सौतेले ससुर को सबक सिखाया | Emotional Story in Hindi | Long Hindi Story | Hindi Story

Emotional Story in Hindi : मेरा नाम दिव्या है मैं एक बंगले में नौकरानी का काम किया करती थी जब वहां के मालिक के बेटे ने मुझसे शादी की ऑफर की तो मैं फौरन ही उनसे शादी करने के लिए मान गई थी फिर जल्दी ही शादी करके मैं विदा होकर अपनी ससुराल आ गई थी मेरे ससुराल का घर कोई घर नहीं था बल्कि एक बहुत बड़ा आलीशान बंगला था मेरे ससुराल में मेरे पति और ससुर के अलावा कोई भी नहीं था इस घर में कोई औरत नहीं थी इसलिए मैं इस घर के सारे काम करने के लिए आती थी 

 

इस घर में और भी बहुत सारी नौकरा नियां मौजूद थी लेकिन उन सभी की ज्यादा उम्र थी सभी शादीशुदा थी और बच्चों वाली थी लेकिन मैं जवान लड़की थी और बहुत ज्यादा खूबसूरत थी मेरी मजबूरी मुझे यहां तक काम करने के लिए खींच कर लेकर आई थी मैं यहां आने के बाद बहुत ज्यादा परेशान हो जाती थी जब मेरा ससुर मुझे कहता कि बहू मेरे बेटे को छोड़कर चली जाओ वह तुम्हारे लिए ठीक नहीं है एक दिन यह बात मैंने अपने पति को बता दी थी 

 

अगले ही दिन जब मैं सोकर उठी तो मेरे ससुर घर में मौजूद नहीं थे मैंने अपने पति से उनके बारे में पूछा तो वह कहने लगे कि वह अपनी बेटी के यहां चले गए मुझे दाल में कुछ काला लगा था मैं पति के जाने के बाद अपने ससुर के कमरे की तलाशी लेने के लिए चली गई थी लेकिन जैसे ही मैंने अपने ससुर की अलमारी खोली तो मुझे एक ऐसी चीज मिली जिसे देखकर मेरे पैरों तले से जमीन निकल गई थी घर के हालात से तंग आकर मुझे नौकरी करने की जरूरत पड़ गई थी थी क्योंकि मैं पढ़ी लिखी नहीं थी 

 

और गरीब परिवार से बिलंग करती थी इसलिए मैंने लोगों के घरों में काम करने का फैसला कर लिया था मेरा इस दुनिया में मेरी बूढ़ी मां के अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं था पहले वह लोगों के घरों में जाकर काम किया करती थी अब वह बीमार रहने लगी थी घर के हालात बिगड़ने लगे थे इसलिए मजबूर होकर मैं उनकी जगह लोगों के घर नौकरानी का काम करने के लिए जाने लगी थी मुझे हमेशा से पढ़ाई लिखाई का बहुत शौक था मगर घर के हालात देखते हुए मेरी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी थी 

 

मेरी मां ने ही मेरी परवरिश की थी क्योंकि मेरे पिता शराबी थे और वह सारे पैसे शराब पीने में उड़ा दिया करते थे इसलिए मेरी मां मेरे पिता और उनके घर को छोड़कर आ गई थी क्योंकि ऐसा इंसान कभी नहीं सुधर सकता जिसे अपने परिवार की चिंता ना हो मेरी मां ने मेरे पिता से तलाक ले ली थी और वह मुझे लेकर अलग घर में रहने लगी थी हम लोग किराए के घर में रहते थे उस वक्त मेरी उम्र सात साल की थी 

 

और अब मैं 18 साल की हो गई थी हम लोग बहुत गरीब थे हमारे आगे पीछे कोई नहीं था मेरी मां चाहती थी कि मैं पढ़ लिखकर कामयाब बन सकूं क्योंकि मेरी मां मुझे शिक्षा दिलवाना चाहती थी और मैं खुद भी यही चाहती थी लेकिन घर के बिगड़ते हुए हालात देखकर मुझे अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ गई थी क्योंकि लोग भी मेरी मां से कहा करते थे कि तुम बेवजह अपनी बेटी को पढ़ा रही हो एक दिन इसको विदा होकर अपनी ससुराल ही जाना है तुम इस पर फालतू के पैसे बर बात कर रही हो

 

 शायद इन्हीं जैसे लोगों की नजर तो मेरी पढ़ाई को लग गई थी लोग मेरी मां को यही राय दिया करते थे कि जल्द से जल्द अपनी बेटी की शादी कर दो लेकिन मुझे अभी शादी बिल्कुल नहीं करनी थी अगर मैं शादी करके अपनी ससुराल चली गई तो मुझे इस बात का ख्याल था कि फिर मेरी मां का क्या होगा वह तो अकेली रह जाएंगी इसलिए मैं शादी करने से इंकार कर दिया करती थी मुझे अपनी मां का ध्यान रखना था 

 

मेरी मां की तबीयत वैसे भी इन दिनों बहुत खराब रहने लगी थी मेरी मां अकेली ही तो कमाने वाली थी और उन्होंने इस पूरे घर का बोझ उठाया हुआ था अब वह भी बीमार रहकर बिस्तर से लग गई थी उन्हें दवाइयों की भी जरूरत होती थी और घर का भी खर्चा बहुत था इन सारी मजबूरी को देखते हुए ही मैं लोगों के घरों में जाकर काम करने लगी थी मैंने इरादा किया था कि जब तक मेरी मां की तबीयत ठीक नहीं हो जाती मैं उन्हें छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी क्योंकि उनका भी तो इस दुनिया में मेरे अलावा और कोई नहीं है 

 

और मेरी ही खातिर वह मेरे शराबी पिता को छोड़कर मेरी परवरिश अच्छी तरह से करने के लिए उनसे मुझे दूर लेकर आ गई थी मेरे पिता अब इस दुनिया में नहीं है क्योंकि जब हम लोग अपना घर छोड़कर आए थे तो उसके 3 साल बाद हमें खबर मिली थी कि मेरे पिता की मौत हो गई शराब पी पीकर उन्होंने अपना लिवर खराब कर लिया था वह गरीब थे और अपना इलाज नहीं करा सके इसलिए एक दिन इस दुनिया को छोड़कर चले गए मेरे पिता की मौत पर मेरी मां को कोई खास अफसोस नहीं हुआ था

