Motivational Kahani In Hindi | Hindi kahani Moral | Sad Story In Hindi

Motivational Kahani In Hindi : आज फिर मैं चुपके से अपने मालिक और मालकिन को देख रही थी मालकिन के पति मालकिन के लिए गजरे लेकर आए थे और वह बहुत प्यार से मालकिन को पहना रहे थे बहुत सारे तोहफे और मालकिन के पसंद का खाना भी लेकर आए थे मैं हसरत से छुपकर उन दोनों को देख रही थी मैं सोच रही थी काश मालिक जैसे किसी इंसान से मेरी भी शादी हो जाए लेकिन ख्वाहिशें कहां पूरी होती हैं

 उसी वक्त मुझे मालकिन ने देख लिया मैं एकदम डर कर पीछे हो गई कि कहीं मालकिन मुझे डांटे नहीं इस तरह छुपकर उन्हें देखने पर और फिर मैं वहां से भागकर अपने कमरे में आ गई और सोने की कोशिश करने लगी लेकिन नींद तो मुझसे बहुत दूर थी पूरी रात में यही सोचती रही कि मालकिन कितनी खुशकिस्मत है या फिर शायद सारे अमीर लोग ऐसे ही होते हैं उनके पास पैसे होते हैं और वह अपने आप से प्यार करने वालों पर खर्च करते हैं और एक हम हैं जो रात दिन मेहनत करके कमाना पड़ता है 

और फिर जरूरतें तो पूरी हो जाती हैं लेकिन ख्वाहिश अधूरी रह जाती है लेकिन इतना पैसा होने के बाद भी उनमें बिल्कुल भी गुरूर नहीं था उनका व्यवहार बहुत मीठा और अच्छा था वह अपना व्यवहार हर किसी के साथ अच्छा ही रखती थी लेकिन हकीकत यह थी कि वक्त गुजरने के साथ मुझे मालकिन के शोहर से प्यार हो गया जबकि मैं बहुत छोटी थी और वो मुझसे उम्र में बहुत बड़े थे 

लेकिन मैं कभी भी इस बात का इजहार नहीं कर सकी और ना ही बता सकूंगी यह सब सोचते सोचते मेरी आंख लग गई रोज की तरह मेरी आंख 5:00 बजे खुल गई नमाज पढ़ने के बाद मुझे एहसास हुआ कि मुझे भूख लग रही है और मैं फिर कमरे से बाहर निकलकर किचन में चली गई और कुछ खाने के लिए ढूंढने लगी तो एकदम मुझे याद आया कि मालकिन के पति बाहर से रात खाना लेकर आए थे जाहिर सी बात है वह पड़ा होगा मैं खा लेती हूं खाना खाने के बाद मैंने थोड़ा इंतजार किया

 और फिर सफाई करना शुरू कर दिया सफाई करने के बाद मालकिन और उनके शौहर के लिए नाश्ता बनाने लगी यही मेरा रोज का रूटीन था और जब मालिक काम पर चले जाते तब मैं कमरे से निकलकर बर्तन धोती और फिर मालकिन का कमरा साफ करती आज जब मैं मालिक के जाने के बाद मालकिन का कमरा साफ करने गई तो मालकिन मुझसे मुस्कुरा कर बोलने लगी कि रात को मैंने तुम्हें देखा था तुम हमें छुप-छुप कर देख रही थी मेरी तो सांस बंद होने लगी 

 

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पता नहीं मालकिन क्या सोच रही होंगी मैं ही पागल थी जो इस तरह भूतों की तरह उन्हें देखने लग जाती थी मैं कुछ बोलने ही वाली थी इतने में मालकिन दोबारा पूछने लगी कि मैं तुमसे कुछ पूछ रही हूं फिर मैंने उन्हें जवाब दिया नहीं मालकिन मैं तो बस वैसे ही फिर फिर मालकिन बीच में मेरी बात काटकर कहने लगी अच्छा छोड़ो मैं चाहती हूं कि तुम मेरे शौहर से शादी कर लो लेकिन उससे पहले मैं तुम्हें उठने बैठने की तमीज सिखाऊंगा से बोलना सिखाऊंगा

 मालकिन की यह बात सुनकर पहले तो मैं बहुत परेशान हुई मैंने इंकार कर दिया कि मालिक नहीं मानेंगे मालकिन कहने लगी कि यह तो मेरा काम है मैं उनको मना लूंगी तुम अपना बताओ तुम करोगी मेरे शौहर से शादी फिर मैं सोचने लगी कि जब मैं मालिक से प्यार करती हूं तो मना करने का क्या मतलब निकलता है इसलिए मैं एकदम से मान गई मेरी तो खुशियां आसमानों पर पहुंच गई थी

