Durga Aarti pdf Free Download,श्री दुर्गा आरती 2023

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भक्त लोग नवरात्री के पावन अवसर पर श्री दुर्गा माँ की आरती के लिए विधिवत पूजा करते हैं। जिससे दुर्गा माता अपने भक्तो से प्रसंन्न होकर उनके सभी दुःख को हर लेती है। आप लोग Durga Aarti pdf को स्वय डाउनलोड करके अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी शेयर कर दे ताकि वह भी इस का लाभ उठा सके , और दुर्गा माता आराधना कर सकें।

Durga Aarti pdf overview

PDF का नामDurga Aarti pdf (श्री दुर्गा आरती )
पेजों की संख्या3
भाषाहिंदी /संस्कृत
PDF साइज200 KB
PDF categoryधार्मिक (Religious )
PDF Published20 अप्रैल 2023
pdf creditMultiple

दुर्गा आरती क्या है ?

दुर्गा आरती एक हिंदू धार्मिक अनुष्ठान है जो देवी दुर्गा की पूजा के दौरान किया जाता है। दुर्गा आरती, पूजा का एक रूप है जिसमें माता दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए एक भक्ति गीत गाया जाता है जबकि देवता को एक दीपक जलाया जाता है। दुर्गा आरती का उद्देश्य देवी से आशीर्वाद प्राप्त करना और उनकी कृपा और सुरक्षा के लिए आभार व्यक्त करना है।

मुख्य पूजा (पूजा) पूरी होने के बाद शाम को दुर्गा आरती की जाती है। यह एक भक्ति गीत है जिसे देवी दुर्गा की स्तुति में गाया जाता है, जिन्हें दिव्य माँ और शक्ति और शक्ति का अवतार माना जाता है। आरती के साथ घंटियाँ भी बजाई जाती हैं, जिससे घर और मन के अंदर की नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म होती है , अगरबत्ती जलाई जाती है और एक दीपक को भी जलाया जाता है। 

दुर्गा आरती के गीत, क्षेत्र और परंपरा के आधार पर अलग-अलग होते हैं, लेकिन उनमें आम तौर पर देवी की स्तुति और उनसे आशीर्वाद और सुरक्षा के लिए अनुरोध शामिल होता है। दुर्गा आरती की कुछ लोकप्रिय पंक्तियों में “जय अम्बे गौरी” और “दुर्गा चालीसा” शामिल हैं। नवरात्रि, दुर्गा पूजा और विजयादशमी जैसे त्योहारों के दौरान आरती देवी दुर्गा की पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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Durga Aarti pdf Lyrics In Hindi With Meaning (श्री दुर्गा आरती अर्थ के साथ )

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत, मैया जी को सदा मनावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ – हे माँ दुर्गा देवी ,अम्बे आपकी जय हो। हे माता श्यामा गौरी ! आपकी जय हो। भक्त आपको अलग अलग नामो से पुकारते हैं । हे माता! भगवान श्री हरि विष्णुजी, ब्रह्माजी और शिवजी सदैव आपका स्मरण कर आपको मान्यता देते हैं, आपकी निरंतर पूजा करते हैं। हे! अम्बे आपकी जय हो।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना, निर्मल से दोउ नैना, चन्द्रबदन नीको ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ – हे माता दुर्गा! आपकी मांग में लगा सिन्दूर शोभायमान हो रहा है। आपके माथे पर कस्तूरी से किया गया तिलक दमक रहा है। आपकी निर्विकार उज्ज्वल निर्मल दो आँखें चमकती हैं और आपका शरीर  चन्दन की खुशबु की तरह महकता है। हे! अम्बे आपकी जय हो।

कनक समान कलेवर,,रक्ताम्बर राजै ।

रक्त पुष्प गलमाला, लाल कुसुम गलमाला, कण्ठन पर साजै ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ — हे माता दुर्गा ! आपका शरीर सोने की चमक की तरह चमक रहा है, आप भगवा गेरुआ वस्त्र रंग के धारण करती हैं। गले  के फूल आपके गले की शोभा बढ़ाते है। हे! अम्बे आपकी जय हो। 

केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्परधारी ।

सुर नर मुनिजन सेवत, सुर नर मुनिजन ध्यावत, तिनके दुखहारी ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ — हे माता दुर्गा ! आप अपने सिंह (शेर )पर सवार रहने वाली हैं। आप हाथों में खड्ग अर्थात तलवार और खप्पर जिसमें ज्वाला जलते रहते है को धारण करने वाली हैं। आपकी देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनिगण सभी गुणगान करते हुए सदैव सेवा करते हैं, जो भक्त आपकी भक्ति करते हैं उनके आप दुःखों को हर लेती हैं। हे! अम्बे आपकी जय हो।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चन्द्र दिवाकर, कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ – हे माता दुर्गा ! आप घने जंगल में कानों में पहने हुए कुण्डल और नाक के अग्र भाग में पहना हुआ मोती पहन कर जब विचरण करती है तो आपका स्वरुप बहुत ही शोभायमान होता हैं। ये ऐसे लग रहे हैं मानो करोड़ों सूर्य और चंद्रमा प्रकाशमान हो रहे हों। जिनकी ज्योति सूर्य और चन्द्रमा से बहुत ही आगे है ! अम्बे आपकी जय हो। 

शुम्भ निशुम्भ विडारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, मधुर विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ – हे दुर्गा माता! अपने दैत्य शुंभ और निशुंभ को अपने तेज प्रहार से मारकर दैत्य महिषासुर का भी वध किया है और तीनों लोकों का उद्धार किया है। आपके नेत्रों में धुएं की तरह ध्रुम निकलती है अर्थात ये नेत्र गौरवशाली लगते हैं। हे! अम्बे आपकी जय हो। 

चण्ड मुण्ड संघारे, शोणित बीज हरे ।

मधुकैटभ दोउ मारे, मधुकैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ – हे दुर्गा माता ! आपने चुण्ड और मुण्ड नामक दैत्यों का संहार किया है। रक्तबीज का भी आपने अंत कर सभी का उद्धार किया है। मधु और कैटभ नाम के दो दुर्दांत दैत्य भाइयों का भी आपने वध करके तीनो लोको को भय से मुक्त किया है। हे! अम्बे आपकी जय हो। 

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी, चारों वेद बखानी, तुम शिव पटरानी ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ – हे माता दुर्गा ! आप ही ब्रह्माणी अर्थात सरस्वती हो। आप ही रुद्राणी अर्थात पार्वती हो। और तुम ही कमला रानी अर्थात महालक्ष्मी हो। आपका शास्त्रों और वेदों में भी वर्णन है। हे माँ जगदम्बा आप भगवान शिव-शंकर की पटरानी अर्थात् भार्या हो। हे! अम्बे आपकी जय हो। 

चौसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरू ।

बाजत ताल मृदंगा, बाजत ढोल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ – हे  दुर्गा माता! चौंसठ योगिनी आपका गुणगान करती हैं और भैरों बाबा मग्न होकर आपका जयकार करते हुए नृत्य करते हैं। आपके द्वार में ढोल, नगाड़े और डमरू बजते हैं। हे! अम्बे आपकी जय हो। 

तुम हो जग की माता, तुम ही हो भर्ता ।

भक्तन की दुख हरता, संतन की दुख हरता, सुख-सम्पत्ति करता ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ –  हे माँ भवानी ! आप ही इस पूरे संसार की माता हो। आप ही सबका पालन-पोषण करने वाली हो। आप ही अपने भक्तों के दुःखों का हरण करने वाली हो। और आप ही सबको सुख-सम्पत्ति देने वाली हो। हे! अम्बे आपकी जय हो।

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी ।

मनवांछित फल पावत, मनइच्छा फल पावत, सेवत नर नारी ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ –  हे माता दुर्गा ! आपकी चार भुजाएँ बहुत ही सुंदर और शोभा देने वाली हैं। आप वरदान देती हुई मुद्रा में बहुत ही शोभायमान प्रतीत हो रही हैं। जो भी आपकी भक्ति करता है आप उसके समस्त कार्यो को पूरा करती हैं। आपकी पूरा समस्त स्त्री और पुरुष करते हैं।  हे! अम्बे आपकी जय हो। 

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्री मालकेतु में राजत, धोळा गिरी पर राजत, कोटि रतन ज्योति ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ – हे माता कल्याणी ! आपकी आरती सोने की थाल सजाकर की जाती है जिसमें धूपबत्ती, कपूर और दीपक  आरती उतरी जाती है । आप श्रीमालकेतु अर्थात् अरावली पर्वत का वह भाग जो कि चाँदी की तरह चमक प्रदान करने वाला है उसमें आप निवास करती हैं जहाँ करोड़ों रत्नों के प्रकाश से भी बढ़कर आपकी आरती का प्रकाश होता है। हे! अम्बे आपकी जय हो। 