 

 क्योंकि मेरे पिता मेरी मां को बुरी तरह मारते थे उन्होंने कभी अपनी बेटी और पत्नी का ख्याल नहीं किया था बस उन्हें हमेशा अपना ही फायदा याद रहता था मेरी मां तो जिस दिन से इस घर में आई थी उन्होंने ना दिन देखा था और ना ही रात देखी थी अपनी बेटी की खुशियां पूरी करने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी मेहनत मजदूरी करके मेरी परवरिश की थी मेरी सारी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए उन्होंने अपना चैन और सुकून बर्बाद कर लिया था मेरी मां चाहती थी कि जैसे दिन उन्होंने गुजारे हैं

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 ऐसे दिन उनकी बेटी ना गुजार सके अगर बेटी पढ़ी लिखी होगी तो उसकी शादी भी अच्छे परिवार में होगी लेकिन शायद यह सब कुछ मेरे भाग्य में नहीं था क्योंकि मेरी पढ़ाई तो रुक चुकी थी मेरी मां को लगता था कि मेरी जिंदगी भी उन्हीं की तरह खराब हो जाएगी पर यह तो किस्मत किस्मत की बात होती है जैसा मेरी किस्मत में लिखा होगा वही मेरे साथ हो जाएगा मैं अपनी मां को यही समझाती थी कि आप इस ब बारे में ज्यादा फिक्र मत किया करो

 

 मेरी मां अक्सर कहती थी कि वह अपनी बेटी के लिए हर वह काम करना चाहती है जिससे उनकी बेटी को खुशी मिले यहां तक कि वह अपनी बीमारी के दिनों में भी काम पर जाया करती थी लेकिन अब मुझसे उनकी यह हालत नहीं देखी जा रही थी इसीलिए मैंने उन्हें घर में ही आराम करने के लिए कहा था और उन्हें काम पर जाने के लिए सख्ती से मना कर दिया था 

 

मेरी मां जहां एक बहुत अच्छी मां साबित हुई थी वहां एक बहुत अच्छी पत्नी भी साबित हुई थी क्योंकि कई सालों तक उन्होंने मेरे पिता की मार को बड़ी खामोशी से सहा था उन्होंने बहुत कोशिश की थी कि उनके पति सुधर जाएं लेकिन मेरे पिता का तो दूर-दूर तक सुधरने का कोई चांस ही नहीं था तभी तो तंग आकर मेरी मां ने मेरे पिता का घर छोड़ने का फैसला किया था 

 

अपनी छोटी सी जिंदगी में मेरी मां के साथ मेरी जिंदगी अच्छी गुजर रही थी लेकिन फिर मेरी जिंदगी में एक ऐसा तूफान आया कि जिसने मेरा सारा चैन और सुकून बर्बाद कर दिया था मैं लोगों के घरों में काम करने के लिए जाने लगी थी जहां-जहां मेरी मां जाती थी मैं भी अपनी मां के बदले वहां पर काम करके आती थी फिर मुझे शाम होने से पहले घर भी जाना होता था क्योंकि मेरी मां बीमार थी और मुझे उनके लिए अपने लिए खाना भी पकाना होता था

 

 फिर मैं थोड़ा टाइम अपनी मां के साथ भी गुजारती थी और उनकी सेवा करती थी एक दिन जब मैं घर आई तो मेरी मां ने मुझे अपना फैसला सुना दिया था उन्होंने कहा कि मैं चाहती हूं कि जल्द से जल्द तुम्हारी अच्छा सा लड़का देखकर शादी कर दूं मैंने भी इस बारे में अपनी मां से ज्यादा कुछ नहीं कहा था मैं समझ गई थी कि वह क्यों चाहती हैं कि उनकी बेटी जल्दी ही अपने घर चली जाए क्योंकि वह अपनी तबीयत को देखते हुए यह सोचती थी कि अगर मैं भी इस दुनिया से चली गई 

 

तो फिर मेरी बेटी का क्या होगा इसलिए वह मुझे मेरे घर का करना चाहती थी अपनी मां की खुशी के लिए तो मैंने हां कर दी थी लेकिन मैं जानती थी कि गरीब लड़कियों के रिश्ते इतनी आसानी से नहीं होते और मेरी मां मेरी शादी एक अच्छे अच्छे परिवार में करवाना चाहती थी अच्छे परिवार में तो सिर्फ उन्हीं लड़कियों की शादी होती है जो खुद अच्छे परिवार और अमीर परिवार की होती है मेरा तो कोई परिवार ही नहीं था मेरा जो कुछ भी था वह मेरी मां थी

 

 और मुझ जैसी लड़कियों के रिश्ते अच्छे परिवारों में इतनी आसानी से नहीं लगते इस हकीकत को मैंने एक्सेप्ट कर लिया था मैंने अपनी मां की खुशी की खातिर शादी करने के लिए हाथों कर दी थी क्योंकि उन्होंने सारी जिंदगी मेरे लिए बहुत कुछ किया था और फिर मैं उनको कोई दुख नहीं पहुंचाना चाहती थी इसलिए बेहतर यही था कि मैं अपनी मां से शादी करने के लिए इंकार ना कर पाऊं जिससे उनको तकलीफ पहुंचे और वह अपनी बेटी को गलत समझे लेकिन हैरानी वाली बात यह थी 

 

कि मेरी मां को मेरे लिए एक अच्छा रिश्ता मिल गया था मैं बड़ी हैरान थी कि मेरा रिश्ता इतनी जल्दी कैसे लग गया था मुझे तो कुछ गड़बड़ लग रही थी यह लड़का अच्छा था और मिडिल क्लास फैमिली से बिलोंग करता था इसलिए मेरी मां ने भी इस रिश्ते के लिए हां कर दी थी मुझे लड़के वालों से कोई को खास उम्मीद तो नहीं थी लेकिन जबक यह मेरी मां का फैसला था तो मैं खामोश रही थी नहीं तो मैंने सोचा था कि मैं इतनी जल्दी अपनी मां का साथ नहीं छोड़ सकती