 अभी रात ही तो मुझे इस चीज की ख्वाहिश थी और सुबह उस इंसान को मेरी तकदीर में लिख दिया गया था मैं बहुत खुश थी कि मेरी किस्मत बदलने वाली है जिंदगी बदलने वाली थी मेरा स्टेटस मेरा सब कुछ बदलने वाला था लोग मेरी भी वैसी ही इज्जत करते लेकिन इस सब के लिए पहले मुझे खुद पर म मेनत करनी थी इसलिए मैं रोज मालकिन के पास जाती और वह मुझे अच्छे और तमीज से बात करना सिखाती

 फिर वह मुझे डेली अच्छे और नए कपड़े लाकर देती उनको पहनने और ओड़ने का तरीका सिखाती फैशन सिखाने लगी और तो और काम वाली भी उन्होंने नहीं रख ली मुझे तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि मालकिन आखिर यह सब क्यों कर रही है लेकिन छोड़ो मुझे उनसे क्या और ना ही मैं उनसे यह सब कुछ पूछ सकती थी क्योंकि जो मैं मेहरबानी वह मुझ पर कर रही है मेरे लिए यही काफी था ऐसे ही रोज मालकिन मुझ पर इतनी ही मेहनत करती वह मुझे जो भी जैसे जैसे सिखाती जल्दी तो नहीं लेकिन मैं सीख लेती यूं ही समय बीता जा रहा था

 और मालकिन ने अपने शौहर को भी शादी के लिए मना लिया था पहले तो मालिक इंकार करते रहे कि नहीं मेरे लिए तो तुम ही काफी हो क्यों मैं दूसरी शादी करूं लेकिन मालकिन कहने लगी कि उसका कोई नहीं है इस दुनिया में और उसका भी पूरा हक है खुलकर जिंदगी गुजारने का और भी पता नहीं क्या-क्या कहकर उन्होंने उनको शादी के लिए मना लिया और फिर कुछ दिनों बाद मालकिन ने हमारी शादी करवा दी अब वह मेरा बहुत ख्याल रखती मेरी खिदमत करती मेरी हैसियत मेरा मुकाम सब कुछ बदल गया था

 इसी खुशी में मैं महसूस ही नहीं कर सकी कि घर में कुछ गलत चल रहा है लेकिन कभी-कभार मुझे शक होता कि मालिक और मालकिन की बहस हो रही होती लेकिन मैं जैसे ही उस कमरे की तरफ जाती वहां पर खामोशी छा जाती और फिर मैं खामोशी से वापस आ जाती एक दिन जब मैं उनके कमरे में गई तो वह फोन पर बातें करते हुए कमरे के चक्कर लगा रही थी और साथ में कह रही थी कि आप टेंशन ना ले आपका माल पहुंच जाएगा और फिर जैसे ही वह मेरी तरफ पलटे तो उनके चेहरे का रंग उड़ गया

 और फिर वह कहने लगी कि मैं आपसे बाद में बात करती हूं मैंने उनसे पूछा तो कहने लगी कि दोस्त को पैसों की जरूरत है है तो ऐसे ही कह रही थी कि पैसे पहुंच जाएंगे वैसे मुझे उनकी बात पर यकीन तो नहीं आया लेकिन फिर भी मैं खामोशी से अपने कमरे में वापस आ गई मुझे लगा वह शायद शोहर को धोखा दे रही है लेकिन उन दोनों में तो बहुत प्यार है हो सकता है कि मेरा ही वहम हो मुझे कुछ भी बोलने की जरूरत ही नहीं ऐसे ही हमारे दिन गुजरे जा रहे थे 

एक दिन मालकिन ने अपने पार्लर वाली को बुला लिया और कहने लगी कि तुम्हें तैयार करवाऊंगी तो तुम्हारे और ज्यादा लुक्स निकल कर आएंगे और तुम फ्रेश भी लगोगी मैं तो खुश हो गई क्योंकि आज तक मैंने अपनी जिंदगी में पार्लर कभी नहीं देखा था और कभी मैं ऐसे तैयार भी नहीं होती थी और मैं फिर पार्लर वाली के सामने जाकर बैठ गई मुझे देखते ही वो एकदम खड़ी हो गई और मालकिन से कहने लगी कि यह तो पहले ही बहुत खूबसूरत है और मैं इसको क्या सजाऊंगी भला 