श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावै, मैया प्रेम सहित गावें ।

कहत शिवानन्द स्वामी, रटत हरिहर स्वामी, मनवांछित फल पावै ।।

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत , मैया जी को सदा मनावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ।।

ॐ जय अम्बे गौरी ।

अर्थ –  हे जगत जननी दुर्गा माता! आपकी आरती को जो कोई भक्त अपने भक्तिभाव एवं श्रद्धाभाव से गाता है, उस पर आपकी कृपा सदैव बनी रहती है। ऐसे भक्तों को आप सुख- समृद्धि प्रदान करती हैं। हे! अम्बे आपकी जय हो।

हे माँ दुर्गा भवानी ! अम्बे आपकी जय हो। हे माता श्यामा गौरी ! आपकी जय हो। हे आनंद प्रदान करने वाली माँ ! आपकी जय हो। आपकी सदैव सभी लोग आराधना करते हैं। हे माता! भगवान श्री हरि विष्णुजी, ब्रह्माजी और शिवजी सदैव आपका स्मरण कर आपको मान्यता देते हैं आपकी पूजा करते हैं। हे! अम्बे आपकी जय हो। 

दुर्गा आरती करने के लाभ

दुर्गा आरती के पाठ को भक्तों के लिए आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक दोनों तरह के कई लाभ माने जाते हैं। दुर्गा आरती करने के निम्न लाभ ये हैं। 

आध्यात्मिक को बढ़ाता है: आरती देवी दुर्गा के प्रति भक्ति और आभार व्यक्त करने का एक तरीका है, जो परमात्मा के साथ आध्यात्मिक संबंध को गहरा करने में भक्त की मदद कर सकता है।

मन को केंद्रित करने में : आरती की पुनरावृत्ति मन को केंद्रित करने और मष्तिष्क को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है, जो तनाव और चिंता को कम करने के लिए फायदेमंद हो सकती है।

वातावरण को शुद्ध करता है: आरती के दौरान अगरबत्ती जलाना और दीपों को लहराना पर्यावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद कर सकता है।तथा नकारात्मक ऊर्जा का हराँस होता है 

सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है: एक मान्यता के अनुसार दुर्गा आरती के पाठ से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिसका मन और शरीर पर लाभकारी प्रभाव पड़ सकता है।

आंतरिक शांति को बढ़ावा देता है: आरती मन पर शांत प्रभाव डाल सकती है और आंतरिक शांति को बढ़ावा दे सकती है, जो समग्र कल्याण के लिए फायदेमंद हो सकती है। और मनुष्य को असीम शांति का एहसास होता है 

कुल मिलाकर, दुर्गा आरती एक शक्तिशाली भक्ति अभ्यास है जो भक्तों के लिए कई लाभ हो सकता है जो इसे ईमानदारी और पूरी भक्ति और निष्ठा के साथ करते हैं।

Durga Aarti pdf

सारांश –

आज के लेख में हम ने Durga Aarti के बारे में जाना और उसका अर्थ के साथ मतलब भी समझा , इसके अलावा आप इसे ऊपर दिए गए Durga Aarti pdf से अपने डाउनलोड भी कर सकते है।

दोस्तों , आज का लेख अगर आपको पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी अवश्य शेयर कर दे,ताकि वह भी Durga Aarti pdf का लाभ ले सके। तथा ऐसे ही लेख देखने के लिए आप इस वेबसाइट पर रेगुलर विजिट करते रहे – धन्यवाद

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FAQ Durga Aarti pdf

Q . हम माँ दुर्गा की आरती क्यों करते हैं ?

Ans – माँ दुर्गा की आरती करने से दुर्गा माता हमारे सभी दुखो को हर लेती है और हमें सकारात्मक ऊर्जा शांति का अनुभव होता है। इसे नित्य सुबह हमें करना चाहिए ,ताकि माँ दुर्गा का आशीर्वाद हमें मिलता रहे।

Q . Durga Aarti pdf कहा से प्राप्त करें ?

Ans – Durga Aarti pdf आप इस वेबसाइट www.pdfsewa.in से प्राप्त कर सकते है इसके अलावा आप इसे इस वेबसाइट से अपने मोबाइल में डाउनलोड भी कर सकते हैं।

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