 

 मुझे तो ऐसा ही लगता था कि मेरा रिश्ता इतनी जल्दी नहीं लग सकेगा पर मुझे नहीं पता था कि मेरा रिश्ता इतनी जल्दी लग जाएगा और मेरी मां को रिश्ता पसंद भी आ जाएगा शादी की सारी तैयारियां हो चुकी थी मेरी मां जहां-जहां काम करती थी उन लोगों से अपनी बेटी की शादी के बारे में कहकर उनसे थोड़े बहुत पैसे लेक कर आ गई थी उन्होंने मेरे लिए सामान लेना शुरू कर दिया था मां मुझे कहती कि कोई भी माता-पिता अपनी बेटी के लिए बुरा नहीं सोचते

 

 और पूरी कोशिश करते हैं कि उनकी बेटी ससुराल में खुश रहे तभी तो अपने बेटे के लिए अच्छी जगह पर रिश्ता तय करना चाहते हैं और अपनी तरफ से बेटी को सुखी रखने की पूरी-पूरी कोशिश करते हैं मेरी शादी की डेट फिक्स हो चुकी थी मगर फिर मेरी होने वाली सास का शादी से एक हफ्ते पहले ही एक्सीडेंट हो गया था जिसमें वह काफी बुरी तरह से जख्मी हुई थी वह अस्पताल में एडमिट थी

 

 जिसकी वजह से शादी रोकनी पड़ गई थी मेरी सास के ऊपर बहुत ज्यादा पैसा खर्च किया जा रहा था हालांकि वह लोग भी कोई ज्यादा अमीर तो नहीं थे लेकिन मेरी होने वाली सांस के इलाज में काफी सारा पैसा खर्च हो चुका था मेरे होने वाले पति के पास अब कुछ नहीं बचा था इसलिए उसने डिमांड की कि हम शादी कर लेते हैं जिसमें मेरी मां शामिल नहीं होगी लेकिन आप मुझे ₹ लाख नकद दे देना यह बात सुनकर तो मेरी मां के होश उड़ गए थे क्योंकि वह इतनी बड़ी रकम नहीं दे सकती थी

 

 उन्होंने मेरे लिए मामूली सा दहेज का सामान इकट्ठा कर लिया था और वह उसी के साथ मुझे विदा करना चाहती थी अब अगर मेरी सास का एक्सीडेंट हो गया था तो इसमें हमारी क्या गलती थी मेरे ससुराल वाले जिद पर ड़ गए थे कि अगर अपनी बेटी को विदा करना है तो ₹ लाख देने ही होंगे मेरे ससुराल वालों का कहना था कि ये सब कुछ भी हम आपकी बेटी की भलाई के लिए ही कर रहे हैं अगर आप लोग हमारा मुश्किल वक्त में में साथ दोगे तो हम आपकी बेटी की अपने बेटे के साथ शादी करवा देंगे

 

 हम लोग परेशान हो गए थे क्योंकि हमारे पास इतनी ज्यादा पैसे नहीं थे मेरी मां ने मेरे लिए कुछ जेवर बनवाए थे जो उन्होंने बड़ी ही मेहनत से और प्यार से मेरे लिए खरीदे थे मेरी मां मेरा रिश्ता कायम रखने के लिए मेरे ससुराल वालों को जेवर दे रही थी लेकिन मैंने अपनी मां को रोक लिया और कहा कि आपकी मेहनत से बनाए गए जेवर हैं अगर आप यह जेवर मेरे ससुराल वालों को दे दोगी तो वोह लोग इसे बेच दे और इस तरह से मेरी मां के पैसों के जेवर मुझसे छिन जाएंगे

 

 मेरे पास आपकी कोई निशानी नहीं रह पाएगी मैंने अपनी मां को समझाया था कि जेवर इन लोगों को मत दो यह लोग मुझे लालची लगते हैं अगर इन लोगों को इलाज करवाना ही है तो यह किसी से कर्ज भी तो ले सकते हैं इन लोगों को हम ही क्यों दिखाई दे रहे हैं मेरी मां बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी और बहुत रो रही थी मेरी मां तो मेरे लिए अपनी सारी कीमती चीजें बेचकर भी मेरी सास का इलाज करवाने के लिए तैयार थी मेरे ससुराल वाले बार-बार मेरी मां पर प्रेशर डाल रहे थे

 

 कि अगर हमें पैसे नहीं दिए तो हम अपने बेटे का रिश्ता कहीं और तय कर देंगे और यहां से खत्म कर देंगे मेरी मां इस बात से बहुत परेशान थी उनको पता नहीं इस लड़के में ऐसा क्या दिख रहा था कि वह अपना कीमती सब कुछ देने के लिए तैयार थी लेकिन वह तो अच्छा हुआ कि एक दिन में पड़ोस में काम करने के लिए गई हुई थी उन्होंने मुझे मार्केट से सामान लाने के लिए कहा था मैं अपनी मालकिन की छोटी बेटी बेटी के साथ मार्केट चली गई थी लेकिन यह देखकर हैरान रह गई थी

 

 कि मेरी होने वाली सास तो मार्केट में बिल्कुल ठीक-ठाक टहल रही थी उनको देखकर मैं छुप गई थी कि कहीं उनकी नजर मुझ पर ना पड़ जाए उनको बिल्कुल सही सलामत देखकर मैं सोच में पड़ गई थी इसका मतलब यह था कि मेरी होने वाली सास ने हम लोगों से पैसे लेने के लिए बेवकूफ बनाया था उनका कोई एक्सीडेंट नहीं हुआ था बल्कि वह तो बिल्कुल परफेक्ट थी कहीं पर भी चोट का निशान तक नजर नहीं आ रहा था वह मार्केट में अपनी बड़ी बेटी के साथ टहल रही थी और शॉपिंग भी कर रही थी मैं समझ गई थी कि इन लोगों ने सब कुछ हमसे पैसे हड़पने के लिए ही किया था 