लेकिन मैं आपसे यह जरूर कहूंगी कि यह बहुत मासूम सी है आप इस पर यह जुल्म ना करें उसकी बात सुनकर मैं डर गई कि कैसा जुल्म भला और मालकिन के पास जाकर पूछने लगी कि यह क्या कह रही है कौन सा जुर्म करवाने लगी है आप मुझ पर तो मालकिन मुझसे कहने लगी कि इसको तो फालतू बोलने की आदत है तुम टेंशन ना लो एकदम सुंदर लगोगी तैयार होकर इसलिए कह रही है कि तुम्हें तैयार करवाकर तुम्हारे शौहर पर जुल्म ना करें और तुम अपनी जुबान बंद करके काम करो 

मालकिन की बात सुनकर मुझे कुछ तसल्ली नहीं हुई लेकिन मैं चुप हो गई और फिर एंड में वह पार्लर वाली को सही करके कमरे से चली गई मालकिन के बाहर जाते ही मैं एकदम उस पार्लर वाली के पास गई और उससे पूछने लगी कि तुम बताओ कि तुम क्या कहना चाह रही हो और फिर उसने ऐसी बात बताई कि मैं तो हैरत में रह गई और मैं डर की वजह से भागने लगी लेकिन मालकिन ने मेरा ताल्लुक गरीब घराने से था शुरू से ही हमने गरीबी में अपनी जिंदगी गुजारी थी अम्मी और अब्बू रंग में थोड़े सांवले थे

 जबकि मेरा रंग बहुत खिला-खिला था देखने वाला कभी सोच ही नहीं सकता कि मैं ऐसे घराने से हूं और मेरी सूरत शक्ल भी अम्मी अब्बू से बहुत अलग थी मोहल्ले वाले तो कहते थे कि तुम उनकी बेटी लगती ही नहीं हो ऐसा लगता है कि कहीं से चुरा कर लाए हैं और मैं अपनी तारीफ सुनकर हंस पड़ती थी मेरे अम्मी और अब्बू दोनों बीमार थे लेकिन फिर भी मेरे अब्बू ने मुझे 12वीं तक पढ़ाया था मेरे अब्बू फलों का ठेला लगाते थे और मेरी अम्मी लोगों के घरों में काम किया करती थी 

जब मैं दोनों को इस तरह मेहनत करते हुए देखती थी तब मुझे एहसास होता था कि मेरे अम्मी पापा मेरे लिए कितनी मेहनत करते हैं मुझे भी उनकी मेहनत का सिला देना था इसलिए मैं बहुत दिल लगाकर पढ़ती थी लोग तो मुझे बहुत बातें भी सुनाते थे कि इस गर्मी में तुम्हारा बाप तुम्हारे लिए कमा कर ला रहा है अगर उसे कुछ हो गया तो तुम दोनों मां बेटी बैठे ही रह जाओगी उनकी यह बात सुनकर मुझ मुझे बहुत डर लगता और जैसे ही मेरे 12वीं के एग्जाम होने लगे उससे दो महीने पहले मेरे पापा का इंतकाल हो गया 

लोगों का कहा सच हो गया था मुझे इस सब में कहीं ना कहीं अपनी ही गलती नजर आ रही थी कि काश मेरे पापा मेरी पढ़ाई का बोझ ना लेते तो आज यह सब ना हुआ होता अब्बू के इंतकाल ने मुझे और मेरी मां को तोड़कर रख दिया था लेकिन फिर भी मैं 12वीं के एग्जाम देने जाती कि अब्बू का ख्वाब पूरा कर सकूं अम्मी की तबीयत खराब रहने लगी थी इसलिए अम्मी की नौकरी भी छूट गई थी घर में फाके होने लगे थे

 इसलिए 12वीं के बाद आगे की पढ़ाई का फैसला छोड़कर मैंने भी अपनी अम्मी का काम अपनाया और लोगों के घरों में काम करना शुरू कर दिया सारा दिन मैं लोगों के घरों में काम करती रहती जब अम्मी की तबीयत ठीक हुई तो उसके बाद भी मैंने अम्मी को काम करने नहीं दिया बल्कि खुद यही काम करती रही ऐसे ही हमारी जिंदगी गुजर रही थी इज्जत से दो वक्त की रोटी खाई जाती यही का का था हमारे लिए एक दिन यूं ही मैं और मेरी सहेली बैठे हुए थे तो वह कहने लगी कि मैं एक औरत को जानती हूं

