उनके घर के काम कर लेता था उनको कोई चीज लेकर दे देता था और मेरी दुकान से भी बोलो काफी सामान ले रही थी उनकी बड़ी बेटी की शादी होने वाली है इसीलिए आंटी मुझसे मशवरा करती थी मुझे नहीं पता था कि तुम इतनी परेशान थी अगर तुम्हें ज्यादा परेशान थी तो तुम्हें मुझसे बात करनी चाहिए थी ना मैंने कहा जहां लेकिन मैंने पुष्पा से बात की थी और पुष्पा ने तो मुझे इन्हें लोगों के बारे में बहुत गलत बताया था बाद में एक ऐसी बात पता चली जब मैं भी हैरान रह गई

 

 क्योंकि कुछ पा ने अपने भाई के लिए इनकी बड़ी बेटी का रिश्ता मांगा था लेकिन इन्हें लोगों ने मना कर दिया था क्यों क्योंकि पुष्पा का भाई शराबी था तब से वह उनकी दुश्मन हो गई थी और उनको पूरे मोहल्ले में बदनाम करती फिर रही थी यह सुनकर तो मैं हैरान रह गई मेरे पति ने ठीक कहा था कि वह अच्छी नहीं है उसने पहले दिन ही कुछ बातें देख ली थी मैं तो इसे सोचती थी कि मेरा पति उसे बुरा कह रहे हैं लेकिन सचमुच बुरी थी जो किसी की बेटियों को इस तरह से बदनाम कर रही थी 

 

अच्छी कैसे हो सकती थी वह लड़कियां बहुत अच्छी थी तभी तो जब मैं चाहती थी तो वह मेरी इतनी सेवा करती थी अगर वह मेरे पति के साथ बुरी होती तो फिर मेरी इतनी सेवा क्यों करती उसके बाद ही रक्षा बंधन आया उन सब ने मेरे पति को राखी बांधी और मेरे पति ने उन सबको तोहफा भी दिया था उसके बाद से हम लोग एक परिवार की तरह रहते थे आहिस्ता आहिस्ता उनकी शादियां भी होने लगी शादीपुर मेरे सारा माल सामान मेरे पति की दुकान से ही लिया था

 

 इस तरह हमें फायदा भी हो रहा था और उन लोगों को भी हमारा फायदा था इसके बाद भी हमें उन लोगों से कोई मसला नहीं हुआ जब मेरे यहां संतान हुई तो आंटी जी ने बहुत ख्याल किया उन्होंने ही बच्चे को संभाला मैं तो इतनी ज्यादा बीमार हो गई थी कि मुझसे उठा नहीं जा रहा था अगर आंटी जी और उनकी बेटियां नहीं होती तो पता नहीं मेरा क्या होता अपने भी साथ छोड़ गए 

 

लेकिन परायो ने साथ दिया मेरे घर को साफ किया मेरे पति के लिए खाना बनाया मेरे बच्चे का ख्याल किया मेरा ख्याल किया आंटी जी के पास बड़े-बड़े नुस्खे थे उन्होंने मुझे इतना प्रेम दिया इतना ख्याल किया कि मैं बहुत जल्दी ठीक हो गई अगर मेरी मन होती तो शायद वह भी इसी तरह मेरा ख्याल रखती पुष्पा के साथ मैंने दोबारा कोई दोस्ती यारी नहीं रखी बस दूर से ही हेलो है कर लेती थी उसको भी पता चला चल गया था कि मुझे पता चल गया है कि वह क्या सोचती है 

 

और वह मेरे जरीन लोगों को नुकसान पहुंचाना चाहती थी यह तो शुक्र है कि मेरे पति ने मुझे सारी बात बता दी आप लोग बताओ कि क्या आप लोगों के साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि जिसके बारे में जो सोचा होगा वैसा ना निकला हो हां हां यह समाज बहुत बुरा है यहां पर लोग बहुत बुरे हैं लेकिन यह किसने कहा था सारा समाज ही बुरा है हर कोई बुरा नहीं होता कुछ लोग अच्छे भी होते हैं और अगर आपने किसी के साथ बुरा नहीं किया तो आपके साथ बुरा नहीं होता 

 

भगवान आप सभी लोगों को हमेशा खुश रखे अपनी कहानी सुनाने का यही मकसद था मेरा कि आप लोग भी इस बात को समझे कि कभी-कभी आपको देखा भी गलत होता है कुछ लोग आपके लिए अच्छे होते हैं और कुछ लोग बहुत बुरे होते हैं 

 

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