 

यह लोग अपने बेटे की शादी नहीं करवाना चाहते बल्कि हमें बेवकूफ बनाकर ब्लैकमेल करने के बाद हमसे पैसे वसूलना चाहते हैं मैं जब घर गई तो मैंने अपनी मां को सारी बात बता दी थी मेरी बात सुनकर मेरी मां को मेरी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था फिर मैंने उनका सामना मालकिन की बेटी से करवा दिया जिसने मेरी मां को साफ-साफ बता दिया था कि वो औरत कोई और नहीं मेरी सास ही थी जो मार्केट में बिल्कुल ठीक तरह से टहल रही थी और शॉपिंग कर रही थी 

 

मेरी मां ने तो मेरी बात सुनकर भगवान का लाख-लाख शुक्रिया अदा किया था क्योंकि वो उन लोगों में मेरी शादी करने के लिए पैसों का बंदोबस्त करने लगी थी मैंने अपनी मां से कहा था कि मैं ऐसे घर में शादी नहीं करूंगी जहां के लोग लालची हैं मेरी मां ने कहा था कि तुम फिक्र मत करो मैं खुद ही इस रिश्ते को खत्म कर दूंगी मेरी मां ने लड़के वालों से रिश्ते के लिए साफ इंकार कर दिया था इस तरह से वहां पर मेरा रिश्ता खत्म हो गया था और मेरी शादी भी नहीं हो पाई थी 

 

मुझे खुशी इस बात की थी कि मेरी शादी गलत परिवार में होने से बच गई थी जो लोग बाहर से अच्छे दिखते हैं जरूरी नहीं कि वह अंदर से भी अच्छे ही होते हैं कुछ लोग अच्छे और खानदानी बनने का नाटक करते हैं हालांकि वह अंदर से बिल्कुल भी ऐसे नहीं होते हैं मेरे होने वाले ससुराल वालों को भी मेरे अंदर कोई दिलचस्प नहीं थी बल्कि उनको तो बस पैसों और चीजों में ही दिलचस्पी थी उनको यह पता हो गया था कि हम लोग गरीब हैं हम उन्हें दहेज में ज्यादा कुछ नहीं दे सकते 

 

इसलिए उन्होंने यह ढोंग रचाया था मैं खुश थी क्योंकि अब मेरे सर से शादी की बला टल गई थी लेकिन मेरी मां का कहना था कि वह मेरे लिए कहीं और रिश्ता तलाश करेंगी मेरा रिश्ता टूट जाने की वजह से मेरी मां के दिल पर एक अजीब सा सदमा लगा था अब वह और ज्यादा बीमार रहने लगी थी और हमेशा मेरी फ उन्हें सताए रहती थी ऐसे में हमारे घर के हालात वक्त गुजरने के साथ-साथ और ज्यादा खराब होने लगे थे और मां के इलाज के लिए भी पैसों की जरूरत थी

 

 मैं इन छोटे-मोटे घरों में नौकरी करके ज्यादा पैसे नहीं कमा पा रही थी मैंने सोचा कि मुझे किसी अमीर घर में काम करना चाहिए इसलिए मैं बड़े लोगों के यहां काम करने के लिए जाने लगी थी वहां पर मुझे नौकरी भी आसानी से मिल गई थी क्योंकि मैं खाना भी अच्छा पकाती थी और साफ सफाई से काम करती थी यही वजह थी कि मुझे नौकरी मिलने में ज्यादा वक्त नहीं लगा था मुझे एक बंगले में नौकरानी के काम के लिए रख लिया गया था वहां पर मुझे अच्छी सैलरी भी मिल रही थी 

 

पहनने के लिए कपड़े मिलते थे और रात को जो खाना बचता था वह सब भी मालिक मुझे घर ले जाने के लिए कह देते थे जिससे हमारे घर के खर्चे पूरे हो जाते थे मैं दो महीने से इस बंगले में नौकरी कर रही थी यह बंगला बहुत बड़ा था जबकि इस बंगले में सिर्फ दो बाप बेटे ही रहते थे ज्यादा फैमिली मेंबर्स नहीं थे कहने को तो यहां पर और भी सारी नौकरा नियां लगी हुई थी लेकिन मालिक को सिर्फ मेरे हाथ का ही खाना पसंद आया था इसलिए उन्होंने खाना पकाने की ड्यूटी मुझे दे दी थी 

 

वैसे तो मालिक देश विदेश में घूमते रहते थे लेकिन उन्हें इंडियन खाना बहुत पसंद था मेरी मां भी अच्छा खाना बनाती थी और मैंने खाना पकाना अपनी मां से ही सीखा था मैं अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ करती थी कभी मेरे काम में कोई गलती नहीं हुई थी मेरे मालिक मेरे काम से बहुत खुश थे और फिर एक दिन मालिक का बेटा जिसका नाम प्रदीप था प्रदीप विदेश में पढ़ने के लिए गया हुआ था

 

 और इन दिनों वह अपने घर पर ही आया हुआ था मैंने नोटिस किया था कि वह जब से यहां पर आया था मुझे बड़े गौर गौर से देखता था अपने पिता के साथ-साथ वह भी मेरे हाथ के बने हुए खाने की खूब तारीफ करता था एक दिन उसने ऐसी ही बात कह दी थी जिसने मुझे पूरी तरह से हैरान कर दिया था मेरे मालिक के बेटे ने मुझे शादी की ऑफर दी थी और साथ-साथ यह भी कहा था था कि वह मेरी मां की सारी जिम्मेदारी और मेरे घर की सारी जिम्मेदारी उठाने के लिए भी तैयार है

 