 जो बहुत ज्यादा अमीर है और उसका घर भी बहुत बड़ा है उसे काम करवाने के लिए एक नौकरानी की जरूरत है तू जाकर ट्राई कर मुझे लगता है कि तुझे काम मिल जाएगा और अच्छी सैलरी भी होगी उसकी बात सुनकर मैं बहुत खुश हो गई और औरत का एड्रेस लेकर उसके घर आ गई मैंने अम्मी को बताया था तो वह कहने लगी कि कर ले जहां पर तुझे आसानी लगे मैं दूसरे दिन उस औरत के पास गई 

और उसे अपनी सारी कहानी बताई और मैं उनसे रिक्वेस्ट करने लगी कि मुझे काम पर रख लो और उनको मुझ पर रहम आ गया और उन्होंने मुझे काम पर रख लिया सुबह 9:00 बजे से काम पर जाती और शाम के 6:00 बजे काम से वापस आ जाती थी टोटल चार बंगलों में मैं उस वक्त काम किया करती थी बारी-बारी सबके घर जाती और काम के दौरान उनकी कीमती चीजें भी वहां से उठाकर लाती मेरी अम्मी मुझे बहुत डांट ती कि यह तू क्या काम करती है सारी जिंदगी मैंने इज्जत से तुझे खिलाया है 

और अब तू इस तरह की चोरियां करने लगी खुद के साथ मेरी इज्जत भी दांव पर लगाएगी और मैं बस यही कहकर टाल देती कि अम्मी तुम क्या जानो अमीरों के चस्के अम्मी बस अफसोस में सर हिलाती रहती और मेरा यही रूटीन बन गया था और धीरे-धीरे मेरी अम्मी की तबीयत खराब रहने लगी एक दिन वह भी मुझे इस जालिम समाज में अकेला छोड़कर चली गई अम्मी के जाने के बाद मेरे लिए हालात का मुकाबला करना बहुत मुश्किल हो गया था घर आती तो सन्नाटा होता

 और फिर मेरा घर आने का दिल ही नहीं करता इसलिए मैं जिस-जिस बंगले में काम करती थी उनकी मालकिन से कहने लगी और दरख्वास्त करने लगी कि मुझे यहां पर रहने की इजाजत दे दें मेरा इस दुनिया में अब कोई भी नहीं रहा मुझे उम्मीद थी कि उनमें से कोई एक तो मान ही जाता और वही हुआ जिस औरत का मुझे मेरी दोस्त ने बताया था वह औरत मान गई मुझे अपने घर में रखने पर अब मैं उन्हीं के घर में रहा करती थी

 और उनके सारे काम किया करती थी खाना बनाती नाश्ता सफाई बर्तन धोना और रोटियां बनाक देना सब के सब काम मेरे हवाले थे मेरी मालकिन बहुत अच्छी थी वह मेरी हर जरूरत को पूरा करती थी उनकी जितनी भी अच्छाई करूं उतनी ही कम है मेरी मालकिन और उनके शौहर में बहुत ज्यादा प्यार था रोज घूमने जाते और डिनर करते मालिक रोज नए तोहफे उन्हें लाकर देते वो बहुत खुश होती 

और उन्हें खुश देखकर मैं भी खुश हो जाती थी शुरू शुरू में तो यह सब चलता रहा लेकिन धीरे-धीरे मुझ में जलन पैदा होने लगी कि मालकिन का पति उनसे कितना प्यार करता है रोज नई-नई महंगी महंगी चीजें लाकर देता है और उनको देखकर मेरा दिल भी चाहता कि मेरे पास भी यह सब चीजें हो और मैं सफाई के दौरान वहां से भी कीमती चीजें चुरा लेती और अपने कमरे में जाकर एक बैग में रख देती थी ताकि मुझे कभी यहां से जाना पड़ जाए तो मेरे पास थोड़ा बहुत तो माल हो मेरा मानना था कि उनके घर में बहुत ज्यादा चीजें थी

 उनमें से कोई एक दो ले भी लूं तो उन्हें क्या पता चलेगा और कौन सी उनकी शान में कोई कमी आ जाएगी इसी तरह मैं इधर जिंदगी गुजार रही थी एक दिन मेरी नजर मालकिन की सबसे कीमती चीज मतलब कि उनके शोहर पर मेरा दिल आ गया मुझे किसी भी तरह उन्हें हासिल करना था लेकिन मुझ में यह सब मालकिन या मालिक से कहने की हिम्मत नहीं थी इसलिए चुप रहती एक दिन मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा

