अहोई अष्टमी व्रत कथा। Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF Free Download

Download Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF ( अहोई अष्टमी व्रत कथा) , the link is given below the article. You can also read the Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF online or download it on your mobile.

अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन मनाया जाता है। ये व्रत माताएं अपने संतान की दीर्घ आयु के लिए रखती हैं। इस लेख में आपको अहोई अष्टमी व्रत कथा के बारे में पूरी जानकारी मिलने वाली है तो आप लोग इस आर्टिकल को अंत तक ज़रूर पढ़े। तथा Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF का लिंक निचे मिल जायेगा जहा से आप इस पीडीऍफ़ को डाउनलोड भी कर सकते हैं।

Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF Overview

PDF NameAhoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF
No. Of Pages7
PDF SizeMultiple Source
LanguageHindi
PDF CategoryReligious
PDF CreditMultiple Sourse
DownloadAvailable

Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF Download Link

Ahoi Ashtami Vrat Katha /अहोई अष्टमी व्रत कथा

अहोई अष्टमी का त्यौहार अधिकतर उत्तरी भारत में मनाया जाता है ये करवा चौध से 4 दिन बाद और दिवाली से 8 दिन पहले मनाया जाता ही मनाया जाता है। अहोई अष्टमी का त्यौहार माताएं अपने पुत्र की भलाई और दीर्घ उम्र के लिए मनाती हैं। इसमें सुबह (भोर ) से लेकर शाम तक (सांझ ) तक उपवास रखा जाता है।

सांझ के समय माताएं आकाश में तारे देख कर उपवास को तोड़ती हैं जबकि कुछ माताए चन्द्रमा दर्शन के बाद उपवास को तोड़ती हैं। लेकिन उस समय क्युकी चन्द्रमा भी देर से निकलना है तो इसका इंतज़ार करना थोड़ा कठिन होता है। Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF का लिंक ऊपर दिया गया है इसे आप अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लें।

अहोई अष्टमी व्रत कथा की कहानी / Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF

एक पुराणी मान्यता के अनुसार एक नगर में एक साहूकार, उसकी पत्नी और उसके सात बच्चे रहा करते थे। एक दिन साहूकार की पत्नी घर लीपने के लिए मिटटी लेने कुदाल लेकर एक खदान में जाती है। वह उस जगह कुदाल चला कर मिटटी निकलने लगती है तभी कुदाल चलाने के कारण एक सेह (शाही ) के बच्चे को लग जाती है। और वह सेह का बच्चा मर जाता है।

तब साहूकार की पत्नी को इसका बहुत दुःख होता है और वह बहुत ही अधिक पछताती हुए वापस घर आ गई। फिर कुछ दिनों बाद उसके एक बीटा बीमार होता है और उसकी मृत्यु हो जाती है , उसके बाद दूसरे ,तीसरा यहां तक की एक एक करके सातों बेटों की मौत हो जाती है।

अपने बेटों के जाने के बाद महिला बहुत दुखी होती है और अपने आसपास की महिलाओं से बात करते हुए बताती है उसने जानबूझकर कभी कोई पाप नहीं किया लेकिन एक बार खदान में मिट्टी खोदते समय अनजाने में उससे एक से एक बच्चे की मौत हो गई थी उसके बाद से ही मेरे सारे पुत्रों की मौत हुई 

उसके बाद आसपास की औरतों ने साहूकार की पत्नी को बताया कि यह उसी से की शराब कारण हुआ है और सलाह दी कि तुम उसी अष्टमी को भगवान पर्वती की शरण लेकर से और 6 के बच्चों की आराधना करो उनसे क्षमा याचना करो हो सकता है भगवान तुम्हारे सारे पापों का नष्ट कर दे.