 मुझे और क्या चाहिए था यह सारी बातें सुनते ही मैं तो फौरन शादी के लिए मान गई थी मैं बहुत ज्यादा खूबसूरत थी मैं समझ गई थी कि मालिक के बेटे का दिल मुझ पर आ गया है उसने मेरा गलत फायदा ना उठाते हुए डायरेक्ट मुझसे शादी की बात की थी मुझे उसकी यह अदा बहुत पसंद आई थी मैं मान गई थी और मैंने शादी के लिए हां कर दी थी मैंने अपनी मां से भी इस बारे में बात की तो उन्होंने भी यही कहा कि मैं तुम्हारी शादी के लिए तैयार हूं क्योंकि जितनी तुम्हारी सैलरी है

 

 इसमें तो घर के खर्चे ही बड़ी मुश्किल से पूरे होते हैं और मैं कोई दूसरी नौकरी भी तो नहीं कर सकती थी एक साथ दो नौकरियां करना मेरे लिए कोई आसान बात नहीं थी और ना ही घर गृहस्ती के काम के अलावा मुझे कोई दूसरा काम आता था प्रदीप ने मुझसे कहा था कि वह मेरी मां का अच्छे अस्पताल में इलाज करवाएगा मैं उसकी इस बात से बहुत खुश थी

 

 

और जल्दी ही वह शादी करके मुझ मुझे अपने साथ अपने घर ले गया था मैंने यही सोचा था कि मैं इस बंगले में पहले जिस तरह से खाना पकाया करती थी इसी तरह से अपने ससुराल वालों को खाना बनाकर खिलाया करूंगी ताकि उनको यह ना लगे कि मैंने उनके पैसे की खातिर उनसे शादी की है मैं अपनी मेहनत पूरी करूंगी और कोशिश भी करूंगी कि अपनी मां का खर्चा खुद उठा सकूं मेरी ससुराल का बंगला बहुत बड़ा था मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतने बड़े बंगले में काम करने वाली मैं नौकरानी एक दिन इस घर की मालकिन भी बन सकती हूं

 

 कुछ तो मैंने अपने घर की मजबूरी से तंग आकर यह शादी की थी मेरी से पहले जहां शादी होने वाली थी इस मुकाबले पर तो उन लोगों का घर कुछ भी नहीं था जैसा मेरी ससुराल का घर था जहां पर मेरा रिश्ता पहले लगा था वह लोग अब बहुत ज्यादा अफसोस कर रहे थे क्योंकि उन लोगों को पता चल गया था कि मेरी शादी एक अमीर परिवार में हो गई है और मैं इतने बड़े बंगले की मालकिन बन गई हूं उन लोगों ने तो हमें बेवकूफ बनाकर अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार ली थी

 

 अच्छा हुआ कि मेरी शादी वहां पर नहीं हुई क्योंकि उन लोगों का यही धंधा था कि वह अपने बेटे का रिश्ता लगाकर उनसे किसी ना किसी बहाने से शादी से पहले ही रिश्ते के नाम पर पैसे वसूल लिया करते थे मेरी शादी को अभी कुछ ही दिन गुजरे थे मेरा पति मेरा बहुत ख्याल रखता था और मेरी मां की भी काफी फिक्र करता था मैं इस बात से बेफिक्र थी कि हम लोगों को किसी का सहारा मिल गया था

 

 मेरी मां का अच्छे डॉक्टर से इलाज शुरू हो गया था जिसकी वजह से उनकी तबीयत थोड़ी बेहतर रहने लगी थी मुझे उम्मीद थी कि मेरी मां की तबीयत एक दिन बिल्कुल ठीक हो जाएगी और फिर जब मेरी मां की तबीयत ठीक हो जाती तो मुझे अपने पति का एहसान लेने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि उसके बाद मेरी मां अपना गुजारा खुद कर सकती थी जैसे पहले किया करती थी अब तो वैसे भी वह अकेली रह गई थी क्योंकि मेरी मां बहुत ही खुद्दार औरत थी 

 

उन्होंने आज तक कभी किसी का एहसान नहीं लिया था अगर किसी को हमारी मदद करनी होती थी तो वह खुद ही कर दिया करता था आस पड़ोस के सारे लोग मेरी मां की बहुत तारीफ किया करते थे मेरी मां ने लोगों के घरों में काफी सालों ईमानदारी और भरोसे के साथ काम किया था शुरू शुरू में तो हमारे आज पड़ोसियों ने भी हमारी बहुत मदद की थी मेरी मां को अच्छे इलाज की जरूरत थी और इलाज के लिए अच्छे पैसों की भी जरूरत थी जो कि हमारे पास मौजूद नहीं थे 

 

ऐसे में मुझे ना चाहते हुए भी अपने मालिक के बेटे के साथ शादी करने कासा लेना पड़ गया था अभी तक उन्होंने अपना किया हुआ एहसान मुझ पर जताया नहीं था और ना ही इस बात को जाहिर किया कि वह मेरी मां के इलाज का खर्चा उठा रहे हैं मैंने प्रदीप जैसा इंसान अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा था जहां पर अपने बहुत करीबी रिश्ते बदल जाते हैं जैसे कि मेरे पिता और मेरे दद हाल वालों ने कभी मुझे समझने की कोशिश ही नहीं की कभी अपने खून को पलट कर नहीं देखा 

 

आज के जमाने में कोई अनजान इंसान इतनी मदद नहीं करता जितनी दीप ने मेरी की थी मैं उनका बहुत एहसान मानती थी और दिल से उनकी इज्जत किया करती थी मुझे ऐसा लगने लगा था कि जिंदगी में से सारे दुख दर्द खत्म हो गए हैं जिंदगी पहले की तरह सुकून और बेफिक्र वाली हो गई है शादी के कुछ दिनों बाद ही मेरे ससुर ने मुझे यह कहना शुरू कर दिया था कि बहू यहां से चली जाओ मेरे बेटे को छोड़ दो उनके इस तरह से कहने पर मुझे बहुत ज्यादा हैरानी होती थी 

 