 जब मेरी मालकिन ने मेरी शादी अपने शौहर से करवा दी अब वह मेरी बहुत खिदमत करती मेरा बहुत ख्याल रखती मुझे कहती कि तुम मेरी बहन की तरह हो और मैं उनकी बात मान लेती मेरी भी हैसियत बदल गई मेरा भी नसीब बदल गया था मुझे बहुत खुशी थी इतनी कि जिसका कोई हिसाब नहीं इतनी खुशी कि मैं यह महसूस नहीं कर सकी कि घर में क्या चल रहा है मेरे साथ कुछ गलत होगा फिर एक दिन जब मालकिन के पार्लर वाली आई तो मुझे देखते ही कहने लगी कि इन पर यह जुल्म मत करना

 उसकी बात सुनकर मैं डर गई और मालकिन के जाते ही मैं उससे छुपकर पूछने लगी कि कैसा जुल्म लेकिन जो उसने मुझे बताया वह सुनकर मेरे होश उड़ गए उसने बताया कि यह लोग तुम्हें तैयार करवाकर यहां से आगे बेज देंगे कोठे पर यह इनका काम है उसकी बात सुनते ही मेरी टांगे कांपने लगी और मैं वहां से भागने हील लगी थी कि मालकिन ने मुझे पकड़ लिया मुझ पर जुल्म करने लगी और कहने लगी कि इतनी मेहनत से यहां तक लेकर आई हूं तुझे तेरा स्टेटस तेरा सब कुछ बदला 

ताकि तू आगे जाकर मेरा काम कर सके लेकिन तू तो यहां से ही फरार होने लगी ऐसे तो नहीं जाने दूंगी तुझे और तू पार्लर वाली मालकिन बेरुखी से कहने लगी कि तुझ में इतनी हिम्मत तू यहां मेरे खिलाफ काम करेगी तुझे बहुत हमदर्दी जाग रही है और फिर अपने शोहर को बुलाकर कहती कि तेरी चिड़िया के पर लग गए हैं कि इसके परों को अब कट ही जाना चाहिए हमारे लिए यही बेहतर है और वह हंसने लगा मैं बहुत बेबाकी से उन्हें देख रही थी

 और वह मुझे देखने लगे कि तुझे क्या लगा हम दोनों मियां बीवी हैं अरे पागल हम तो तुझ जैसी हसीनाओं को यहां लाकर ऐसे ही फंसाते हैं और फिर उन्हें कोठे पर बेच देते हैं ताकि तुम लोगों की जिंदगी बन जाए और हमारा भी काम हो जाए उनकी बातें सुनकर लगातार आंख से आंसू बह रहे थे मैं खुद ही यकीन नहीं कर पा रही थी कि किस तरह चालाकी से इन दोनों ने मुझ पर घेरा डाला और मुझे फंसाया था

 अपने जाल में मैं इतनी हैरान थी और मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है मैं अपनी जुबान से एक अल्फाज भी नहीं निकाल पाई मैंने बस इतना ही कहा कि और वह निकाह यह सुनकर वह दोनों हंसने लगे और कहने लगे कि वह भी झूठा ही था यहां पर हर महीने नई लड़की आती है तो क्या उन सब से निकाह करने बैठ जाऊं हम दोनों तो पार्टनरशिप से यहां पर काम कर रहे हैं और लोगों को फंसाते हैं और फिर वह दोनों एक दूसरे को देखकर हंसने लगे मुझे बहुत ज्यादा नफरत हो रही थी 

खुद से अपनी बेवकूफी पर अमीर होने के लालच में मैं कहां पर आकर फंस गई थी और मैं रोती रही और फिर वह पार्लर वाली भी मेरी वजह से उनका निशाना बन गई फिर मालकिन हम दोनों को घसीट कर गाड़ी में ले गई और मैं उनसे कह रही थी कि मुझे छोड़ दो लेकिन वह दोनों बहरे बने हुए थे और वह पार्लर वाली तो ऐसा लग रहा था जैसे किसी बड़े सदमे में जा पहुंची हो और फिर वह गाड़ी अपनी मंजिल पर जा पहुंची

 एक खूबसूरत सा बंगला था जहां पर बहुत सारी रंग बिरंगी लाइट थी बाहर से देखने में जितना प्यारा था अंदर उतने ही भयानक काम होते थे वहां पर मेरी टांगे डर की वजह से कांप रही थी तभी कुछ लोग आए और हमें अंदर ले गए और फिर हमें अंदर ले जाते ही बोला गया कि आज रात महफिल सजाई जाए आज तुम लोगों में दो लोग और बढ़ गए हैं वह हंसने लगी और हमें कमरे में ले गई मैं नहीं जा रही थी मुझे नहीं पता था कि बाहर क्या हो रहा है और क्या नहीं लेकिन लगातार गाने बजने की आवाज आ रही थी