साहूकार की पत्नी ने वैसा ही किया कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उपवास और पूजा अर्चना की. जिसके बाद उसे पुनः सात पुत्रों की प्राप्ति हुई इसी कारण यह त्यौहार हर वर्ष मनाया जाने लगा ताकि पुत्रों की भलाई और उनके दीर्घायु पर ही रहे 

अहोई अष्टमी की पूजन विधि-

– इस दिन सभी माताएं को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और व्रत रखने का संकल्प करना चाहिए,

– इसके बाद अहोई माता की पूजा अर्चना के लिए दीवाल पर आवरी माता का चित्र बनाना चाहिए और अगर दीवाना बनाना चाहे तो आपका वक्त पर भी उनका चित्र बनाकर इनकी पूजा-अर्चना कर सकते हैं

– अहोई माता की पूजा अर्चना शाम के समय शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए

– इस दिन माताएं अपने बच्चों के लिए निर्जला व्रत रखती हैं इसके लिए शाम को या प्रदोष काल में इनकी पूजा की जानी चाहिए

– फिर शाम को मां को फल फूल और मिठाई का भोग लगाया जाता है फिर तारों को करवे से अर्ध्य किया जाता है

– व्रत का समापन रात में किया जाता है फिर अहोई माता की व्रत कथा सुनाई जाती है

– इसके बाद अन्य जल ग्रहण किया जाता है

अहोई अष्टमी माता की आरती / Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF

जय अहोई माता, जय अहोई माता ।

तुमको निसदिन ध्यावतहर विष्णु विधाता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमलातू ही है जगमाता ।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावतनारद ऋषि गाता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

माता रूप निरंजनसुख-सम्पत्ति दाता ।

जो कोई तुमको ध्यावतनित मंगल पाता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता ।

कर्म-प्रभाव प्रकाशकजगनिधि से त्राता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

जिस घर थारो वासावाहि में गुण आता ।

कर न सके सोई कर लेमन नहीं धड़काता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

तुम बिन सुख न होवेन कोई पुत्र पाता ।

खान-पान का वैभवतुम बिन नहीं आता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

शुभ गुण सुंदर युक्ताक्षीर निधि जाता ।

रतन चतुर्दश तोकूकोई नहीं पाता ॥

॥ जय अहोई माता..॥

श्री अहोई माँ की आरतीजो कोई गाता ।

उर उमंग अति उपजेपाप उतर जाता ॥

जय अहोई माता, जय अहोई माता ।

Conclusion :

दोस्तों आज के लेख में आपको अहोई अष्टमी व्रत के बारे में सारी जानकारी दे दी गई है। तथा Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF का लिंक भी ऊपर दिया गया है जिसे आप आसानी से अपनी मोबाइल में डाउनलोड कर के सुरक्षित रख सकते हैं।

तथा यदि आपको ये आर्टिकल अच्छा लगा हो तो इसे आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी अवश्य शेयर कर दें ताकि वह भी इसका लाभ उठा सके। धन्यवाद

FAQs –

1 – अहोई अष्टमी व्रत कथा क्या है?

Ans- अहोई अष्टमी व्रत कथा माताओं द्वारा अपने बच्चों की भलाई और लंबी उम्र के लिए मनाया जाता है। यह व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन मनाया जाता है।

2 – अहोई अष्टमी व्रत कथा का महत्व क्या है?

Ans – एक मान्यता के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत रखने से माताओ के पुत्रो की सुरक्षा , भलाई और दीर्घ आयु प्राप्त होती है। इस दिन माताएं सुबह से शाम तक निर्जल उपवास करती हैं और अहोई अष्टमी व्रत कथा सुनती या सुनाती हैं,

3 – अहोई अष्टमी व्रत कथा कैसे मनाया जाता है?

Ans – अहोई अष्टमी के दिन माताएं भोर में जल्दी उठती हैं, तथा अपने आपको स्वच्छ करने के लिए स्नान करती हैं और पूरे दिन कठोर उपवास रखती हैं। इस दौरान वे देवी अहोई माता की पूजा करते हैं और अपने बच्चों की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं। शाम को तारे देखकर अपना व्रत खोलते हैं

4 – अहोई अष्टमी व्रत कथा की कहानी क्या है?

Ans – अहोई अष्टमी व्रत कथा एकसाहूकार की पत्नी  की कहानी है जिसने अपने घर के नवीनीकरण के लिए मिट्टी खोदते समय गलती से एक सेह के बच्चे को लग जाती है और वह मर जाता है । जिसके बाद उसके  सात पुत्रो की मृत्यु हो जाती है। फिर वह  अहोई  माता की पूजा करि है और फिर उसे सात पुत्रो की प्राप्ति होती है

5 – Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF कहा से मिलेगा ?

Ans – Ahoi Ashtami Vrat Katha in Hindi PDF का लिंक आपको www.pdfsewa.in वेबसाइट से मिल जायेगा जहां से आप इसे फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।

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