वह बस ज्यादातर अपने ऑफिस में ही रहा करते थे थे बहुत कम होता था कि वह घर पर आते थे जब भी मैं उन्हें नजर आती तो वह मुझे यही बात कहते थे कि बहू मेरे बेटे को छोड़ दो और यहां से चली जाओ उनकी यह बात मुझे बहुत ज्यादा परेशान कर देती थी मुझे बहुत ज्यादा डर लगने लगता था मेरे पति के पिता आखिर मुझसे यह बात क्यों कहा करते थे जब भी मैं उनसे इस बारे में पूछती तो वह खामोश होकर अपने कमरे में चले जाते थे और यही कहते कि मैंने जो तुमसे कहा है

 

 तुम वही करो ज बब की एक चीज घर में मैंने और देखी थी वह यह थी कि यहां के सारे ही नौकर अपने काम से काम रखते थे मैं जब उनसे भी कुछ पूछने की कोशिश करती तो वह भी मुझे कोई जवाब नहीं देते थे काम के अलावा मुझसे कोई बात नहीं करता था मैं इस घर के बारे में या फिर अपने ससुर के बारे में कुछ भी नहीं जान पाई थी सारी बातों में एक बात जो बहुत हैरान कर देने वाली थी

 

 वह यह थी कि मेरा पति जो मुझसे मोहब्बत करता था वो इतना हमदर्द इंसान था कि मेरी मां की भी फिक्र करता था उसका तो इस दुनिया में उसके पिता के अलावा और कोई नहीं था लेकिन वह अपने पिता से बहुत दूर था वह अपने पिता से ज्यादा बातचीत नहीं करता था और उसने मुझसे शादी भी अपने पिता से पूछे बिना ही की थी हालांकि उन्हें हम दोनों की शादी पर कोई ऐतराज नहीं हुआ था और ना ही उन्होंने इस बात का कोई एक्शन लिया था वह कभी अपने पापा से रिलेटेड कोई भी बातचीत मुझसे नहीं करता था

 

 ऐसा लगता था जैसे वह अपने पिता को जानता ही नहीं है ना वोह दोनों दोनों कभी आपस में मिलते थे और ना ही कोई बातचीत करते थे ऐसा कैसे हो सकता था कि एक घर में सिर्फ दो ही लोग हैं और उन दोनों के बीच में काफी दूरी बनी हुई है यह बात काफी हैरान कर देने वाली थी कोई बेटा अपने पिता के साथ इतनी बेरुखी से कैसे पेश आ सकता है और वह मेरे पति जैसा इंसान जिसके अंदर इंसानियत मौजूद हो

 

 और जिस इंसान को दूसरों की तकलीफ पर भी तकलीफ महसूस होती हो वह कैसे अपने ही पिता को इग्नोर कर सकता था यह सारी चीज देखने के बाद भी मैंने अपने पति से इस बारे में कोई बात नहीं की थी मुझे डर था कि उन्हें कहीं मेरी कोई बात बुरी ना लग जाए और वह मुझसे नाराज ना हो जाए जबकि मैं उन्हें बिल्कुल भी नाराज नहीं करना चाहती थी उसके मुझ पर और मेरी मां पर बहुत एहसान थे ऐसे में मैं उसके घरेलू मैटर में इंटरफेयर नहीं कर सकती थी 

 

मैं अपने काम से काम रखती थी वैसे भी उसका और उसके पिता का मैटर था मैंने यही सोचा था कि मैं धीरे-धीरे दूरियां दूर करने के साथ मौका देखकर इस बारे में बात करूंगी आखिर इस सबके पीछे क्या वजह हो सकती है लेकिन दिन बदन मेरे ससुर मुझे कुछ नया कह देते थे ऐसा जिससे मैं परेशान हो जाती थी और तो और मुझे उनकी हरकतें भी बड़ी अजीब लगती थी वह मुझसे इस तरह से हंसी मजाक करते थे जैसे वह मेरे ससुर नहीं बल्कि मेरे कोई दोस्त हो वह मेरे पिता समान थे

 

 मैं उनका आदर सम्मान करती थी इसलिए उनके साथ ज्यादा फ्रेंडली भी नहीं हो सकती थी मेरे पति ने मेरे मेरे कमरे में हम दोनों की शादी की काफी सारी फोटोस फोटो फ्रेम में लगवा करर कमरे में लगवाई हुई थी जिन्हें देखकर वह बहुत खुश होते थे लेकिन मैं नोटिस कर रही थी कि धीरे-धीरे मेरे कमरे में से मेरी फोटोस भी गायब हो रही थी अब तो मुझे लगने लगा था कि शायद इस घर में सच में कोई और भी मौजूद है शायद इसी वजह से मुझे मेरे ससुर कहते हैं कि तुम मेरे बेटे को छोड़कर चली जाओ

 

 वह तुम्हारे लिए ठीक नहीं है मैं उनसे इस बात पर ज्यादा बहस नहीं करती थी थी क्योंकि वह मेरे बड़े थे बस उनकी बात खामोशी से सुन लिया करती थी पहले तो सिर्फ और सिर्फ मुझे परेशानी होती थी लेकिन अब डर भी लगने लगा था क्या सच में मेरा पति मेरे लिए ठीक नहीं है ऐसा कैसे मुमकिन था कि मेरे कमरे से मेरी फोटोज ही गायब हो रही थी जबकि अपने कमरे की सफाई तो मैं खुद ही किया करती थी और कोई भी नौकर मेरे कमरे में मेरी परमिशन के बिना दाखिल नहीं हो सकता था

 

 वैसे भी कोई भी नौकर सिर्फ मेरी फोटो ही चोरी क्यों करेगा क्योंकि गुम होने वाली चीज सिर्फ मेरी फोटो ही थी एक दो फोटो गायब होने पर तो मैंने कुछ नहीं किया था लेकिन अब यह सब कुछ हर रोज होने लगा था यहां तक कि मेरी शादी की जो एल्बम थी उसमें से भी मेरे काफी सारे फोटोज गायब होने लगे थे एक दिन मैंने सारे नौकरों को इकट्ठा करके पूछा था लेकिन उन लोगों में से किसी ने भी मुझे कुछ नहीं बताया था और साफ इंकार कर दिया था कि वह लोग मेरे फोटो क्यों चुराएंगे

 