 पार्लर वाली मेरे साथ ही बैठी थी मैं उसे हिलाने लगी कि तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही हो कि मैं बहुत ज्यादा शर्मिंदा हूं क्योंकि मेरी वजह से तुम्हें भी यहां पर आना पड़ा अब हम दोनों क्या करेंगे मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे और वह खामोश बैठी थी और फटी फटी आंखों से कभी मुझे देखती तो कभी कमरे को देखती और फिर कहने लगी कि आज से 3 साल पहले मैंने अपनी दोस्त को यहां पर भेजा था पैसों के लालच में वह यतीम थी और वह बहुत रो रही थी कह रही थी कि मेरे घर मेरी मां इंतजार कर रही है

 मुझे जाने दो लेकिन मैं कठोर बनी रही और कुछ पैसों के खातिर मैंने उसे बेच दिया और फिर फिर जब उसकी अम्मी को पता चला तो वह यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी और वह इंतकाल कर गई यह सब मेरी दोस्त की बददुआ की वजह से ही हुआ है रब मुझसे उसके साथ बुरा करने का बदला ले रहा है पार्लर वाली की बातें सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हुए थे कि क्या दोस्त ऐसी भी हो सकती है लेकिन मेरी दोस्त ने भी कुछ ऐसा ही किया था यह जानते हुए कि वो औरत गलत काम करती है फिर भी उसने इधर मुझे काम करने के लिए भेजा

 मेरी आंखों के आंसू कभी नहीं रुकते मैं ऐसी दलदल में फंस चुकी थी कि जिससे मैं कभी यहां से नहीं निकल सकती और मेरे साथ में वह पार्लर वाली भी लगातार रो रही थी जब अगले दिन हमें वहां से निकाला और जब कुछ कोठे वाले मेरे पास आए तो वह डरने लगी अब मैं अपने रब से बस इतना ही कह रही थी कि मुझे बचा ले मुझे यहां से निकाल दे लेकिन वहां पर बातें होने लगी कि बड़े साहब हमें जान से मार देंगे उनकी बातें कुछ समझ में नहीं आ रही थी और मैं सवाली नजरों से सबको देख रही थी 

फिर वह मुझसे कहने लगे कि तुम वही हो ना बड़े साहब की बेटी मैं कहने लगी कि मैं नहीं जानती किसी बड़े साहब को तो वह कहने लगे तुम उन्हीं की बेटी हो हम पहचान गए हैं तुम्हें तुम फिक्र मत करो हम तुम्हें उन तक पहुंचा देंगे यह बात सुनकर मेरी रूह कांपने लगी थी कि अब ना जाने मेरी किस्मत मुझे कहां लेकर जा रही है

 

और मैं इंकार करने लगी कि मुझे कहीं नहीं जाना मैं किसी की बेटी नहीं हूं मेरे पापा तो कब के मर गए लेकिन किसी ने मेरी बात का भरोसा नहीं किया और सब वहां से चले गए सारा दिन मेरा इसी परेशानी में गुजरा लोग मुझे अजीब प्रोटोकॉल देने लगे मेरे आगे पीछे घूमने लगे 

मैं बस इतना ही सोचती क्या मेरी जिंदगी बस ऐसे ही चलती रहेगी अम्मी अब्बू के जाने के बाद मुझे यह सब बर्दाश्त करना था तो काश वो लोग इस दुनिया से ही नहीं जाते मुझे अपनी जंग अकेले ही लड़नी है उन सब लोगों के बिहेवियर से मुझे ऐसा लग रहा था कि यह लोग मुझे फंसा रहे हैं पूरी रात मैं रोती रही यह सोचकर कि कल सुबह मुझे नए घर भेज दिया जाएगा वहां के लोग पता नहीं कैसे होंगे और मेरे साथ क्या व्यवहार करेंगे कहीं लोग मुझे आगे तो नहीं बेच रहे बुरे से बुरे ख्याल मेरे जहन में आते रहे

 और अगले दिन सुबह को लोग मुझे किसी बड़े साहब के घर छोड़ आए मैं उनको कह भी रही थी कि मैं उनकी बेटी नहीं हूं लेकिन उन्हें अपनी जान बहुत प्यारी थी इसलिए वह किसी की बेटी किसी के घर छोड़कर आ गए थे जब मैं वहां के घर गई तो वहां बाहर नाम लिखा था मोबीन इतना तो मैं समझ गई थी कि इस नाम का कोई बंदा है यह लेकिन मैं उनकी बेटी कैसे हो सकती हूं अंदर गई तो एक आदमी खड़ा था जो बहुत ज्यादा बूढ़ा तो नहीं था लेकिन ज्यादा जवान भी नहीं था कहीं-कहीं झुरियां थी 