 यह बात भी सही थी कि आखिर मेरे फोटोस चुराने से उनको क्या फायदा मिलेगा मेरे ससुर अब ज्यादातर घर में ही रहने लगे थे ऑफिस भी कम ही जा रहे थे मेरे ससुर मेरे पति के ऑफिस जाने के बाद अपने कमरे से निकले और मुझसे यही कहते कि अगर अपनी भलाई चाहती हो तो मेरे बेटे को छोड़ दो वह तुम्हारे लिए ठीक नहीं है यही तुम्हारे लिए बेहतर होगा कि तुम उसको छोड़कर यहां से चली जाओ वह यह भी कहते थे कि उसके साथ रहकर तुम अपनी जिंदगी को बर्बाद कर लोगी

 

 वह सिर्फ देखने में ही अच्छा है है क्योंकि अभी तुम्हारी शादी को सिर्फ दो महीने हुए हैं सच्चाई तो बाद में खुलकर आएगी कि वह कैसा है लेकिन उसके बाद बहुत देर हो चुकी होगी मैं काफी दिनों से अपने ससुर की बातें बर्दाश्त कर रही थी अगर मैं उनसे पलटकर कुछ पूछती थी तो वह मुझे पूरी बात नहीं बताते थे मुझे उन्होंने अभी तक इन बातों की वजह नहीं बताई थी जबकि यह सारी बातें मुझे बहुत ज्यादा परेशान करने लगी थी ऐसे में मेरे लिए कोई ना कोई रास्ता निकालना बहुत जरूरी हो गया था

 

 मैं अपनी परेशानी खत्म करना चाहती थी और यह एक ही तरीके से हो सकती थी कि मैं इस बारे में अपने पति से बात करूं ताकि मुझे मेरा पति हकीकत बता सके जबकि मेरे ससुर तो मुझे कुछ बताते ही नहीं थे मैंने अपने पति से बात करने का फैसला कर लिया था और उनके घर आने का इंतजार करने लगी थी उनके घर आते ही मौका देखकर मैंने यह सारी बातें उनको बता दी थी कि किस तरह कुछ दिनों से मैं आपके पिताजी की बातों से परेशान हो रही हूं 

 

उनके ऐसा कहने के पीछे आखिर क्या वजह है मैं जानना चाहती हूं अगर कोई वजह है तो आप मुझे साफ-साफ बता दो लेकिन मेरे पति का कहना था कि ऐसा कुछ नहीं है और इस टाइम मैं थका हुआ हूं तो मुझसे इस टॉपिक पर कोई बात मत करो और वह सोने के लिए लेट गए थे अगले दिन सुबह जब मैं उठी तो मेरे ससुर सारे घर में कहीं मौजूद नहीं थे जब मैंने अपने पति से इस बारे में कहा कि आपके पिता घर में कहीं भी दिखाई नहीं दे रहे

 

 हालांकि सुबह के टाइम पर वह गार्डन में बैठकर चाय पिया करते थे लेकिन आज ना तो वह गार्डन में थे और दोपहर होने को आ गई थी व अभी तक पूरे घर में कहीं भी दिखाई नहीं दिए थे मेरे पति ने बताया कि वह मेरी बहन के घर चले गए हैं और कुछ दिन उसी के घर पर रहेंगे यह बात मेरे लिए बहुत हैरान कर देने वाली थी वह इस तरह से अचानक अपनी बेटी के घर कैसे चले गए थे आज से पहले तो वह कभी नहीं गए थे मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था कुछ तो था 

 

जो इस घर में ठीक नहीं हो रहा था मुझे दाल में जरूर कुछ काला लग रहा था मैं अपने पति के ऑफिस जाने का इंतजार करने लगी थी उनके घर से निकलते ही मैं अपने ससुर के कमरे में तलाशी लेने के लिए चली गई क्योंकि मुझे काफी दिनों से शक हो रहा था कि कहीं मेरे फोटोज मेरे ससुर तो नहीं चुरा रहे लेकिन जब तक मुझे कोई सबूत नहीं मिल जाता मैं उन पर ऐसे इल्जाम नहीं लगा सकती थी 

 

इसलिए तो मैं उनके कमरे में आई थी मैंने हर तरफ तलाशी ले ली थी मगर मुझे कुछ नहीं मिला था फिर जैसे ही मैंने ने अपने ससुर की अलमारी खोली तो वहां पर कुछ डॉक्यूमेंट रखे हुए थे मैंने उन डॉक्यूमेंट वाली फाइल को जैसे ही अपने हाथ में लिया तो वह मेरे हाथ से छूटकर जमीन पर गिर गई फिर फाइल से जो चीज बाहर निकलकर जमीन पर गिरी उसे देखकर तो मेरे पैरों तले से जमीन निकल गई थी क्योंकि वह कुछ और नहीं बल्कि मेरे अपने फोटोस थे 

 

जो मेरे कमरे से कई दिनों से गायब हो रहे थे इसका मतलब यह था कि मेरे ससुर ही मेरे फोटोस चुरा रहे थे लेकिन वह ऐसा क्यों कर रहे थे यह बात मेरी समझ नहीं आ रही थी मेरे फोटोस चोरी करके वह अपनी अलमारी में इन डॉक्यूमेंट के बीच रख रहे थे और फिर वह अचानक कहां चले गए थे यह दो बातें मुझे लगातार परेशान कर रही थी मैंने इस बारे में नौकरों से भी पूछा था कि क्या किसी ने उन्हें उनकी बेटी के यहां जाते हुए देखा है

 

 तो घर की एक पुरानी नौकरानी ने मुझे बताया कि आप तो अच्छी तरह से जानती हो कि इस घर में सिर्फ ये दोनों बाप बेटे ही रहते हैं इनके अलावा इनका कोई भी नहीं है बड़े मालिक की कोई भी बेटी नहीं है सिर्फ एक बेटा ही है तो वह अपनी बेटी के यहां कैसे जा सकते हैं छोटे मालिक ही उनके इकलौते बेटे हैं यह बात सुनकर तो मेरे होश उड़ गए थे और मैं सोच में पड़ गई थी कि भला मेरे पति ने मुझसे झूठ क्यों बोला मेरा पति मुझसे झूठ बोल रहा था 