उसके चेहरे पर उन्हें देखकर साफ लग रहा था कि वो ज्यादा उम्र का आदमी नहीं था बल्कि उन्हें बेटी के गम ने ऐसा कर दिया था तो उस आदमी ने मुझे अपने गले से लगा लिया और फिर कहने लगा कि बेटी तुम कहां थी मैंने तुम्हें ना जाने कहां-कहां ढूंढा उनकी बात सुनकर मैं चुप रही लेकिन वह कहने लगे कि मुझे पता है तुम नाराज हो अपने अब्बा से उनकी यह बात सुनकर मैं चुप रही और मेरी आंखों से आंसू आ गए

 इतने टाइम बाद किसी ने मुझे बेटी कहा इतना प्यार जताया मुझ पर मैं उनके एकदम गले लग गई और रोने लगी और वह मुझे यह कहकर चुप करवाते रहे अपने अब्बा पर भरोसा रखो मैं तुम्हें कहीं नहीं जाने दूंगा गुजरते वक्त के साथ मुझे एहसास हुआ कि यह एक अच्छा इंसान है जो अपनी बेटी समझकर मुझे बहुत प्यार दे रहा है लेकिन मेरे दिल में एक डर सा था कि मैं अगर यहां से भाग कर गई तो लोग मुझे तरह-तरह की बातें सुनाएंगे बद किरदार कहेंगे इसलिए मैं उनके साथ उनकी बेटी बनकर वहीं रही

 एक दिन मैंने फ्रेम देखा जिसमें यह अंकल थे और उनके साथ उनकी बेटी जो कि बिल्कुल मेरे जैसी थी मुझे बहुत हैरत हुई कि ऐसे कैसे मुमकिन है कि दो लड़कियां एक जैसी शक्ल सूरत की हो मुझे लगा कि यह लोग मुझे ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं उसी रात मुझे बाहर से शोर की आवाज आने लगी जब मैंने खिड़की से झांक कर बाहर देखा तो मुझे महसूस हुआ कि उस घर की असली बेटी वापस आ गई है 

बहुत देर तक तो मैं अपने पैरों पर खड़ी रह गई यह वाकई में सच ही था उनकी बेटी बिल्कुल मेरे जैसी थी और वापस आ गई थी मेरे दिल में यह डर आने लगा कि कहीं यह लोग मुझे पुलिस के हवाले ना कर दें यह समझकर कि मैं यहां पर कुछ गलत काम करने के लिए आई हूं या कोई इल्जाम लगाकर या कोई चोर समझकर मैं तो दुपट्टा ओड़कर घर के पिछले रास्ते से बाहर निकल गई और भागकर उसी कोठे पर आ गई मुझे देखकर वह लोग कहने लगे कि तुम समझती क्यों नहीं हो तुम्हारा बाप हमें जान से मार देगा 

चली जाओ यहां से और फिर मैंने उन्हें बताया कि वह जिस आदमी के पास मुझे उनकी बेटी बनाकर छोड़कर आए थे उनकी असली बेटी वापस आ गई है अब आप लोग को यकीन हो गया होगा कि मैं सच में उसकी बेटी नहीं हूं मेरी बात सुनकर सब चुप हो गए और मैं वापस अपने कमरे में आ गई लेकिन मेरा दिल भी बहुत उदास था दोबारा बाप जैसी नेमत के छीन जाने पर मैं अंदर अकेली बैठी रोती रही बाकी लोग दरवाजा खटखटा रहे थे

 लेकिन मैं बहरी बनी बैठी रही उस आदमी का अपनी बेटी के लिए प्यार देखकर लेकिन कुछ घंटों बाद मैंने अपने जज्बात पर काबू पाया और फिर मैं बाहर आई लड़कियां मुझे देखकर बस यही कहती जा रही थी कि तुम्हारी तो लॉटरी लग गई है कितने दिन तुम ऐश के गुजार कर आई हो लेकिन मैं खामोश रहती ती दिन बाद उस कोठे पर रेड पड़ गई और साथ में वह साहब भी आए थे और फिर पुलिस सबको बारी-बारी ले जाने लगी सब लोग एक दूसरे के कान में फुस फुसा रहे थे कि कहीं इस लड़की ने तो यह सब नहीं करवाया 

और सब लोग मुझे शक की निगाहों से देख रहे थे लेकिन यह हैरान कर देने वाली बात थी मेरे लिए वहां पर कोई भी नहीं था पूरा कोठा खाली हो गया था बस मैं ही बची थी पुलिस भी जा चुकी थी फिर वह आदमी मेरे पास आया और मुझे गले से लगाकर फिर उसने वही अल्फाज दोहराए कि बेटी तुम कहां चली गई थी तुम्हें कितना ढूंढा हमने तुम कहीं मिली ही नहीं और इस बार मैं खाली निगाहों से उन्हें देख रही थी 

और फिर वह मुझे अपने साथ अपने घर ले गए मैं जब वहां गई तो वह लड़की जो उनकी बेटी थी वह पहले से ही वहां पर थी और उसके हाथ में कुछ था मैं क उस लड़की को देखती तो कभी उस लड़की के बाप को वह मुझे अपनी बेटी के पास ले जा रहे थे और वहां जाकर उन्होंने मुझे अपनी बेटी के पास बैठा दिया जब मैं उनकी बेटी के पास बैठी तो उनकी बेटी ने फ्रेम मुझे पकड़ा दिया 

जिसमें अंकल और उनकी बीवी थी और दोनों के हाथ में एक-एक बच्चा था मैं हैरत से उन्हें देखने लगी तो वह मुझसे कहने लगे कि हां यह भी सच है तुम दोनों जुड़वा बहने हो तुम दोनों को जब तुम्हारी मां ने जन्म दिया तो वो बहुत बीमार रहने लगी इसलिए हमने घर पर काम करने के लिए एक नौकरानी को रख लिया कि तुम्हारी मां के साथ-साथ तुम दोनों का भी ख्याल रखती थी मैं उस पर अंधा भरोसा करके काम पर चला जाता था उसने उसी का फायदा उठाया और वह तुम्हें अगवा करके वहां से ले गई

 और मैंने उसे बहुत ढूंढा लेकिन वह मुझे कहीं नहीं मिली और तुम्हारी मां इस दुनिया से चली गई अपनी बेटी के ना मिलने का दुख और फिर अपनी बीवी से बिछड़ जाने का गम मुझे तो किसी भी तरह सब्र नहीं आ रहा था और फिर मैंने सब्र किया और अपनी इस बच्ची को बहुत मेहनत से पाला और बहुत पढ़ाया लिखाया लेकिन फिर यह भी एक दिन गायब हो गई मैंने हर जगह से ढूंढा हर यूनिवर्सिटी हर शहर में जगह-जगह रेड पढवा कर मैंने सब कुछ बंद करवा दिया

 लेकिन यह मुझे कहीं नहीं मिली और तू मिल गई जिस दिन तुम यहां पर आई थी मैं तभी तुम्हें पहचान गया था कि तुम मेरी छोटी बेटी नहीं हो क्योंकि उसकी चाल ढाल ऐसी नहीं थी मैंने उसी वक्त तुम्हें गले लगाकर बताया कि मैंने तुम्हें बहुत ढूंढा लेकिन तुम कहीं नहीं मिली तुम्हें ऐसा लगा कि मैं उसकी मोहब्बत में बोल रहा हूं और तुम्हें यकीन नहीं आया फिर जब मेरी बेटी घर वापस आई और तुम यहां से भाग गई मैं जान गया था कि तुम उसी कोठे पर वापस गई होगी इसलिए मैंने वह भी बंद करवा दिया

 और तुम्हें यहां पर लेकर आ गया और सच्चाई बता रहा हूं ताकि तुम्हें यकीन आ जाए कि मैं ही तुम्हारा बाप हूं और तुम मेरी बेटी हो और तुम दोबारा यहां से भागने की गलती ना कर सको बेटा यह तुम्हारा ही घर है और इस बात को तुम जल्द से जल्द मान लो और गलती मुझसे हुई है मैं उन सबके लिए बहुत ज्यादा शर्मिंदा हूं

 

अब्बा की बात सुनते सुनते मेरी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे लेकिन मैं कुछ नहीं बोली क्योंकि रब ने मुझे दोबारा बाप जैसी नेमत अदा कर दी थी और फिर मैं अब्बू के सीने से लग गई उन्हें अपने ऊपर हुई हर जाती के बारे में बताने लगी दोनों मेरी कहानी सुन सुनकर रोने लगे

 लेकिन इतना नहीं रोए जितना मैं रोई थी यह सब सहकर लेकिन जो किस्मत में था वही हुआ था मुझे कोई भी किसी से शिकवा नहीं था इसलिए मैं हंसी खुशी अब्बा और अपनी बहन के साथ जिंदगी गुजारने लगी यहां पर मेरी हर ख्वाहिश पूरी हुई थी और मैं रब का शुक्र अदा करने लगी क्योंकि हर मुश्किल के साथ आसानी है

 

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