 

इसका मतलब यह था कि मेरे ससुर ने ठीक कहा था कि प्रदीप मेरे लिए ठीक नहीं है कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरे पति ने ही उनको कहीं भेज दिया हो मुझे तो सारा सच जानकर ही रहना था अपनी फोटोज लेकर मैं अपने कमरे में आ गई थी ताकि मैं अपने पति को दिखा सकूं और उनसे पूछ सकूं कि उनके पिता ने ऐसा क्यों किया था और आपने भी मुझसे झूठ क्यों बोला मैंने अपने पति को जब पूरी बात बताई और अपने फोटोस दिखाए तो मेरा पति खामोश हो गया था

 

 मैंने कहा तुम खामोश क्यों हो तुम इस बारे में सब कुछ जानते हो लेकिन मुझे बताना नहीं चाहते हो मैं सच जाने बिना यहां से हिलंग की भी नहीं मुझे मेरे सवालों के जवाब चाहिए मैंने देखा कि मेरे पति की आंखों में आंसू आ गए थे उन्होंने मुझे बताया कि दरअसल वह आदमी मेरा सगा पिता नहीं है बल्कि सौतेला पिता है मेरी मां की इस आदमी के साथ दूसरी शादी हुई थी और वह मुझे यहां लेकर आ गई थी फिर मेरी मां मर गई इस आदमी की नियत हर खूबसूरत लड़की पर खराब हो जाती है

 

 जब मैं यहां आया था और मैंने तुम्हें यहां काम करते हुए देखा था तो मुझे तुम पर बहुत तरस आया था क्योंकि हमारे यहां कोई भी जवान लड़की काम करने नहीं आती है तो मैं यहां पर आते ही फर उस लड़की को नौकरी से निकाल देता हूं लेकिन ना जाने क्यों तुम्हें देखते ही मैं तुम पर फिदा हो गया था मैं नहीं चाहता था कि तुम मेरे पिता की गंदी नजरों का शिकार बनो इसीलिए मैंने तुम्हें शादी के लिए फौरन ही प्रपोज कर दिया था और फैसला किया था कि मैं तुमसे शादी करूंगा

 

 मैंने अपने पिता को पहले ही समझा दिया था कि वह तुम्हारे साथ कोई उल्टी सीधी हरकत ना करें क्योंकि वह लड़की अब मेरी पत्नी बन चुकी है लेकिन मैं जानता था कि मेरा पिता अपनी हरकतों से बाज नहीं आए वह बहुत घटिया इंसान है औरतों पर गंदी नजर रखता है खूबसूरत लड़कियों के पीछे पड़ जाता है और उनका गलत फायदा उठाता है मेरी मां बहुत ज्यादा खूबसूरत थी इसने मेरी मां को अपने जाल में फंसा लिया था 

 

और जब मेरी मां को सच्चाई पता चली कि आदमी काफी सारी लड़कियों से अफेयर चला चुका है तो मेरी मां बीमार रहने लगी थी और वह इसी टेंशन में दुनिया को छोड़कर चली गई मेरे पहले पिता तो मैं 5 साल का था तभी मर गए थे इस आदमी ने मेरी मां को भरोसा लाया था कि वह उनसे प्यार करता है और उनसे शादी करना चाहता है लेकिन जब उसका दिल भर गया तो उसने मेरी मां को समझना ही बंद कर दिया मैं इस आदमी को अपना पिता नहीं मानता 

 

क्योंकि यह मेरा सौतेला पिता है तुम्हारी फोटोज चोरी करना इसने इसलिए शुरू कर दी थी क्योंकि यह तुम्हें पसंद करने लगा था अकेले में तुम्हारी फोटोज देखता था मैं इस आदमी से तुम्हें बचाना चाहता था इसीलिए मैंने उससे कहा था कि वह ज्यादा फालतू कमरे से बाहर ना निकला करें और घर के नौकरों से भी कह दिया था कि वह तुम्हारी देखभाल किया करें लेकिन जब तुमने मुझसे इसकी शिकायत की तो मैंने उसे इस शहर से वापस भेज दिया 

 

क्योंकि यह सब कुछ अब मेरा है मैंने उसको हमदर्दी के तौर पर इस घर में रखा हुआ था यह आदमी तो अपनी अयाशी की वजह से अपना सब कुछ बर्बाद कर चुका है अब यह जो कुछ है वह मेरी ही मेहनत का नतीजा है मैं जब चाहूं इस आदमी को अपने घर से निकाल सकता हूं लेकिन अब मुझसे इसकी हरकतें और ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुई इसलिए मैंने इसको अपने दिल्ली वाले फ्लैट में रहने के लिए भेज दिया और उससे सारे संबंध खत्म कर दिए

 

 अब तो वह यहां कभी वापस नहीं आएगा तुमसे झूठ इसलिए बोला था ताकि तुम्हें कुछ पता ना चल सके लेकिन सारी सच्चाई खुलकर तुम्हारे सामने हैं अपने पति की बातें सुनकर मेरे होश उड़ गए थे मैं अपने ससुर को बहुत अच्छा समझती थी लेकिन वह इतने घटिया इंसान निकल सकते थे मैंने ऐसा कभी सोचा भी नहीं था मेरे पति ने बहुत अच्छा किया था कि उस इंसान को इस घर से भगा दिया था क्योंकि औरत की इज्जत ना करने वाले इंसान की इज्जत नहीं करनी चाहिए

 

 मैं अपने पति के साथ हंसी खुशी जिंदगी गुजार रही हूं वह बहुत अच्छे हैं और तो और मेरी मां को भी हमारे घर पर ही बुला लिया है अब मेरी मां भी हम लोगों के साथ ही रहती है मैं अपने पति के साथ बहुत खुश हूं मेरे पति का सौतेला पिता अब हमारे घर में गलती से भी कभी नहीं आ सकता मेरे पति ने उस पर पहरे जो लगवा दिए हैं वह हम लोगों से बहुत दूर है 

 

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